मुजफ्फरनगर के बस कंडक्टर की बेटी के संघर्ष की कहानी:प्रियंका गोस्वामी कॉमनवेल्थ गेम्स के रेस वाकिंग में पेश करेंगी चुनौती

मुजफ्फरनगर2 महीने पहले
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प्रियंका गोस्वामी बर्मिंघम में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में 10 किमी रेस वाकिंग (पैदल चाल) में भारत की और से चुनौती पेश करेगी। मुजफ्फरनगर के गांव गढमलपुर सांगड़ी की बेटी 6 अगस्त को ट्रैक पर मेडल जीतने के इरादे से उतरेगी। बस कंडक्टर की इस बेटी का इस मुकाम तक पहुंचना दूसरों के लिए प्रेरणा देने वाला है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का गौरव बढ़ाने वाली ओलंपियन प्रियंका गोस्वामी के संघर्ष की प्रशंसा “मन की बात कार्यक्रम” में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर चुके हैं। आर्थिक तंगी से जूझती प्रियंका को भूख मिटाने के लिए एक समय गुरुद्वारे के लंगर पर निर्भर रहना पड़ा। पिता की नौकरी छूटी, तो भी हार नहीं मानी। पढ़िए उनके संघर्ष और सफलता की कहानी...

बर्मिंघम में 28 जुलाई से 8 अगस्त तक कॉमनवेल्थ गेम्स खेले जा रहे हैं। इसके रेस वाकिंग इवेंट में प्रियंका भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।
बर्मिंघम में 28 जुलाई से 8 अगस्त तक कॉमनवेल्थ गेम्स खेले जा रहे हैं। इसके रेस वाकिंग इवेंट में प्रियंका भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

गांव के सरकारी स्कूल में की प्रियंका ने पढ़ाई
फुगाना थाना क्षेत्र के गांव गढमलपुर सांगड़ी की रेस वाकिंग सेनसेशन प्रियंका गोस्वामी ने शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से की। कक्षा 7 तक करीब के गांव कुरावा में प्रियंका ने पढ़ाई की। इसके बाद 2006 में परिवार मेरठ जाकर बस गया। पिता मदनपाल गोस्वामी परिवहन विभाग में बस कंडक्टर के पद पर कार्यरत रहे।

एथेलेटिक्स बनने के लिए जिमनास्टिक को छोड़ दिया था। माता-पिता ने बेटी के इस फैसले में उसका साथ दिया।
एथेलेटिक्स बनने के लिए जिमनास्टिक को छोड़ दिया था। माता-पिता ने बेटी के इस फैसले में उसका साथ दिया।

प्रियंका गोस्वामी का रेस वाकिंग का सफर
कक्षा सात-आठ के दौरान प्रियंका का चयन केडी सिंह बाबू स्पोर्टर्स स्टेडियम में जिमनास्टिक के लिए हो गया था। प्रियंका की मंजिल तो एथेलेटिक्स थी। इसलिए वह वहां से जिमनास्टिक छोड़कर आ गईं और मेरठ के कनोहर लाल त्रिशला देवी कॉलेज में प्रवेश लिया।

पिता मदनपाल गोस्वामी के साथ प्रियंका की बचपन की तस्वीर। प्रियंका के हर फैसले पर पिता ने सहमति दी। आज वह दुनियाभर में भारत का नाम ऊंचा कर रही है।
पिता मदनपाल गोस्वामी के साथ प्रियंका की बचपन की तस्वीर। प्रियंका के हर फैसले पर पिता ने सहमति दी। आज वह दुनियाभर में भारत का नाम ऊंचा कर रही है।

मन में ओलिंपिक का सपना सजाए प्रियंका ने 20 किमी रेस वाकिंग के लिए प्रशिक्षण प्राप्त करना शुरू किया। प्रियंका ने उस समय राष्ट्रीय स्तर पर पांच, 10 तथा 20 किमी रेस में बहुत से पदक जीते। फरवरी 2021 में प्रियंका ने रांची में हुई आठवीं ओपन एंड थर्ड इंटरनेशनल रेस वाकिंग चैंपियनशिप में एक घंटा 48 मिनट तथा 45 सेकंड का समय निकाल नया रिकॉर्ड बनाया।

प्रियंका ने टोक्यो ओलिंपिक 2021 में हिस्सा लिया था। हालांकि, वह कोई मेडल नहीं जीत सकी थीं। इस बात की उन्हें टीस है।
प्रियंका ने टोक्यो ओलिंपिक 2021 में हिस्सा लिया था। हालांकि, वह कोई मेडल नहीं जीत सकी थीं। इस बात की उन्हें टीस है।

10 व 20 किमी रेस वाकिंग प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर पर कई गोल्ड और सिल्वर मेडल जीत चुकी प्रियंका ने टोक्यो ओलिंपिक में भी हिस्सा लिया था।

गुरुद्वारा का लंगर छखकर बचाए लंच के पैसे
ग्रामीण परिवेश से निकलकर अंतरराष्ट्रीय रेस वाकिंग प्रतियोगिता तक का सफर प्रियंका के लिए आसान नहीं रहा। प्रियंका के पिता मदनपाल गोस्वामी परिवहन विभाग में बस कंडक्टर के पद पर कार्यरत थे। एक घटनाक्रम में पिता सस्पेंड हो गए, तो प्रियंका को तैयारी के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

शुरुआती खेल प्रतियोगिता में जीत के बाद गांव वासियों ने प्रियंका को सम्मानित किया था। -फाइल फोटो।
शुरुआती खेल प्रतियोगिता में जीत के बाद गांव वासियों ने प्रियंका को सम्मानित किया था। -फाइल फोटो।

प्रशिक्षण के लिए प्रियंका पटियाला कैंप चली गईं। पब्लिक कॉलेज समाना में पढ़ते समय उसे पिता 4 हजार रुपए प्रति माह भेजते थे। प्रियंका के अनुसार, "यह धनराशि किसी भी राष्ट्रीय प्रतियोगिता की तैयारी के लिए नाकाफी थी। इसके बावजूद परिवार की आर्थिक तंगी के मद्देनजर मैं इसमें से भी पैसा बचाना चाहती थी। इसलिए दोपहर को लंच करना छोड़ दिया था। भूख मिटाने के लिए गुरुद्वारा में जाकर लंगर खाती थी।"

अब तस्वीरों में देखिए प्रियंका के जीवन के कुछ खास लम्हे

प्रियंका काफी धार्मिक प्रवृत्ति की हैं। वह कृष्ण को पूजती हैं और हर प्रतियोगिता और खास मौके पर लड्डू गोपाल का आशीर्वाद लेती हैं।
प्रियंका काफी धार्मिक प्रवृत्ति की हैं। वह कृष्ण को पूजती हैं और हर प्रतियोगिता और खास मौके पर लड्डू गोपाल का आशीर्वाद लेती हैं।
बेटी की हर कायमाबी पर मां उससे ज्यादा खुश होती थीं। प्रियंका की मां ने बताया कि मैंने बेटी के हर कदम का उसका हौसला बढ़ाया।
बेटी की हर कायमाबी पर मां उससे ज्यादा खुश होती थीं। प्रियंका की मां ने बताया कि मैंने बेटी के हर कदम का उसका हौसला बढ़ाया।
मस्कट में आयोजित एक रेस वाकिंग प्रतियोगिता में भाग लेती प्रियंका गोस्वामी।
मस्कट में आयोजित एक रेस वाकिंग प्रतियोगिता में भाग लेती प्रियंका गोस्वामी।
प्रियंका को फैशन का भी शौक है और इवेंट्स के बीच में कुछ समय अपने लिए भी निकाल लेती हैं।
प्रियंका को फैशन का भी शौक है और इवेंट्स के बीच में कुछ समय अपने लिए भी निकाल लेती हैं।
अपने फोटो शूट में वह चश्मा लगाकर ग्लैमरस लुक में नजर आ रही हैं।
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