मां तिहाड़ में और पिता स्वर्ग में, अधर में बच्चियां:गुर्दे की बीमारी में गई पिता की जान, दादा-दादी काे मासूमों की परवाह

एक महीने पहले
दादा-दादी काे मासूमों की परवाह

वक्त की मारी दो छोटी-छोटी बच्चियां आज दाने दाने को मोहताज हो गईं हैं। ये उनकी नियति नहीं बस बदकिस्मती की कहानी है जो दो साल पहले बेबस बाप की गुर्दे की बीमारी से शुरू हुई। उस पर गरीबी का दंश कि इलाज के पैसों के लिए मां सपना गोयल घरों में खाना बनाने के लिए दिल्ली गई। लेकिन बदकिस्मती ने वहां भी पीछा नहीं छोड़ा। सपना एक बड़े मामले में फंसकर तिहाड़ जेल पहुंच गई। इधर दोनों बच्चियां अपनी मां के लिए तड़पती रहीं उधर उपचार के अभाव में पिता शोभित गाेयल ने दम तोड़ दिया। चार साल की दिशा और पांच साल की अक्षिता का अब कोई पुरसाने हाल नहीं। बीमार दादा रमेश और दादी रमा गोयल ने उन्हें कलेजे से लगाया। हालात से मजबूर बुजुर्गों ने पोतियों की परवरिश और पढ़ाई के लिए अब जिला प्रोबेशन विभाग में अर्जी लगाई है।

शोभित की गुर्दे की बीमारी ने तोड़ दी परिवार की कमर

नई मंडी क्षेत्र के मोहल्ला शिवपुरी में किराए के मकान में रह रहीं रमा गोयल बतातीं हैं कि उनके बेटे शोभित गोयल को 2018 में गुर्दे की बीमारी हो गई थी। ढाई साल तक उपचार में 10 लाख से अधिक खर्च हुआ। जिसमें शोभित और उसके भाई चिराग की सारी जमा पूंजी खर्च हो गई।

नौकरी को दिल्ली गई सपना भी लौटकर नहीं आ पाई

बीमार पति शोभित गोयल के उपचार के लिए संघर्ष कर रही पत्नी सपना के सामने पैसों का संकट था। उसने तय किया कि वह दोनों बच्चियों को मुजफ्फरनगर छोड़कर दिल्ली चली जाएगी। जिसके बाद सपना ने दिल्ली जाकर घरों में खाना बनाना शुरू कर दिया। महीने में वह कुछ पैसे शोभित के इलाज के लिए भेजती थी। लेकिन 23 मार्च 2021 को अचानक एक बड़े मामले में दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। जिसके बाद उसे तिहाड़ जेल जाना पड़ा।

26 अप्रैल 2021 को शोभित ने बीमारी से तोड़ा दम

शोभित की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। अचानक सपना के गिरफ्तार होकर तिहाड़ जेल जाने की जानकारी न तो शोभित को लगी और न ही उसके माता-पिता को। इस बीच उसकी दोनों मासूम बच्चियां अपनी मां के लिए तड़पती रहीं। हालत बिगड़ने पर अचानक शोभित ने 26 अप्रैल 2021 को दम तोड़ दिया। दोनों मासूमों के सिर से बाप का साया उठ गया। एक सपना ने फोन कर तिहाड़ में होने की बात बताई तो बुजुर्ग सास-ससुर ने दोनों बच्चियों को तसल्ली दी।

नन्हीं बच्चियों का सवाल कहां गए उनके मम्मी-पापा

चार साल की दिशा और पांच साल की अक्षिता को यह नहीं पता की उनके पिता हमेशा के लिए उन्हें छोड़कर इस दुनिया से जा चुके हैं। उन्हें यह भी नहीं पता कि उनकी मां तिहाड़ जेल में बंद है। खेलते-खेलते न जाने दोनों के मन में कब ख्याल आ जाए और दादी के गले लगकर पूछ लें कि मम्मी-पापा कब आएंगे। रमा और नरेश गोयल बिलखते हुए कहते हैं कि अब उन्हें जीने की कोई तमन्ना नहीं, लेकिन वे सिर्फ इन दोनों बच्चियों के लिए जिंदा हैं।

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