रेप आरोपी की जमानत याचिका खारिज:जज ने वीडियो सुबूत देखकर सुनाया फैसला, मुजफ्फरनगर में 4 माह से जेल में है आरोपी

मुजफ्फरनगर3 महीने पहले
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नाबालिग छात्रा से रेप कर उसकी वीडियो वायरल करने का आरोपी शाका गिरी। - Dainik Bhaskar
नाबालिग छात्रा से रेप कर उसकी वीडियो वायरल करने का आरोपी शाका गिरी।

मुजफ्फरनगर में कोर्ट ने रेप के मामले में जेल में बंद आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी। जज ने वीडियो सुबूत देखकर यह फैसला सुनाया है। हालांकि वीडियो में रेप करते आरोपी का चेहरा नजर नहीं आया।

अभियोजन के अनुसार, थाना क्षेत्र पुरकाजी के एक गांव में 25 जनवरी 2022 को परचून की दुकान पर सामान लेने गई 14 वर्षीय लड़की से दुकानदार शाका गिरी उर्फ भूरा ने रेप किया था। सामान देने के बहाने दुकान में बुलाकर उसने दरिंदगी की थी। इसके बाद अश्लील वीडियो वायरल करने का डर दिखाकर उससे कई बार रेप किया गया। एक दिन पीड़िता ने मना किया तो रेप की वीडियो वायरल कर दी।

वीडियो वायरल होने पर पुलिस ने की थी गिरफ्तारी

नाबालिग के साथ रेप की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हड़कंप मच गया था। थाना पुरकाजी पुलिस हरकत में आ गई थी। गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर 7 फरवरी 2022 को आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोपित के वरुद्ध चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। वायरल वीडियो पैन ड्राइव में कर केस डायरी में संलग्न कर दी गई।

आरोपित के वकील की याचना पर देखी वीडियो

आरोपित के अधिवक्ता की ओर से कोर्ट में जमानत अर्जी लगाते हुए रेप की वायरल वीडियो चलाने का अनुरोध किया गया था। जिस पर विशेष पोक्सो एक्ट कोर्ट के जज संजीव कुमार तिवारी ने रेप की वायरल वीडियो की पैन ड्रावइ लैपटाप पर लगाकर अपने चैंबर में देखी। 4 मिनट की रेप की वीडियो में हांलाकि रेपिस्ट का चेहरा नजर नहीं आया। बावजूद कोर्ट ने माना कि वीडियो देखकर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मुकदमे के आरोपित ने इस घटना को अंजाम दिया या नहीं। विशेष लोक अभियोजक दिनेश शर्मा ने बताया कि वीडियो देखकर कोर्ट ने माना कि पीड़िता का रेप हुआ। पीड़िता ने पुलिस तथा मजिस्ट्रेट एवं मेडिकल के समय दिये गए बयान में आरोपित पर ही रेप का आरोप लगाया है।

कोर्ट ने माना अपराध गंभीर, जघन्य और बर्बरतापूर्ण

विशेष लोक अभियोजक दिनेश कुमार शर्मा ने बताया कि बचाव पक्ष की और से आरोपित को जमानत दिये जाने की गुहार लगाई गई थी। उन्होंने बताया कि दोनों पक्ष की बहस सुनने के बाद विशेष अपर सत्र न्यायाधीश पोक्सो एक्ट संजीव कुमार तिवारी ने आरोपित की जमानत अर्जी खारिज कर दी। उन्होंने बताया कि कोर्ट ने माना कि आरोपित का अपराध गंभीर, जघन्य तथा बर्बरतापूर्ण है।

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