स्वामी ओमानंद बोले, भगवान विश्वकर्मा शिल्पकला और विज्ञान के प्रवर्तक:मुजफ्फरनगर में विश्वकर्मा मन्दिर धर्मशाला नवनिर्माण का पीठाधीश्वर ने किया लोकार्पण

मुजफ्फरनगर5 महीने पहले
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विश्वकर्मा मन्दिर धर्मशाला समिति अध्यक्ष को सम्मानित करते स्वामी ओमानन्द महाराज। - Dainik Bhaskar
विश्वकर्मा मन्दिर धर्मशाला समिति अध्यक्ष को सम्मानित करते स्वामी ओमानन्द महाराज।

भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम, शुकतीर्थ के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानन्द ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा विश्व में शिल्प ज्ञान और विज्ञान के प्रवर्तक हैं। वेद, रामायण और महाभारत में ऋषि विश्वकर्मा की महिमा सुशोभित है।

विश्वकर्मा पूजा दिवस की पूर्व संध्या पर सम्बोधित करते आचार्य गुरुदत्त आर्य।
विश्वकर्मा पूजा दिवस की पूर्व संध्या पर सम्बोधित करते आचार्य गुरुदत्त आर्य।

विश्वकर्मा मंदिर के नवनिर्माण का लोकार्पण

इंदिरा कालोनी स्थित विश्वकर्मा मंदिर धर्मशाला के नवनिर्माण का लोकार्पण वेद मंत्रोच्चार के साथ मुख्य अतिथि स्वामी ओमानन्द ने किया। उन्होंने कहा कि देश में सभी धर्मों के लोग, उद्यमी, इंजीनियर्स 17 सितंबर को विश्वकर्मा भगवान का पूजन दिवस मनाते है। शिल्पकला और विज्ञान के प्रवर्तक, सृष्टि रचियता विश्वकर्मा सनातन संस्कृति में सभी देवताओं के आराध्य है। विश्वकर्मा भगवान समस्त धर्मों, जातियों के लिए पूज्यनीय है। वैदिक काल से ये समाज धर्मपरायण, संस्कारित, देशभक्त और परिश्रमी है। समाज और राष्ट्र के निर्माण में विश्वकर्मा वंशियो का अमूल्य योगदान है।

मुजफ्फरनगर में इंदिरा कालोनी स्थित विश्वकर्मा मन्दिर धर्मशाला के समारोह में वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानित करते स्वामी ओमानन्द महाराज एवं आचार्य गुरुदत्त आर्य।
मुजफ्फरनगर में इंदिरा कालोनी स्थित विश्वकर्मा मन्दिर धर्मशाला के समारोह में वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानित करते स्वामी ओमानन्द महाराज एवं आचार्य गुरुदत्त आर्य।

विश्वकर्मा वंश में आदि शंकराचार्य, वीतराग स्वामी कल्याणदेव, स्वामी रामसुखदास, स्वामी भीष्म जैसे महान संत जन्में है उन्होंने कहा कि ईश्वर पर सदैव भरोसा रखिये। ऋषियों के बताएं मार्ग पर चलें और सत्कर्म में जीवन लगाएं। पाप मुक्त जीवन ही मोक्षगामी है। राष्ट्र उन शिल्पियों, श्रमिकों और इंजीनियरों का ऋणी है, जिनके पुरुषार्थ और ज्ञान से भूमंडल की विविधता बनी हुई है।

शुकतीर्थ पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद।
शुकतीर्थ पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद।

महर्षि दयानन्द ने शिल्प को यज्ञकर्म बताया: गुरुदत्त आर्य

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि ऋषि अंगिरा की पुत्री योगसिद्धा का विवाह ऋषि वशिष्ठ के पुत्र ऋषि प्रभास से हुआ था, उन्हें से पुत्र विश्वकर्मा का जन्म हुआ। महर्षि दयानन्द ने शिल्प को यज्ञकर्म बताया है। देवताओं की रक्षा के लिए अनेकों अविष्कार ऋषि विश्वकर्मा ने किए। विश्वकर्मा ऋषि ने अपने ज्ञान, कौशल से सुदर्शन चक्र, पुष्पक विमान, सोने की लंका, द्वारिका, दधीचि ऋषि की हड्डियों का वज्र आदि बनाये। विश्वकर्मा समाज बंधु अंधविश्वास, पाखंड से परिवार को बचाये, यज्ञ, योग और वैदिक ग्रन्थों से संतान को जोड़िए। विश्वकर्मा धर्मशाला मंदिर समिति अध्यक्ष सरदार बलविंद्र सिंह एवं महामंत्री नरेंद्र कुमार श्रृंगी ने स्वामी ओमानन्द तथा आचार्य गुरुदत्त आर्य का अभिनंदन किया। इससे पूर्व अतिथियों ने गायत्री मंत्र के साथ भगवान विश्वकर्मा के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित किया। नरेश विश्वकर्मा ने संस्था के प्रगति कार्यो को प्रस्तुत किया। संचालन ओमदत्त आर्य ने किया।

वरिष्ठ नागिरकों का समिति ने किया अभिनंदन

धर्मशाला के जीर्णोद्धार कार्य में सहयोगी वरिष्ठ नागरिकों को मुख्य अतिथि स्वामी ओमानन्द ने पटका, स्मृति चिन्ह, शुकतीर्थ संदेश पत्रिका भेंट की। सम्मानित लोगों में देवदत्त धीमान, राममोहन जांगिड, शिव शर्मा, अमर सिंह धीमान, डॉ. अमन सिंह, कालूराम धीमान, वेदप्रकाश बेदी, प्रमोद धीमान, नरेश विश्वकर्मा, दयानन्द उर्फ बिट्टू, राजेश धीमान, नरेश धीमान, अधिवक्ता सचिन धीमान, नरेश धीमान, डॉ. सत्यपाल विश्वकर्मा, जनार्धन विश्वकर्मा, सहदेव धीमान, हरसौली से सतीश धीमान, मोरना से सुभाष धीमान, ककराला से रमेश चंद धीमान, नरेंद्र धीमान, प्रवीण धीमान, सत्यप्रकाश धीमान, सिसौली से राजेश धीमान, चन्द्रदत्त धीमान, महेंद्र दत्त धीमान, सुरेंद्र धीमान, मनुदत्त धीमान, सुनील धीमान रेई, रामबीर ठेकेदार, ताजपुर से सतीश धीमान, विनोद जांगिड, शिव कुमार , बिजेंद्र धीमान तथा सरदार हरविंदर सिंह आदि शामिल रहे।