मुजफ्फरनगर जिला पंचायत सदस्य उपचुनाव जीते प्रमोद अन्ना:तकरार में भाजपा से छिनी सीट, बसपा समर्थित ने मारी बाजी, बने नए समीकरण

मुजफ्फरनगर6 महीने पहले
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जिला पंचायत वार्ड 34 पर हुए उप चुनाव में जीते प्रमोद अन्ना। - Dainik Bhaskar
जिला पंचायत वार्ड 34 पर हुए उप चुनाव में जीते प्रमोद अन्ना।

मुजफ्फरनगर में भाजपा नेता वंदना वर्मा के त्यागपत्र से खाली हुई जिला पंचायत वार्ड 34 सदस्य सीट पर पार्टी को मुंह की खानी पड़ी। मतगणना के बाद इस सीट पर बसपा समर्थित उम्मीदवार प्रमोद उर्फ अन्ना को विजयी घोषित कर दिया गया। फिलहाल इस सीट पर बसपा समर्थित उम्मीदवार की जीत का एक कारण दो भाजपा विधायकों के बीच पैदा हुआ विवाद माना जा रहा है। कुछ दिन पूर्व दोनों के बीच फोन पर बहस का एक आडियो भी वायरल हुआ था।

भाजपा एमएलसी वंदना वर्मा तथा विधायक विक्रम सैनी-फाईल फोटो।
भाजपा एमएलसी वंदना वर्मा तथा विधायक विक्रम सैनी-फाईल फोटो।

उपचुनाव में कुछ ऐसे बने थे सियासी हालात

जिला पंचायत के वार्ड (खतौली एवं जानसठ) 34 पर 2021 में हुए चुनाव में भाजपा समर्थित वंदना वर्मा जीती थी। वंदना वर्मा को 9632 वोट मिले थे। 2022 में सहारनपुर मंडल की एमएलसी सीट से भाजपा ने वंदना वर्मा को चुनाव लड़ाया। वंदना वर्मा ने चुनाव जीतकर वार्ड 34 से इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद 4अगस्त को उपचुनाव हुआ। जिसमें 6 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला हुआ। लेकिन मतदान से पहले वार्ड में प्रत्याशियों के समर्थन को लेकर भाजपा के ही दो विधायकों एमएलसी वंदना वर्मा तथा विक्रम सैनी के बीच तकरार हुई। जो एक आडियो वायरल के रूप में सामने आई। दोनों के बीच नोंकझोंक का ऑडियो वायरल हुआ तो सियासी हलको में हंगामा गच गया। दाेनों के बीच वार्तालाप के आडियो से अंदाजा हुआ कि उप चुनाव में भाजपा के दोनों विधायक अपने-अपने समर्थक प्रत्याशियों को लेकर भिड़े रहे। चुनाव मैदान में 6 प्रत्याशी डा. प्रमोद कुमार अन्ना, संजीव कुमार, रविन्द्र कुमार, अमित कुमार, रोशन लाल सैनी और अमित कुमार मैदान में उतरे। संजीव को रालोद, प्रमोद को बसपा ने अपना समर्थन दिया। रविन्द्र कुमार को वंदना और रोशन सैनी को विक्रम सैनी अपने अपने प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा रहे थे। हालांकि यह दोनों ही इन प्रत्याशियों के लिए खुले रूप से जनता के बीच नहीं गये, लेकिन प्रचार इनका करते रहे।

1290 मतों से जीते बसपा समर्थित प्रमोद अन्ना

वार्ड 34 पर हुए उप चुनाव में बसपा समर्थित उम्मीदवार प्रमोद कुमार उर्फ अन्ना 1290 मतों से विजयी घोषित किये गए। वार्ड में खतौली और जानसठ ब्लॉक के 19 ग्राम पंचायतों के 40647 मतदाता पंजीकृत रहे। इनमें 13 गांव जानसठ ब्लाक के और छह खतौली ब्लाक के हैं। कुल 41 बूथ बनाए गए, इनमें 29 जानसठ ब्लाक के गांवों में और 12 खतौली ब्लाक के गांवों में बने। 29 स्थानों पर मतदान केंद्र बनाए गए, इनमें 22 जानसठ और सात खतौली में रहे। जानसठ ब्लाक के गांवों के 28 हजार 891 मतदाता है, जबकि खतौली ब्लाक के गांवों के 11 हजार 746 मतदाता हैं। गुरूवार को इस वार्ड में मतदान सम्पन्न कराया गया और 53.70 प्रतिशत वोटरों ने वोड डाले। यहां पर कुल 21864 मतदाताओं ने मतदान किया। आज सवेरे आठ बजे से जानसठ ब्लॉक में मतों की गिनती कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हुई थी। इसमें अपर जिलाधिकारी प्रशासन नरेन्द्र बहादुर सिंह अन्य अफसरों के साथ पूरी नजर रखे हुए थे। मतगणना सात राउण्ड में पूरी हुई। मतगणना के बाद जो परिणाम आये उन्होंने सभी को चौंका दिया। इस चुनाव में बसपा समर्थित प्रत्याशी डा. प्रमोद कुमार अन्ना को विजयी घोषित किया गया। जिला सहायक निर्वाचन अधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि आज मतगणना के बाद परिणाम घोषित किया गया। इसमें प्रमोद कुमार को 6679 मत मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी रविन्द्र कुमार को 5389 मत हासिल हुए। उपचुनाव में प्रमोद कुमार ने 1290 मतों के अंतर से जीत हासिल की। इसके साथ ही रोशन लाल सैनी को 5389, संजीव कुमार को 3990, अमित कुमार को 16 और सुंदरपाल को 34 मत मिले। जबकि 369 मत निरस्त किये गये। इस उपचुनाव के रिटर्निंग आफीसर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने जिला मुख्यालय पर विजयी प्रत्याशी प्रमोद अन्ना को विजयी प्रमाण पत्र सौंपा।

2021 चुनाव में वार्ड 34 का यह रहा था परिणाम

खतौली और जानसठ विकास खंड क्षेत्रों के 19 ग्रामों की जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करने वाले वार्ड 34 में भाजपा समर्थित प्रत्याशी के रूप में वंदना वर्मा ने 2021 में 9 हजार से ज्यादा मत प्राप्त कर जीत हासिल की थी। इस हार के कारण भाजपा की फजीहत होने लगी है। भाजपा में भी आत्ममंथन शुरू हो गया। हालांकि यहां पर भाजपा ने किसी भी प्रत्याशी को पार्टी के स्तर से समर्थन का ऐलान नहीं किया था और दोनों ही विधायक अपने अपने स्तर से अपने प्रत्याशियों को समर्थन दे रहे थे, लेकिन दोनों ही अपने प्रत्याशियों को जीत दिलाने में सफल नहीं हो पाये। इस तरह से भाजपा के समर्थन से जीते उम्मीदवार के त्यागपत्र देने से खाली हुई इस सीट पर विपक्ष का कब्जा हो गया।

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