"हर करबला के बाद इस्लाम जिंदा होता है":मुजफ्फरनगर में खुर्जेवाला इमामबारगाह से निकला चार मोहर्रम का जुलूस

मुजफ्फरनगर4 महीने पहले
चार मोहर्रम के जुलूस में जुलजुना (घोड़ा इमाम) थामे सोगवार खुर्शीद हैदर।

मुजफ्फरनगर के खुर्जेवाला इमामबारगाह में मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना हैदर मौलाई जार्चवी ने कहा कि हर करबला के बाद इस्लाम जिंदा होता है। उन्होंने फरमाया कि करबला में इमाम हुसैन ने यजीद की बात न मानकर दुनिया वालों को बता दिया कि सच और हक क्या होता है।

उन्होंने कहा कि करबला के मैदान में पहला आतंकवादी वाकया हुआ। तब से शिया सोगवार नोहाख्वानी और मातम कर आतंकवाद के खिलाफ एहतेजाद यानी प्रदर्शन करते आ रहे हैं।

मोहर्रम के जुलूस में हाथों में अलम थामे नन्हा सोगवार।
मोहर्रम के जुलूस में हाथों में अलम थामे नन्हा सोगवार।

जुलजुना की जियारत कर रोए सोगवार

शहर के खुर्जेवाला इमामबारगाह में 4 मोहर्रम की मजलिस हुई। मजलिस में मौलाना हैदर मौलाई ने दीन का फलसफा बयान किया। उन्होंने कहा कि करबला के मैदान में नवासाए रसूल (रसूल के नाती) इमाम हुसैन ने अपनी और अपने परिवार के लोगों की कुर्बानी पेश कर अपने नाना के दीन को जिंदा कर दिया।

मजलिस में मर्सियाख्वानी तौकीर हैदर ने की। मजलिस के बाद जुलूस बरामद हुआ। जिसमें जुलजुना (घोड़ा इमाम) की जियारत कर सोगवार रो पड़े। जुलूस खुर्जेवाला इमामबारगाह से खालापार आरफी इमामबारगाह के सामने होता हुआ खादर वाला पहुंचा।

जहां से कादिर राणा की पुरानी कोठी होते हुए तलबशाह रो, जैनबिया इंटर कालेज के सामने से किदवई नगर स्थित जाहिद हाल पर जाकर समाप्त हुआ। खुर्शीद हैदर ने जुलजुना संभाली। इस दौरान छोटे-छोटे बच्चे हाथों में अलम थामे नजर आए। जावेद अब्बास, शबाब हैदर, मोहर्रम अली, सलीस हैदर, नवाब हैदर, अली जैदी आदि शामिल रहे।

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