84 लाख के GPF घोटाले में 2 कर्मी गिरफ्तार:मुजफ्फरनगर के नलकूप खंड कर्मचारियों ने लगाई सेंध, अलमारी में आग लगा दस्तावेज किये थे नष्ट

मुजफ्फरनगर10 दिन पहले
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नलकूप खंड में जीपीएफ घोटाला कर दस्तावेज जलाने के आरोपित पुलिस हिरासत में। - Dainik Bhaskar
नलकूप खंड में जीपीएफ घोटाला कर दस्तावेज जलाने के आरोपित पुलिस हिरासत में।

मुजफ्फरनगर में 84 लाख रुपये का जीपीएफ घोटाला कर नलकूप खंड की अलमारी में आग लगाकर दस्तावेज नष्ट करने के आरोपित 2 विभागीय कर्मियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। धोखाधड़ी के दोनों आरोपितों का पुलिस ने चालान कर दिया। दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी होने से विभाग में हड़कंप मच गया।

यह है जीपीएफ दस्तावेज जलाने का पूरा मामला

मेरठ रोड डीएम आवास के समीप स्थित नलकूप खंड कार्यालय की एक अलमारी में 27 अप्रैल 2022 को आग लगा दी गई थी। आग के चलते अलमारी में रखे महत्वपूर्ण दस्तावेज नष्ट हो गये थे। इस मामले में विभाग के मुंशी विशाल के खिलाफ कोतवाली में जीपीएफ से संबंधित दस्तावेज जलाने के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ था। विभागीय जांच भी शुरू हो गई थी। इसके लिए SE सहारनपुर अनिल शर्मा ने नलकूप खंड सहारनपुर EXEN राकेश कपूर, EXEN निर्माण खंड मुजफ्फरनगर राकेश कुमार और नलकूप खंड मुजफ्फरनगर के लेखाधिकारी सचिन वर्मा को जांच सौंपी थी। जांच टीम ने उस अलमारी को खोलकर देखा, जिसमें आग लगाई गई गई थी। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के जीपीएफ से संबंधित अधिकतर दस्तावेज जले हुए मिले हैं।

बिना आवेदन कर दिया गया 13.2 लाख का भुगतान

जांच टीम को कुछ ऐसे सुबूत मिले हैं, जिनमें मुंशी विशाल के साथ ही जीपीएफ पटल देख रहे बाबू अंकुल कुमार भी दोषी पाये गये। आरोप है कि नलकूप चालक नरेश चंद को दस्तावेजों में चौकीदार दर्शाकर नई पेंशन स्कीम के चलते 13.20 लाख का भुगतान कर दिया गया है। जबकि नरेश ने कोषागार में इस संबंध में आवेदन नहीं किया है। आग लगाने के पीछे जीपीएफ घोटाले की आशंका है। करीब 84 लाख रुपये का रकम जीपीएफ खातों से निकाली गई है। जीपीएफ के नाम पर निकाले गए रुपयों को तीन कर्मचारियों ने खर्च कर दिया। तीनों से रिकवरी की तैयारी चल रही है। मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी और तीन कर्मचारियों से रिकवरी के लिए विभाग की ओर से डीएम चंद्रभूषण सिंह और एसएसपी अभिषेक यादव को पत्र लिखा गया।

नलकूप खंड प्रशासनिक अधिकारी ने कराई थी FIR

नलकूप खंड के प्रशासनिक अधिकारी अनिल कुमार ने इस मामले में शहर कोतवाली में 28 अप्रैल को तहरीर देते हुए विभाग के मुंशी बीजक सहायक विशाल कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। विशाल पर 27 अप्रैल को अलमारी में आग लगाकर विभागीय वित्तीय दस्तावेज नष्ट करेन का आरोप लगाया गया था। इस मामले में जांच चल ही रही थी कि विभागीय जांच में नये खुलासे होने पर नलकूप खंड कार्यालय के अधिशासी अभियंता अनिल कुमार ने मंगलवार को एक और तहरीर शहर कोतवाली में दी। जिसमें विशाल और अंकुल पर धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए। इस मामले में पुलिस ने दोनों कर्मचारियों के खिलाफ मु.अ.स. 239/22 में धारा 420, 467, 468, 471, 409 तथा 436 भादावि पंजीकृत किया गया। इस मामले में विशाल व अंकुल को सस्पेंड किया गया है। विशाल को आगरा कार्यालय से अटैच किया गया है।

गिरफ्तारी के बाद किया गया दोनों का चालान

पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। शहर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक आनंद देव मिश्रा ने बताया कि चौकी प्रभारी खालापार एसआइ प्रवेश कुमार शर्मा द्वारा इस मामले में वांछित अभियुक्तों पटल क्लर्क अंकुल कुमार पुत्र रूपचंद निवासी गांव बहादरपुर थाना सिखेड़ा जनपद मुजफ्फरनगर व मुंशी बीजक सहायक विशाल कुमार पुत्र स्व. सुभाष चंद्र निवासी ग्राम सिमर्थी थाना छपार को सहारनपुर अड्डा रुड़की रोड से गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि दोनों कर्मचारियों को गिरफ्तारी के बाद जेल भेज दिया गया है।

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