यूपी के राघोपुर से ग्राउंड रिपोर्ट:15 साल से टूटे पैर लेकर 8 लोगों का खाना बना रही हैं 62 साल की अम्मा, नल से निकलता है नाले का पानी

7 महीने पहले

किसकी सरकार बन रही है और कौन विधायक बन रहा है? जब ये जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम चित्रकूट के सीतापुर पहुंची तो हमें वहां राघोपुर नाम की एक बस्ती दिखाई दी। हम जैसे ही वहां घुसे, बदबू ही बदबू थी। टूटी-फूटी झोंपड़ियों की बगल से गंदा नाला बह रहा था। इस बस्ती में करीब 400 परिवार रहते हैं। लोगों ने हाथ में माइक देखा तो उन्हें ऐसा लगा जैसे अब उनके सारे दुःख दूर हो जाएंगे। हम चुनावी हालचाल जानने की कोशिश करते उससे पहले ही उन्होंने वहां घूसखोरी के हालचाल बताने शुरू कर दिए।

आइए आपको गरीबों के साथ हो रहे भ्रष्टाचार की कहानी उन्हीं जुबानी बताते हैं…

गंदे नाले की बगल में रह रहे लोग, टूटी झोपड़ी के बाहर खाना बना रही टूटे पैरों वाली अम्मा

हम बस्ती की ओर बढ़े तो नाले की बगल में टूटी-फूटी झोंपड़ियां बनी हुई थीं। बच्चे गंदे, फटे कपड़े पहने खेल रहे थे। हमें देखते ही लोगों की भीड़ जमा हो गई। उन्होंने कहा, “भाईसाहब यहां के नल से नाले का पानी निकलता है। बस्ती के 200 परिवार इसी नल का पानी पीते हैं।”

15 साल से टूटे पैरों के साथ 8 लोगों के परिवार का भोजन बनाती समरिया
15 साल से टूटे पैरों के साथ 8 लोगों के परिवार का भोजन बनाती समरिया

समरिया नाम की बूढ़ी अम्मा, टूटी झोपड़ी के बाहर 8 लोगों का खाना बनाते दिखी तो हम भी उनके पास जा बैठे। उन्होंने बताया, “हमारी कोई नहीं सुनता। 15 साल से टूटे पैरों के साथ जी रही हूं। कोई सरकारी इलाज नहीं मिला। ना ही मकान मिला है, ना ही इलाज कराने वाला कार्ड और ना ही कोई पेंशन।”

कॉलोनी तब मिलती है जब घूस दो, कोटेदार तो कई लेवल पर भ्रष्टाचारी करते हैं

हम थोड़ा आगे और लोगों से पूछा किसकी सरकार बनवा रहे हैं? टीबी की दवाइयां खा रहे एक बुजुर्ग दयाराम ने कहा, “सरकार किसी की भी बन जाए हमारी जिंदगी ऐसे ही कटनी है। रहने को घर नहीं, खाने को राशन नहीं और इलाज के लिए कोई सरकारी मदद नहीं।” एक बूढ़ी अम्मा ने कहा, “अंगूठा न लगने की वजह से 4 महीने से राशन नहीं मिला है, भीख मांग कर गुजारा कर रही हूं।”

खुद के पैसे से लेकर आए हैं टीबी की दवाइयां दयाराम जी
खुद के पैसे से लेकर आए हैं टीबी की दवाइयां दयाराम जी

वहीं खड़े राजकरण ने बताया, “मकान बनवाने के लिए हमें यहां घूस देनी पड़ती है। क्षेत्र का JE, कॉलोनी पास करने के लिए 5 हजार से लेकर 10 हजार रूपए तक की मांग करता है। जो पैसे देता है उसी की कॉलोनी पास होती है। जो नहीं देता उसे मकान नहीं मिलता। घूस न देने की वजह से डेढ़ साल से मुझे कॉलोनी नहीं मिल पाई है।” सावित्री ने भी कहा, “हमने भी मकान के लिए 5 हजार की घूस दी है।”

फेरी का काम करने वाले अशोक सोनकर ने कहा, “पिछले 11 साल से कोशिश कर रहा हूं राशन कार्ड नहीं बन पाया है। कोटेदार रमेश अग्रवाल को 1500 रुपए दिए तब उसने मुझे पर्ची बना कर दी। अब राशन मिलना शुरू हुआ है।”

मकान और राशन के लिए हो रहे भ्रष्टाचार की दास्तान बताते अशोक
मकान और राशन के लिए हो रहे भ्रष्टाचार की दास्तान बताते अशोक

कुछ अन्य लोगों ने बताया, “यहां हर एक कोटेदार, अगर 3 यूनिट से चौथा यूनिट है तो 5 किलो गल्ला हर एक यूनिट में कटता है और ब्लैक में बेच दिया जाता है।” कोटेदारों द्वारा गल्ला काटे जाने की बात भाजपा समर्थक भवानी शरण जोशी ने भी कही। भवानी ने कहा, “खाद्य विभाग से लेकर डीएम तक कहीं भी शिकायत कर दो। कोटेदार को पता चल जाता है। फिर लोगों को और ज्यादा समस्याओं का सामना करना पड़ता है।”

लोगों ने बताया, “कोटेदार रमेश अग्रवाल विकलांग है, मुकदमे लगाने की धमकी देता है। ऐसे ही दूसरा कोटेदार अशोक गिरी कलकत्ता में रहता है। अपने नौकर से राशन की दुकान चलवाता है। पहले अशोक का बाप कोटेदार था, अब वो है और आगे उसका नाती बनेगा। नौकर हमारा राशन काटते हैं।”

यहीं बगल में कच्ची शराब बनती है, बहन-बेटियों को गाली देते हुए निकलते हैं लोग

शराबियों की वजह से खुद को असुरक्षित बताती हुई युवती
शराबियों की वजह से खुद को असुरक्षित बताती हुई युवती

बस्ती के सबसे पढ़े-लिखे युवा लड़के-लड़कियों ने बताया, “यहां बगल में ही अवैध कच्ची शराब बनती है। सितरा, कामतन, रामघाट से भी लोग पीने आते हैं। महिलाओं बेटियों को छेड़ते हैं। गली से उनको गालियां देते हुए निकलते हैं।”​ लड़कियों ने कहा, हमारे पास घर नहीं हैं। टूटे घर में हमें सुरक्षित महसूस नहीं होता।"