पहली बार अखिलेश-जयंत की प्रेस कॉफ्रेंस:मुजफ्फरनगर में अखिलेश ने कहा- मैं और जयंत किसानों के बेटे हैं, उनके हकों के लिए लड़ेंगे

मुजफ्फरनगर4 महीने पहले

शुक्रवार को मुजफ्फरनगर में अखिलेश और जयंत ने पहली बार संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस की। इसमें अखिलेश ने पश्चिम यूपी की सियासत में सबसे अहम जाट और किसानों को साधने की कोशिश की है। अखिलेश ने कहा कि मैं और जयंत दोनों किसान के बेटे हैं। किसानों के हकों के लिए आखिरी तक लड़ेंगे। भाजपा किसानों की रजामंदी के बिना तीन कृषि कानून लेकर आई थी। इस वजह से उन्हें विरोध के बाद वापस लेना पड़ा। सपा-आरएलडी कोई भी काले कानून उत्तर प्रदेश में लागू नहीं करने देगी। गन्ना किसानों का भुगतान भी 15 दिनों के भीतर किया जाएगा।

भाजपा का राजनीतिक पलायन होगा
अखिलेश ने कहा कि मैं भाजपा का हर वादा जुमला निकला, झूठे विज्ञापन दिए। इस बार भाजपा का राजनीतिक पलायन होगा। सीएम योगी पहले अयोध्या से टिकट मांग रहे थे, फिर कहां चले गए। उन्होंने कहा कि वह देरी से आने के लिए माफी मांगते हैं, उनके हेलीकॉप्टर को आगे नहीं बढ़ने दिया गया। काफी देर तक दिल्ली में रोके रखा गया।

उन्होंने कहा कि यह चुनाव किसानों के भविष्य का है। नौजवानों का है। भाजपा अभी भी पुराने मुद्दे उठा रही है। यहां बड़े पैमाने पर बेरोजगार हैं। प्रयागराज में सही से परीक्षा कराना किसकी जिम्मेदारी थी। नौजवानों को नौकरी रोजगार मिलेगी या नहीं मिलेगी, भाजपा इस पर बात नहीं करना चाहती। इस बार भाजपा का राजनीतिक पलायन होगा। भाजपा का हर वादा जुमला है। भाजपा पर्चा बांटकर कोरोना फैला रही है।

जयंत बोले- अखिलेश के पास विजन, काम करने की क्षमता
इस दौरान जयंत चौधरी ने कहा कि अखिलेश यादव के पास विजन, काम करने की क्षमता और अनुभव है। पूरी यूपी में आज अखिलेश यादव की ही धूम है। जयंत ने कहा कि बहुत लोगों को संशय था कि संगम होगा की नहीं, लेकिन संगम तो हो चुका है। यूपी में आज एक ही चेहरा दिख रहा है।

जयंत और अखिलेश ने पहली बार मुजफ्फरनगर में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
जयंत और अखिलेश ने पहली बार मुजफ्फरनगर में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

दो दिन पहले दिल्ली में शाह ने जाटों के साथ मीटिंग
बुधवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली में जाट नेताओं से मुलाकात की थी। बताया जा रहा है कि इसमें शाह ने कहा था कि जो भी झगड़ा है मुझसे कर लीजिए। पार्टी से नाराजगी न रखिए। सिर्फ यही नहीं, शाह ने भाजपा और जाटों का 650 साल पुराना रिश्ता भी बताया था। इसमें उन्होंने कहा था कि आप(जाट) भी मुगलों से लड़े थे, हम भी मुगलों से लड़ रहे हैं।

जयंत के लिए भाजपा ने भी दरवाजे खाले
इस बैठक में भाजपा ने रालोद प्रमुख जयंत के प्रति सॉफ्ट कार्नर दिखाया था। जयंत के मुद्दे पर शाह ने कहा था कि फिलहाल उन्होंने एक पार्टी चुन ली है। वहीं, भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा ने कहा था कि हम चाहते हैं कि जयंत भाजपा में आए। उनके लिए हमेशा पार्टी के दरवाजे खुले हैं। फिलहाल, उन्होंने गलत रास्ता चुन लिया है। चुनाव बाद काफी संभावनाएं हैं।

पश्चिम में 75 विधानसभा सीट हैं अहम
पश्चिम यूपी के मेरठ मंडल, सहारनपुर मंडल, आगरा, अलीगढ़, मुरादाबाद, बरेली मंडलों की 75 विधानसभा सीटों पर जाट वोट प्रभाव डालता है। अगर वेस्ट यूपी के 6 मंडल- आगरा, मेरठ, मुरादाबाद, बरेली, सहारनपुर, अलीगढ़ की बात करें तो इनमें कुल 113 सीट हैं। यहां 2017 में 91 पर बीजेपी ने जीत दर्ज की थी। जबकि 17 पर सपा जीती थी।

बता दें कि यूपी में जाटों की आबादी करीब 4 फीसदी है, जबकि पश्चिम यूपी में 17 फीसदी है। मुस्लिम आबादी यूपी में भले ही 20 फीसदी है, लेकिन पश्चिम यूपी में 32 फीसदी है। ऐसे ही दलित मतदाता यूपी में 21 फीसदी है, जबकि पश्चिमी यूपी में 26 फीसदी के करीब है, जिनमें 80 फीसदी जाटव शामिल है। ऐसे में पश्चिमी यूपी की चुनावी बाजी इन्हीं जातियों के हाथों में है, जिन्हें साधने के लिए सभी पार्टियां हरसंभव कोशिश में जुटी हैं।