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रामलला का मंदिर 318 खंभों पर खड़ा होगा:वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा ने कहा- 120 एकड़ भूमि पर 5 गुंबदों वाला तीन मंजिला मंदिर दुनिया में कहीं नहीं

अयोध्या23 दिन पहलेलेखक: आदित्य तिवारी
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अयोध्या में भगवान राम के मंदिर के नक्शे के साथ वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा। उन्होंने बताया कि संतों और ट्रस्ट की इच्छा पर नक्शे में बदलाव किए गए हैं।
  • 161 फीट ऊंचा होगा रामलला का मंदिर, तीन तलों पर 106-106 खंभे लगेंगे
  • खंभों की ऊंचाई 14 फीट 6 इंच होगी, हर खंभे में 16 मूर्तियां तराशी जाएंगी

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के करीब 9 माह बाद 5 अगस्त से अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा। शनिवार को श्रीराम तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में शिलान्यास, निर्माण और मंदिर के स्वरूप को लेकर निर्णय हुए। सबसे बड़ा निर्णय शिलान्यास के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी का रहा। दूसरा सबसे अहम निर्णय मंदिर निर्माण से जुड़ा था। इसके तहत मंदिर अब दो नहीं बल्कि तीन मंजिला होगा।

इसकी लंबाई 268 फीट और चौड़ाई 140 फीट होगी। पहले इसकी ऊंचाई 128 फीट तय की गई थी जो अब 161 फीट हो गई है। तीन मंजिला (तल) बनने वाले मंदिर में 318 खंभे होंगे। हर तल पर 106 खंभे बनाए जाएंगे। राम मंदिर के नक्शे को नए सिरे से तैयार करने में वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा जुटे हैं। उन्होंने कहा कि करीब 100 से 120 एकड़ भूमि पर पांच गुंबदों वाला तीन मंजिला मंदिर दुनिया में कहीं नहीं है। 

सोमनाथ मंदिर और अक्षरधाम जैसे मंदिरों को बनवाने वाले चंद्रकांत सोमपुरा ने साल 1987 में विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल के कहने पर राम मंदिर का मॉडल तैयार किया था। इसमें पूरे मंदिर के निर्माण में करीब 1.75 लाख घन फुट पत्थर की जरूरत बताई गई थी। अब जब मंदिर का स्वरूप बदल गया है तो इसका नक्शा भी बदल जाएगा। दैनिक भास्कर ने सोमपुरा से बात की। एक रिपोर्ट... 

गुंबद की संख्या बढ़ने पर एक और तल बढ़ाना जरूरी था- सोमपुरा

सोमपुरा ने बताया कि मंदिर के शिखर की ऊंचाई बढ़ाने और गुंबदों की संख्या तीन से पांच किए जाने के बाद एक और मंजिल को बढ़ाना आवश्यक हो गया था। ऐसा संतों और ट्रस्ट की इच्छा पर किया गया है। खंभों की ऊंचाई 14 फीट 6 इंच होगी। हर खंभे में 16 मूर्तियां तराशी जाएंगी।

मंदिर में दो चबूतरे होंगे। पहला चबूतरा 8 फीट ऊंचा और 10 फीट चौड़ा होगा। यह चबूतरा परिक्रमा मार्ग पर होगा। दूसरा चबूतरा 4 फीट 9 इंच का होगा और उसके ऊपर खंभे लगेंगे। अब मंदिर के क्षेत्रफल में भी विस्तार होगा।

पहले के नक्शे के अनुसार, नागर शैली के इस मंदिर परिसर क्षेत्र का दायरा करीब 67 एकड़ में रखा गया था, जिसे नए डिजाइन और ऊंचाई की आवश्यकता के अनुसार 100 से 120 एकड़ में बढ़ाया जा सकता है। अभी राम जन्मभूमि के पास 67 एकड़ भूमि है। ऐसे में जरूरत की अन्य जमीन को आसपास से अधिग्रहित किया जा सकता है। मंदिर की रूपरेखा तैयार होने के 15 दिन के अंदर ही नई डिजाइन के अनुसार मास्टरप्लान तैयार हो सकता है।

कितनी लागत लगेगी, यह अभी बता पाना मुश्किल- सोमपुरा

सोमपुरा ने बताया कि मंदिर के मौजूदा डिजाइन के हिसाब से करीब 100 करोड़ रूपए की लागत आएगी, ऐसा नहीं कहा जा सकता है। अगर डिजाइन में बदलाव होता है तो खर्च बढ़ सकता है। लागत इस बात पर भी निर्भर करेगी कि मंदिर को किस समय सीमा में पूरा करना है। निर्माण को समय सीमा में पूरा करने के लिए ज्यादा संसाधन और बजट की जरूरत होगी। वर्तमान में लागत का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। 

गर्भगृह में कोई बदलाव नहीं होगा- सोमपुरा

सोमपुरा ने स्पष्ट किया कि गर्भगृह, आरती स्थल, सीता रसोई, रंगमंडपम की संरचना में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसकी संरचना पहले बनाए गए नक्शे के हिसाब से ही रहेगी। नए राम मंदिर की ऊंचाई बढ़ाई गई है, लेकिन यह भारत में सबसे ऊंचे शिखर वाला मंदिर नहीं होगा। दक्षिण भारत में कई मंदिरों के शिखर की ऊंचाई 200 से 250 फीट से ज्यादा है। अक्षरधाम समेत कई मंदिरों में पांच गुंबद हैं। द्वारका मंदिर तो सात मंजिला है। लेकिन, 100 एकड़ भूमि में बनने वाला यह इकलौता मंदिर है। 

सोमपुरा ने कहा- 80 प्रतिशत पत्थर तराशा गया

सोमपुरा ने बताया कि अब तक 80 हजार घन फुट पत्थर तराशा जा चुका है। करीब इतने ही पत्थर की और जरूरत पड़ सकती है। यह पत्थर बंसी पहाड़पुर से लाया जाएगा। तराशी का कार्य भी बरसात के बाद तेज होगा और इसमें हजारों कारीगर लगाए जा सकते हैं।

साढ़े तीन साल में बन जाएगा, कारीगर भूमिपूजन बाद आ जाएंगे

सोमपुरा ने बताया कि तय समय पर कार्य के लिए बड़े ठेकेदारों की भी जरूरत पड़ेगी। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण का कार्य तीन से साढ़े तीन साल में पूरा करने के लिए कम से कम पांच-छह बड़े ठेकेदारों की जरूरत होगी। दो मंजिला मंदिर का निर्माण दो-ढाई साल में ही पूरा करने का लक्ष्य था।

मंदिर निर्माण कार्य की जिम्मेदारी संभालने वाली स्वदेशी कंपनी लार्सन एंड टुब्रो मिट्टी के परीक्षण लेकर उसकी ताकत को परख रही है। मिट्टी की ताकत के आधार पर नींव का निर्माण 60 से 70 फीट नीचे तक किया जाएगा। पत्थर के कारीगरों से बातचीत हो गई है। भूमिपूजन के बाद जैसे ही कहा जाएगा वह अयोध्या आ जांएगे।

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