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पीओके से पवित्र मिट्टी पहुंची अयोध्या:भारतीय पीओके नहीं जा सकते, इसलिए चीन के वीजा पर हॉन्गकॉन्ग से शारदा पीठ पहुंचे और वहां से मिट्टी लेकर आए

अयोध्याएक महीने पहलेलेखक: आदित्य तिवारी
  • शारदा पीठ पीओके में है, यह भारत के उरी से करीब 70 किमी दूर है
  • वहां जाने के लिए दो रूट हैं, पहला मुजफ्फराबाद की तरफ से और दूसरा पुंछ-रावलकोट से

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल हुए और राम मंदिर की नींव रखी। भूमि पूजन के लिए देशभर से पवित्र जल और मिट्टी अयोध्या लाई गई थी। इसमें पीओके में स्थित पवित्र शारदा पीठ से भी प्रसाद और पवित्र मिट्टी अयोध्या लाई गई। कर्नाटक के रहने वाले और सेवा शारदा पीठ के सक्रिय सदस्य अंजना शर्मा आज मिट्टी लेकर अयोध्या पहुंचे।

दरअसल पीओके में भारतीय नागरिकों को जाने की अनुमति नहीं है। इसलिए चीन में रहने वाले भारतवंशी वेंकटेश रमन और उनकी पत्नी को चीन के पासपोर्ट से पीओके भेजा गया। दंपती हॉन्गकॉन्ग से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की राजधानी मुजफ्फराबाद पहुंचे।

सेवा शारदा पीठ के सक्रिय सदस्य अंजना शर्मा आज मिट्टी लेकर अयोध्या पहुंचे।
सेवा शारदा पीठ के सक्रिय सदस्य अंजना शर्मा आज मिट्टी लेकर अयोध्या पहुंचे।

पीओके पहुंचने के बाद वे शारदा पीठ से प्रसाद और पवित्र मिट्टी लेकर हॉन्गकॉन्ग होते हुए दिल्ली आए। यहां उन्होंने अंजना शर्मा को यह मिट्टी सौंप दी। शर्मा ने बताया कि वे शारदा पीठ के मुख्य रविन्द्र पंडित के निर्देश पर आए हैं। अयोध्या पहुंचने पर उनका जोरदार स्वागत किया गया।

इसके साथ ही शर्मा अपने साथ कर्नाटक के अंजना पर्वत, जिसे राम भक्त हनुमान का जन्म स्थान माना जाता है, वहां से भी पवित्र जल लाए। उन्होंने बताया कि रावण भगवान शिव के जिस लिंग को लेकर जा रहा था, उस गोकर्ण से भी पवित्र जल भूमि पूजन के लिए अयोध्या लाया गया।

तस्वीर नीलम घाटी की है। यहीं से होकर नीलम नदी बहती है, इसे किशन गंगा भी कहा जाता है।
तस्वीर नीलम घाटी की है। यहीं से होकर नीलम नदी बहती है, इसे किशन गंगा भी कहा जाता है।

शारदा पीठ पीओके में है। यह पीठ कश्मीरी पंडितों के लिए तीन प्रसिद्ध पवित्र स्थलों में से एक है। यह नीलम नदी के किनारे है। यह भारत के उरी से करीब 70 किमी दूर है। यहां जाने के लिए दो रूट हैं। पहला मुजफ्फराबाद की तरफ से और दूसरा पुंछ-रावलकोट से। उरी से मुजफ्फराबाद वाला रूट कॉमन है। ज्यादातर लोग इसी रूट से जाते हैं।

पिछले साल पाकिस्तान सरकार ने 25 मार्च को एक कॉरिडोर बनाने की मंजूरी दी थी, ताकि भारत के हिंदू शारदा पीठ आ सकें। बताया जाता है कि यहां प्रसिद्ध शारदा विश्वविद्यालय भी था। जहां पांच हजार से ज्यादा विद्वान पढ़ते थे। कहा जाता है कि आदि शंकराचार्य भी वहीं पढ़े थे।

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