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  • Babri Masjid: Babri Masjid Demolition Case History Update | Here's A Timeline Of The Events, 17 Major Changes In 27 Years

27 साल के 17 तारीखों में अब तक क्या-क्या हुआ?:बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में पूर्व सीएम कल्याण सिंह पर एफआईआर दर्ज करने के लिए सीबीआई को करना पड़ा था दो साल इंतजार

लखनऊ13 दिन पहले
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27 साल पहले अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को कारसेवकों ने विवादित बाबरी ढांचे को गिरा दिया था। अब इस जगह राम मंदिर का निर्माण हो रहा है। -फाइल फोटो
  • 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाने के मामले में एफआईआर दर्ज हुई थी
  • 30 सितंबर को सीबीआई की विशेष अदालत सुनाएगी अपना फैसला
  • आडवाणी, उमा, कल्याण, जोशी जैसे बड़े नेता आरोपी, 49 आरोपी बनाए गए थे, अभी महज 32 जीवित

अयोध्या में राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मंदिर का निर्माण शुरू हो चुका है। इस भूमि पर 1992 तक विवादित ढांचा (बाबरी मस्जिद) था, जिसे छह दिसंबर को कारसेवकों ने ढहा दिया था। इसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। अब 27 साल फैसले की घड़ी आई है। 30 सितंबर को सीबीआई की विशेष अदालत अपना फैसला सुनाएगी। इसमें पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व सीएम कल्याण सिंह, उमा भारती, मुरली मनोहर जोशी जैसे बड़े नेता समेत 32 आरोपी शामिल हैं। सभी को अदालत में रहना होगा।

एक सितंबर को इस मामले में बचाव और अभियोजन पक्ष की मौखिक बहस पूरी हुई थी। इसके साथ ही करीब रोज-ब-रोज हो रही मामले की अंतिम सुनवाई भी मुकम्मल हो गई थी। दो सितंबर से अदालत ने अपना फैसला लिखना शुरू कर दिया था। आइए जानते हैं 27 साल में हुए 17 बड़े घटनाक्रम के बारे में...

दो एफआईआर पुलिसवालों ने तो 47 एफआईआर पत्रकारों ने दर्ज कराए थे

06 दिसंबर 1992: विवादित ढांचा ढहाया गया। कुल 49 एफआईआर दर्ज हुए थे। एक एफआईआर फैजाबाद के थाना राम जन्मभूमि में एसओ प्रियवंदा नाथ शुक्ला, जबकि दूसरी एफआईआर एसआई गंगा प्रसाद तिवारी ने दर्ज कराई थी। शेष 47 एफआईआर अलग-अलग तारीखों पर अलग-अलग पत्रकारों व फोटोग्राफरों ने भी दर्ज कराए थे।

05 अक्टूबर 1993: सीबीआई ने जांच के बाद कुल 49 अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। इसमें 13 अभियुक्तों को विशेष अदालत ने आरोप के स्तर पर ही डिस्चार्ज कर दिया था। सीबीआई की ओर से इस आदेश को पहले हाईकोर्ट व बाद में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी।

लखनऊ में सीबीआई की विशेष अदालत (अयोध्या प्रकरण) में फैजाबाद के तत्कालीन डीएम आरएन श्रीवास्तव समेत कुल 28 अभियुक्तों के मुकदमे की कार्यवाही शुरु हो गई। जबकि, लालकृष्ण आडवाणी समेत 8 अभियुक्तों के मामले की कार्रवाई रायबरेली की विशेष अदालत में चलने लगी। इस दरम्यान अशोक सिंघल व गिरिराज किशोर की मौत हो गई।

रायबरेली से केस लखनऊ हुआ ट्रांसफर

19 अप्रैल 2017: सुप्रीम कोर्ट ने रायबरेली की विशेष अदालत में चल रही कार्यवाही को लखनऊ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत (अयोध्या प्रकरण) में स्थानांतरित कर दिया। साथ ही इस मामले के अभियुक्तों पर आपराधिक षडयंत्र के तहत भी आरोप तय करने का आदेश दिया। पूर्व में आरोप के स्तर पर डिस्चार्ज किए गए अभियुक्तों के खिलाफ भी मुकदमा चलाने का आदेश दिया।

18 मई 2017: सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार सीबीआई की विशेष अदालत (अयोध्या प्रकरण) ने डिस्चार्ज हो चुके 13 अभियुक्तों में छह अभियुक्तों को जरिए समन तलब किया। क्योंकि, तब तक छह अभियुक्तों की मौत हो चुकी थी। जबकि गर्वनर होने के नाते कल्याण सिंह पर आरोप नहीं तय हो सकता था। लिहाजा उन्हें तलब नहीं किया गया था।

सीबीआई के आदेश पर अभियुक्तों पर साजिश का केस दर्ज हुआ

30 मई 2017: सीबीआई की विशेष अदालत (अयोध्या प्रकरण) ने अभियुक्त एलके आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा व विष्णु हरि डालमिया पर आईपीसी की धारा 120 बी (साजिश रचने) का आरोप मढ़ा। लिहाजा इन सभी अभियुक्तों के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 149, 153ए, 153बी व 505 (1)बी के साथ ही आईपीसी की धारा 120 बी के तहत भी मुकदमे की कार्रवाई शुरू हुई। लेकिन, इसके बाद विष्णु हरि डालमिया की मौत हो गई।

इसके साथ ही महंत नृत्य गोपाल दास, महंत राम विलास वेदांती, बैकुंठ लाल शर्मा उर्फ प्रेमजी, चंपत राय बंसल, धर्मदास और डॉ. सतीश प्रधान पर भी आईपीसी की धारा 147, 149, 153ए, 153बी, 295, 295ए व 505 (1)बी के साथ ही धारा 120 बी के तहत भी आरोप तय हुआ। इससे पहले सभी अभियुक्तों की डिस्चार्ज अर्जी खारिज हो गई थी।

इसके बाद 27 सितंबर, 2019 को कल्याण सिंह पर भी आईपीसी की धारा 120बी, 153ए, 153बी, 295, 295ए व 505 के तहत आरोप तय हुआ। इस तरह 49 में कुल 32 अभियुक्तों के मुकदमे की कार्यवाही शुरु हो गई। क्योंकि तब तक 17 अभियुक्तों की मौत हो चुकी थी।

साल 2017 ने मामले ने तेजी पकड़ी

31 मई 2017: इस मामले में अभियोजन की गवाही शुरु।
13 मार्च 2020: सीबीआई की गवाही की प्रक्रिया व बचाव पक्ष की जिरह भी पूरी, 351 गवाह व 600 दस्तावेजी साक्ष्य पेश।
04 जून 2020: अभियुक्तों का सीआरपीसी की धारा 313 के तहत बयान दर्ज होना शुरू।
28 जुलाई 2020: 32 में से 31 अभियुक्तों का सीआरपीसी की धारा 313 के तहत बयान दर्ज होने की कार्यवाही पूरी। जबकि, एक अभियुक्त ओम प्रकाश पांडेय फरार घोषित, इसकी पत्रावली अलग। शेष अभियुक्तों को सफाई साक्ष्य पेश करने का आदेश।
13 अगस्त 2020: अभियुक्त ओम प्रकाश पांडेय का आत्मसमर्पण, जमानत पर रिहा, बयान दर्ज। इधर, कल्याण सिंह का सफाई साक्ष्य दाखिल।
14 अगस्त 2020: सफाई साक्ष्य की प्रक्रिया पूरी मानते हुए विशेष अदालत ने सीबीआई को लिखित बहस दाखिल करने का दिया आदेश।
18 अगस्त 2020: सीबीआई ने 400 पन्नों की लिखित बहस दाखिल की। बहस की प्रति बचाव पक्ष को भी मुहैया कराई गई।
24 अगस्त 2020: अभियोजन के दो गवाह हाजी महबूब अहमद व सैयद अखलाक ने लिखित बहस दाखिल करने की अर्जी दी।
25 अगस्त 2020: अर्जी खारिज।
26 अगस्त 2020: बचाव पक्ष को लिखित बहस दाखिल करने का अंतिम मौका
31 अगस्त 2020: सभी अभियुक्तों की ओर से लिखित बहस दाखिल। बहस की प्रति अभियोजन को भी मुहैया कराई गई।
01 सितंबर 2020: दोनों पक्षों की मौखिक बहस भी पूरी।

बाबरी मस्जिद केस में ये हैं अभियुक्त
लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा, महंत नृत्य गोपाल दास, डॉ. राम विलास वेदांती, चंपत राय, महंत धर्मदास, सतीश प्रधान, पवन कुमार पांडेय, लल्लू सिंह, प्रकाश शर्मा, विजय बहादुर सिंह, संतोष दुबे, गांधी यादव, रामजी गुप्ता, ब्रज भूषण शरण सिंह, कमलेश त्रिपाठी, रामचंद्र खत्री, जय भगवान गोयल, ओम प्रकाश पांडेय, अमर नाथ गोयल, जयभान सिंह पवैया, महाराज स्वामी साक्षी, विनय कुमार राय, नवीन भाई शुक्ला, आरएन श्रीवास्तव, आचार्य धमेंद्र देव, सुधीर कुमार कक्कड़ व धर्मेंद्र सिंह गुर्जर।

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