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अब बच्चों के पैरेंट्स खुद खरीदेंगे यूनिफार्म:UP में बेसिक शिक्षा विभाग 1.60 करोड़ बच्चों को देगा 17 करोड़ रुपए, सभी 75 जिलों से मांगे गए बैंक अकाउंट की डिटेल

गाजियाबादएक महीने पहले
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उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा परिषद की तरफ से संचालित प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के पैरेंट्स अब खुद यूनिफार्म, स्वेटर, जूते-मोजे और बैग खरीद पाएंगे। शासन ने अब पैरेंट्स के खाते में पैसे ट्रांसफर करेगा। इसकी पूरी योजना शासन स्तर पर बन गई है। इस तरह सरकार करीब पौने 17 करोड़ रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर होंगे।

विभाग ने 1 लाख 59 हजार परिषदीय स्कूलों में चालू शैक्षिक सत्र में 1.60 करोड़ बच्चों और उनके पैरेंट्स के बैंक अकाउंट की जानकारी मांगी है। इस संबंध में बेसिक शिक्षा निदेशक डॉ. सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह ने नई व्यवस्था के संबंध में प्रदेश भर के सभी बीएसए को लिखित निर्देश जारी कर दिए हैं।

कोरोना महामारी के चलते शैक्षिक सत्र 2021-22 में स्कूल तो खुले थे, लेकिन बच्चों को स्कूल नहीं बुलाया जा रहा था। एक सितंबर से बच्चों का स्कूल आना शुरू हुआ है। इसलिए अभी तक ड्रेस आदि की खरीद या वितरण नहीं हो सकी है। गुणवत्ता को लेकर और समय से ड्रेस वितरण न होने से काफी सवाल उठते थे। इससे बचने के लिए सरकार ने चुनावी साल में यह नया तरीका निकाला है।

योगी सरकार ने सत्ता में आने के बाद बच्चों के ड्रेस का रंग बदल दिया था। इससे पहले खाकी रंग की ड्रेस चलती थी।
योगी सरकार ने सत्ता में आने के बाद बच्चों के ड्रेस का रंग बदल दिया था। इससे पहले खाकी रंग की ड्रेस चलती थी।

हर पैरेंट्स के खाते में ट्रांसफर होंगे 1056 रुपए
नई व्यवस्था के तहत एक बच्चे को 1056 रुपए मिलेंगे। इसमें 600 रुपए यूनिफॉर्म, 200 रुपए स्वेटर, 135 रुपए जूते, 21 रुपए मोजे और 100 रुपए स्कूल बैग के लिए शामिल हैं। डायरेक्ट बैनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से यह पैसा बच्चों या उनके परिजनों के खातों में भेजा जाएगा। स्कूल में जो बच्चे पंजीकृत हैं, उनका डेटा बेसिक शिक्षा विभाग की प्रेरणा एप पर अपलोड करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

देरी खत्म और गुणवत्ता सही करने के लिए फैसला
बेसिक शिक्षा विभाग का कहना है कि अभी तक इन सभी चीजों की केंद्रीयकृत खरीद होती थी। इसके बाद मंडल, जनपद और फिर ब्लॉक वार इनका वितरण होता था। मतलब स्कूल तक सामग्री पहुंचने की एक लंबी प्रक्रिया थी। इससे बच्चों तक यूनिफॉर्म, जूते-मोजे पहुंचने में देरी होती थी। इस देरी को खत्म करने के लिए विभाग ने सीधे बच्चों के खातों में पैसा भेजने का फैसला लिया है, ताकि वह जल्द यूनिफॉर्म, स्वेटर, जूते-मोजे खरीद सकें।
इसके अलावा कई बार ड्रेस-जूतों की क्वालिटी पर भी सवाल उठते थे। अब बच्चे व उनके परिजन अपनी मर्जी से खरीद सकेंगे। गाजियाबाद में ब्रज भूषण चौधरी ने कहा कि डीबीटी से पैसा ट्रांसफर करने की तैयारियां की जा रही हैं।

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