प्रयागराज / भाजपा नेत्री व पूर्व सांसद जयाप्रदा को मिली राहत, हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को किया रद्द

भाजपा नेत्री जयाप्रदा को हाईकोर्ट ने राहत प्रदान की है। उनके खिलाफ रामपुर में दर्ज दो आपराधिक मामलों को अदालत ने रद्द कर दिया है। भाजपा नेत्री जयाप्रदा को हाईकोर्ट ने राहत प्रदान की है। उनके खिलाफ रामपुर में दर्ज दो आपराधिक मामलों को अदालत ने रद्द कर दिया है।
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भाजपा नेत्री जयाप्रदा को हाईकोर्ट ने राहत प्रदान की है। उनके खिलाफ रामपुर में दर्ज दो आपराधिक मामलों को अदालत ने रद्द कर दिया है।भाजपा नेत्री जयाप्रदा को हाईकोर्ट ने राहत प्रदान की है। उनके खिलाफ रामपुर में दर्ज दो आपराधिक मामलों को अदालत ने रद्द कर दिया है।

  • याची के खिलाफ रामपुर के थाना स्वार व थाना कैमारी में दर्ज मामले में पुलिस ने एनसीआर दाखिल की थी
  • हाईकोर्ट ने मुकदमें की कार्यवाही को अवैध करार देते नए सिरे से नियमानुसार कार्यवाही की छूट दी है

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 06:41 PM IST

प्रयागराज. उत्तर प्रदेश में रामपुर लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी की सांसद रहीं भाजपा नेता जयाप्रदा को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने फिल्म अभिनेत्री जयाप्रदा नाहटा के खिलाफ रामपुर के सत्र न्यायालय में चल रहे दोनों आपराधिक मामले को रद कर दिया है। 

यह आदेश न्यायमूर्ति ओम प्रकाश ने मंगलवार को जयाप्रदा की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। फिल्म अभिनेत्री जयाप्रदा नाहटा को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने इनके खिलाफ रामपुर के अपर सत्र न्यायाधीश के समक्ष विचाराधीन आपराधिक मामले एवं उस पर जारी गैर जमानती वारंट सहित सभी आदेशों को रद कर दिया है।

अदालत को नए सिरे से कार्यवाही की छूट

पुलिस ने जयाप्रदा नाहटा के खिलाफ लाल बत्ती प्रकरण में असंज्ञेय, अपराध को संज्ञेय मानते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 171G के तहत चार्जशीट दाखिल की है। जिसका संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने वारंट जारी किया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुकदमें की कार्यवाही को अवैध करार देते अधीनस्थ अदालत को नए सिरे से नियमानुसार कार्यवाही की छूट दी है।

याची के खिलाफ रामपुर के थाना स्वार व थाना कैमारी में दर्ज मामले में पुलिस ने एनसीआर दाखिल की। साथ ही धारा 171 जी के तहत चार्जशीट दाखिल की है। राज्य सरकार की तरफ से मुकदमा सत्र न्यायालय में पेश हुआ और कोर्ट ने दोनों मामलों में याची को गैर जमानती वारंट जारी किया है। इन आदेशों सहित मुकदमें के विचारण की वैधता को चुनौती दी गई। 

याची का कहना है कि आरोपित धारा के तहत दो माह की अधिकतम सजा व 200 रुपए का जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है। यह असंज्ञेय अपराध है। जिसे संज्ञेय अपराध मानकर विचारण करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। कोर्ट ने याची के तर्कों को सही माना और दोनों मुकदमों की कार्यवाही को रद्द कर दिया है। 

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