ब्लैक फंगस का कहर:झांसी में ब्लैक फंगस के 11 मरीज, आंखों में दर्द व सूजन की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे लोग

झांसी2 वर्ष पहले
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झांसी में शुक्रवार को ब्लैक फं - Dainik Bhaskar
झांसी में शुक्रवार को ब्लैक फं

झाँसी जिले में म्यूकरमाइकोसिस ( ब्लैक फंगस) के लगातार नए मरीज सामने आ रहे हैं। शुक्रवार को महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में चार नए मरीजों में इस बीमारी की पुष्टि हुई है। झांसी में अब तक मरीजों की संख्या 11 हो गई है। इसमें दो लोगों की मौत हो चुकी है। मेडिकल कॉलेज में पहले से भर्ती दो मरीजों का सफल ऑपरेशन भी किया गया है। इनमें से चार मरीज बृहस्पतिवार को सामने आए। ये आंखों में दर्द, सूजन व सिर दर्द की शिकायत लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। एमआरआई जांच में ब्लैक फंगस पाया गया। मेडिकल कॉलेज में म्यूकर माइकोसिस के दो मरीजों का ऑपरेशन किया गया। चिकित्सकों की टीम ने ईएनटी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. जितेंद्र यादव की अगुवाई में प्रभुदयाल (50) निवासी भगवंतपुरा झाँसी ,और अरुण कुमार (35) निवासी सकरार झाँसी, का के नाक व आंख का ऑपरेशन कर ब्लैक फंगस से संक्रमित हिस्से को दूर किया। दोनों मरीजों का ऑपरेशन करने में छह घंटे का वक्त लगा। ब्लैक फंगस के इलाज़ की प्रक्रिया समझाते हुए मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. जितेन्द्र यादव कहते हैं, जब मरीज़ आते हैं, तो हम जांच के बाद सबसे पहले ये सुनिश्चित करते हैं कि उन्हें ये ब्लैक फंगस ही है। ये सुनिश्चित करने के बाद बहुत स्ट्रांग एंटी-फंगस दवाएं देनी पड़ती हैं। “अगर दवाई से ठीक हो जाता है तो सही है, नहीं तो हमें हर उस हिस्से को काटना पड़ता है जिसे फंगस ने नुक़सान पहुँचाया होता है, क्योंकि वो हिस्सा गैंगरीन जैसा हो जाता है जिसके पीछे फंगस छिपा होता है और शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंंचने लगता है।

मेडिकल कॉलेज के फिजिशियन डॉ. जैकी सिद्दीकी मानते हैं कि ये एक गंभीर बीमारी ज़रूर है, लेकिन इससे डरने की ज़रूरत नहीं है। ये फंगस आपकी नाक से होते हुए बलगम में मिलकर आपकी नाक की चमड़ी में चला जाता है। फिजिशियन डॉ निपुण गुप्ता कहते हैं, “ब्लैक फंगस या म्यूकर माइकोसिस कोई नई बीमारी नहीं है. ये नाक, कान और गले ही नहीं, शरीर के अन्य अंगों को भी नुकसान पहुँचाती है।

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