चित्रकूट जेल में गैंगवार के किरदार:किसी ने छात्र सियासत से अपराध में रखा था कदम तो कोई छोटी-मोटी वारदात कर बना था गैंग का सरगना

लखनऊ5 महीने पहले
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चित्रकूट जेल में शूटआउट सुबह परेड के बाद करीब 10 बजे हुआ। - Dainik Bhaskar
चित्रकूट जेल में शूटआउट सुबह परेड के बाद करीब 10 बजे हुआ।

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जेल में शुक्रवार को खूनी गैंगवार हुआ। इस दौरान भोपाल से फरारी काट चुके पश्चिमी यूपी के कुख्यात बदमाश अंशु दीक्षित ने शुक्रवार सुबह 10 बजे मुकीम काला और मेराज अहमद उर्फ भाई मेराज को मारने के बाद पांच कैदियों को बंधक बना लिया। पुलिस ने अंशु को उन्हें छोड़ने की बात कही। लेकिन वह नहीं माना। आखिरकार वह पुलिस की गोली से मारा गया। डबल मर्डर करने वाला अंशु और अन्य दो मरने वाले कैदी दुर्दांत अपराधी थे।

मेराज अली बसपा के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी की गैंग का सदस्य था। जबकि मुकीम काला ने अपने गैंग के साथ 15 फरवरी 2015 को सहारनपुर के तनिष्क ज्वैलरी शोरूम में डकैती की वारदात को अंजाम दिया था। उसे 20 अक्टूबर 2015 को STF ने गिरफ्तार किया था।

अंशु ने छात्र सियासत से अपराध की दुनिया में रखा था कदम

यह फोटो 4 दिसंबर 2014 की है। उसे गोरखपुर में गिरफ्तार किया गया था।
यह फोटो 4 दिसंबर 2014 की है। उसे गोरखपुर में गिरफ्तार किया गया था।

सीतापुर जिले के मानकपुर कुड़रा बनी का रहने वाला अंशु दीक्षित लखनऊ विश्वविद्यालय में दाखिला लेने के बाद अपराधियों के संपर्क में आया था। वह यूनिवर्सिटी के पूर्व महामंत्री विनोद त्रिपाठी का पुराना साथी था। लेकिन बाद में अंशु ने ही उनकी हत्या कर दी थी। वर्ष 2008 में वह गोपालगंज (बिहार) के भोरे में अवैध असलहों के साथ पकड़ा गया था।

हालांकि छह साल बाद ही वह पेशी से लौटते समय सीतापुर रेलवे स्टेशन पर सिपाहियों को जहरीला पदार्थ खिलाकर फायरिंग करते हुए फरार हो गया था। उस पर 50 हजार का इनाम घोषित हुआ था। उसके बाद उसके भोपाल में मौजूदगी की सूचना पर एसटीएफ लखनऊ की टीम उस की गिरफ्तारी के लिए वहां गई। वहां एसटीएफ व भोपाल क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम के साथ उसकी गिरफ्तारी के लिए घेराबंदी की तो उसने पुलिस पर फायरिग शुरू कर दी।

इस घटना में एसटीएफ लखनऊ के दारोगा संदीप मिश्र को दो गोली और क्राइम ब्रांच भोपाल के सिपाही राघवेंद्र को एक गोली लगी थी। दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वारदात से पहले वह अलकापुरी इलाके में गलत नाम-पते से किराए का मकान लेकर रह रहा था। इस शूटर का लखनऊ में गोरखपुर के तत्कालीन सभासद फैजी की हत्या व सीएमओ हत्याकांड में भी नाम आया था, लेकिन वह मुल्जिम नहीं बना था। अंशु ने छह माह तक भोपाल में भी फरारी काटी थी। उस पर भोपाल में भी 10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया था।

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12 साल पहले राजमिस्त्री का काम करता था मुकीम

मुकीम काला ने हरियाणा के पानीपत में एक मकान में डकैती डालकर पहली वारदात को अंजाम दिया। इस मामले में जेल गया। जेल से बाहर आने के बाद मुकीम काला ने रंगदारी वसूलने के साथ ही चोरी और राहजनी शुरू कर दी थी। जेल में ही उसकी मुलाकात सहारनपुर जिले के थाना गंगोह के मुस्तफा उर्फ कग्गा से हुई। मुस्तकीम काला ने जेल में रहते हुए कग्गा से गैंग में शामिल होने की इच्छा जाहिर की थी। जिसके बाद मुस्तफा उर्फ कग्गा ने उसे अपने गैंग में शामिल कर लिया। मुकीम के आने के बाद कग्गा का गैंग और मजबूत हो गया। पुलिस पर हमले करने के बाद यह गैंग रडार पर आया।

कग्गा के एनकाउंटर के बाद बना सरगना

  • पुलिस के अनुसार, दिसबंर 2011 में पुलिस एनकाउंटर में मुस्तफा उर्फ कग्गा मारा गया। मुस्तफा की मौत के बाद मुकीम काला ने कग्गा के गैंग की बागडोर संभाल कर सरगना बन गया। काला के गैंग में 20 से अधिक बदमाश शामिल रहे और उन्होंने ताबड़तोड़ दो वर्षों में ही हत्या, लूट, रंगदारी समेत कई वारदातों को अंजाम दिया। पुलिस ने उसे कई बार पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार हो गया।
  • साल 2014 अक्तूबर में पुलिस ने मुकीम काला को उसके साथी साबिर के साथ गिरफ्तार किया। मुकीम काला को गिरफ्तार करने के बाद सहारनपुर जेल में रखा गया था। काला पर करीब 30 अपराधिक मुकदमें दर्ज हैं। काला के साथी शब्बीर और इसरार भी उसके गिरोह में हैं। शब्बीर और इसरार मुकीम काला के नाम पर तो वसूली करते ही हैं, इसके अलावा ये दोनों अपने नाम पर भी लोगों को डराकर वसूली करते हैं। वाजिद सहारनपुर से पुलिस हिरासत में फरार हो गया था। अभी तक उसका कोई सुराग नहीं लगा है।

20 मार्च को चित्रकूट लाया गया था मेराज

मेराज के घर के बाहर खड़े लोग।
मेराज के घर के बाहर खड़े लोग।

मेराज अहमद मुख्तार गैंग का सदस्य था। हालांकि उसकी नजदीकी मुन्ना बजरंगी से ज्यादा थी। 20 मार्च 2021 को वाराणसी जेल से चित्रकूट जेल उसका ट्रांसफर हुआ था। मुकीम काला 7 मई 2021 को चित्रकूट जेल आया था। जुलाई 2018 में मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या के बाद उसकी गैंग कौन संभालेगा? इस बात की चर्चा शुरू होने पर पहला नाम मेराजुद्दीन का आया था।

मूल रुप से गाजीपुर निवासी मेराज बनारस के जैतपुर थाने का हिस्ट्रीशीटर था। बनारस में उसे मेराज भाई नाम से जाना जाता था। गैंग के लिए असलहों का इंतजाम करता था। वह फर्जी दस्तावेजों पर असलहों का लाइसेंस बनवाने का मास्टरमाइंड था। पिछले साल अक्टूबर में जैतपुरा पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। छानबीन में फर्जी तरीके से बनवाए गए नौ लाइसेंसी पिस्टल और रायफल की जानकारी हुई थी। साल 2015 में मुन्ना बजरंगी के खास तारिक की लखनऊ में गोली मारकर हत्या की गई। तारिक के घर से पुलिस को लाइसेंस रायफल बरामद हुई, जो बाद में फर्जी पाई गई। बताया जा रहा है कि इस रायफल का लाइसेंस भी मेराज ने ही नागालैंड से बनवाया था।

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