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UP के चित्रकूट जेल शूटआउट में बड़ा खुलासा:ऑस्ट्रिया मेड ग्लोक पिस्टल से शूटर अंशु दीक्षित ने मेराज और मुकीम को मारी थी गोली; सेना और पुलिस करती है इसका इस्तेमाल

लखनऊएक महीने पहले
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उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जेल में 14 मई को हुए शूटआउट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। शूटआउट के बाद अफसरों ने मीडिया को टर्की मेड इंग्लिश पिस्टल बरामद होने की जानकारी दी थी। जबकि पुलिस को ऑस्ट्रिया मेड ग्लोक पिस्टल जेल से बरामद हुई।

55 यार्ड यानी 50 मीटर दूरी तक मारक क्षमता वाली यह पिस्टल छोटे असलहों में सबसे घातक हथियार माना जाता है। यही वजह है कि 9MM के इस ग्लोक पिस्टल की सिविल यानी पब्लिक को सप्लाई प्रतिबंधित है। इसे सेना और पुलिस के जवानों को दिया जाता है। सवाल उठता है कि सरकारी सप्लाई वाला यह हथियार गैंगस्टर अंशु को कहां से मिला?

सीरियल नंबर से पता लगाने में जुटी पुलिस
जेल में अंशु ने जिस ग्लोक पिस्टल से मुकीम काला और मेराज की हत्या की पुलिस उसके सीरियल नम्बर से पता लगाने में जुटी है कि वह देश की किसी सुरक्षा एजेंसी के पास थी या विदेश से मंगवाई गई है। इसके साथ ही ऐसे अपराधियो का पता लगाया जा रहा है जो सरकारी असलहे लूटने के माहिर हैं। अभी इसमें सबसे पहला नाम NIA के डिप्टी SP तंजील के हत्यारे मुनीर का आ रहा है।

मुनीर ने 2014 में ग्लोक पिस्टल लूटने के लिए लखनऊ के एक जज के गनर को गोली मार दी थी। इसके अलावा दिल्ली से कई पुलिस वालों से उसने यह पिस्टल लूटी थी। यह पता लगाया जा रहा है कि सीतापुर के हिस्ट्रीशीटर अंशु या उसके गैंग का मुनीर से कोई कनेक्शन था या नही।

वारदात से ठीक पहले छुट्टी पर चले गए थे दो डिप्टी जेलर
जांच में अभी तक पता चला कि अंशु को जिस हाई सिक्योरिटी बैरक में रखा गया था वहां की सुरक्षा की जिम्मेदारी डिप्टी जेलर पीयूष और अरविंद की थी। दोनों जेलर बिना किसी बड़े कारण के 10 मई को अचानक छुट्टी चले गए थे। यह 13 मई को लौटकर आए थे।

उसी दिन जेल से 14 बंदियों को कोरोना को देखते हुए अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया था। माना जा रहा है कि दोनों जेलर की छुट्टी के दौरान ही जेल में पिस्टल पहुंचाई गई थी।

जेल में अंशु ने मुकीम और मेराजुद्दीन की हत्या की। बाद में एनकाउंटर में अंशु भी मारा गया।
जेल में अंशु ने मुकीम और मेराजुद्दीन की हत्या की। बाद में एनकाउंटर में अंशु भी मारा गया।

आजीवन कारावास का सजायाफ्ता कैदी करवाता था सेटिंग
एक अफसर ने बताया कि चित्रकूट के पहाड़ी थानाक्षेत्र के परसौजा गांव निवासी मनोज आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। मनोज जेल में मादक पदार्थों की सप्लाई से लेकर कैदियों से बैठकी के रुपए तक वसूलने का काम करता है। वह जेल अधिकारियों का खास है। मनोज अंशु की खातिरदारी में लगा रहता था।

अंशु के पास से मिले फोन की जानकारी क्यों छिपा रहे अधिकारी?
जेल सूत्रों के मुताबिक, अंशु जेल में एंड्रॉयड फोन इस्तेमाल करता था। अंशु के एनकाउंटर के बाद यह फोन भी पुलिस के हाथ लगा। लेकिन जांच अफसर और लोकल पुलिस इसकी जानकारी छिपा रही हैं। दरअसल, इस वारदात को अंजाम देने के लिए अंशु ने किस- किस से संपर्क किया। इसकी जानकारी फोन में इस्तेमाल हो रहे सिम के सीडीआर से मिलेगी।

सीडीआर निकलने पर कई प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता सामने आने के डर से फोन के बारे में अफसर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।

अंशु ने पहले हत्या की, बाद में एनकाउंटर में ढेर किया गया
चित्रकूट जेल में शुक्रवार को कैदियों के बीच गैंगवार हुआ था। इसमें वेस्ट UP के गैंगस्टर अंशु दीक्षित ने मुख्तार अंसारी के खास गुर्गे मेराज और बदमाश मुकीम काला की गोली मारकर हत्या कर दी। मेराज बनारस जेल से भेजा गया था, जबकि मुकीम काला सहारनपुर जेल से लाया गया था।

पुलिस ने अंशु दीक्षित को सरेंडर करने के लिए कहा लेकिन बताया जा रहा है कि वह लगातार फायरिंग करता रहा। बाद में पुलिस की जवाबी कार्रवाई में अंशु भी मारा गया था।

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