जेल में किसने पहुंचाई गन?:UP में दोहराई गई मुन्ना बजरंगी पार्ट-2 कहानी; पूर्व DGP बोले- चित्रकूट जेल में तीन हत्याओं का मामला सियासत और अपराधी से अपराधियों के खात्मे का है

लखनऊ8 महीने पहलेलेखक: आदित्य तिवारी
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चित्रकूट जेल में हुए शूटआउट में तीन बदमाशों की मौत हुई है। - Dainik Bhaskar
चित्रकूट जेल में हुए शूटआउट में तीन बदमाशों की मौत हुई है।

चित्रकूट जेल में हुए शूटआउट के पीछे असल कहानी क्या है? यह शूटर अंशु दीक्षित के एनकाउंटर के साथ ही खत्म हो चुकी है। अंशु दीक्षित प्रतिबंधित 9MM पिस्टल से बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी की गैंग के मेंबर मेराज अहमद और पश्चिमी यूपी के बड़े अपराधी मुकीम काला की जेल के भीतर हत्या की। इसके बाद अंशु दीक्षित भी पुलिस की गोली से मारा गया। ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि जब कोरोना काल में जेलों में मिलाई (मिलना) बंद है, तब उस तक प्रतिबंधित गन कैसे पहुंची?

उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे को लंबे समय तक लीड करने वाले पूर्व DGP विक्रम सिंह ने कहा- बिना मिलीभगत के कोरोना काल में जेल में पिस्टल जाना संभव नहीं हैं। इससे पहले बागपत जेल में जुलाई 2018 में मुन्ना बजरंगी की पश्चिम के बदमाश सुनील राठी ने हत्या कर दी गई थी। प्रदेश की जेल में यह दूसरा ऐसा मामला है। जिसमें सियासत और अपराधियों से अपराधियों का खात्मा किया गया है।

पूरब से पश्चिम यूपी तक खलबली
मुकीम काला पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कैराना पलायन का खलनायक माना जाता है। उस पर 62 मामले दर्ज हैं। मुकीम काला का आतंक इतना था कि, पिछली सरकारों में उसने कैराना क्षेत्र में जमकर कोहराम मचाया था। रंगदारी न देने पर दर्जनों लोगों को मौत के घाट उतारने का आरोप था। वहीं दूसरी तरफ मुख्तार अंसारी के करीबी मेराज अहमद कोर्ट कचहरी से लेकर पासपोर्ट बनवाने और मुख्तार के काम का मैनेजमेंट देखने का काम करता थे। जेल के अंदर यह दोनों हत्याएं पूर्वांचल से लेकर पश्चिमांचल तक यह मैसेज दे रही हैं कि कौन किस पर कितना भारी है?

अंशु दीक्षित।- फाइल फोटो
अंशु दीक्षित।- फाइल फोटो

सुनील राठी पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कुख्यात बदमाश है। शामली के मुकीम काला से उसका नाम जोड़ा जाता रहा है। सुनील राठी पूर्वांचल के बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह और बृजेश सिंह का करीबी बताया जाता है। इसी तरह मुकीम काला के जेल के अंदर हत्या किए जाने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम बाहुबल क्षेत्रों में बनी दहशत कहीं ना कहीं कम होगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आतंक का दूसरा नाम मुकीम काला का खौफ इतना था कि रंगदारी न देने पर वह लोगों को मौत के घाट उतार दिया करता था।

मुकीम काला के खौफ से कारण कैराना से हिंदू पलायन कर गए थे। भाजपा ने 2017 के विधानसभा चुनाव में पलायन के मुद्दे को अपने एजेंडे में शामिल किया था। बड़े नेताओं ने कहा था, सरकार बनने पर कैराना से पलायन के गुनाहगारों को सबक सिखाएंगे। प्रदेश में सरकार बनते ही जिले में सक्रिय बदमाशों को एक के बाद एक मुठभेड़ में मारा जा रहा है या उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है। मुकीम के भाई समेत आधा दर्जन बदमाशों को पुलिस अब तक मौत के घाट उतार चुकी है। फिलहाल मुकीम ने बीते दिनों शामली में पेशी के दौरान कोर्ट में खुद की जान का खतरा बताया था।

मुन्ना बजरंगी के बाद मुख्तार अंसारी का दूसरा बड़ा करीब था मेराज

मेराज अहमद।- फाइल फोटो
मेराज अहमद।- फाइल फोटो

9 जुलाई 2018 को बागपत जेल में पश्चिम के कुख्यात बदमाश सुनील राठी पर आरोप लगा था कि 10 गोलियां मारकर पूर्वांचल के बाहुबली प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी की हत्या कर दी। मुन्ना बजरंगी मौजूदा समय में बांदा जेल में बंद बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी का करीबी था। मुन्ना बजरंगी के बाद बनारस के मेराज अली जिसके ऊपर पासपोर्ट और फर्जी दस्तावेज पर असलहा रखने समेत 15 से ज्यादा मामले दर्ज थे कि, उसकी हत्या कर दी गई। मेराज अली के शूटर अंशु दीक्षित के द्वारा हत्या किए जाने के पीछे जरायम की दुनिया से जुड़े लोगों का मानना है कि यह गैंगवार अपराधियों के बीच वर्चस्व और राजनीतिक पकड़ मजबूत करने को लेकर किया गया है।

हाई सिक्योरिटी जोन में रहते हैं बड़े अपराधी, यह षडयंत्र
पूर्व DGP विक्रम सिंह का कहना है कि, चित्रकूट की घटना में जो पुलिस का पक्ष है वो ठीक है कि मुन्ना बजरंगी की हत्या सुनील राठी ने किया और इसी तरीके से चित्रकूट में CMO की हत्याकांड में शामिल अंशु दीक्षित ने मुकीम काला और मुख्तार अंसारी के करीबी मेराज अली की हत्या कर दी। लेकिन शातिर अपराधी जो होते हैं, उनको हाई सिक्योरिटी जोन में रखा जाता है, वहां पर वॉच टावर रहते हैं। वहां सीसीटीवी, डबल पहरा रहता, वायरलेस रहता है।

जानकारी हुई है कि अंशु दीक्षित के पास 9MM की पिस्टल पहुंची थी। इससे तो यह लगता है कि, जेल का शासन-प्रशासन यह तो मूकदर्शक बना हुआ है। यह षड्यंत्र है। जिसके पीछे यह पीठ किए हुए हैं। अन्यथा इस प्रकार के चीजों के आवागमन बिना शासन-प्रशासन के संलिप्तता संभव नहीं है। जेल स्टाफ संलिप्तता के बिना 9MM पिस्टल अंदर जाना वह भी तब कोरोनाकाल में जब जेल में मिलना बंद हैं।
यह बेहद मुश्किल है।
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