ज्ञानवापी परिसर में एक और शिवलिंग की फोटो:काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत का दावा; 2005 की तस्वीर में दिखाई दिए 'बाबा', मसाजिद कमेटी का इंकार

4 महीने पहलेलेखक: देवांशु तिवारी

काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने ज्ञानवापी परिसर में एक और शिवलिंग की तस्वीर दिखाई है। उनका कहना है कि ये तस्वीर 17 साल पुरानी है। इस तस्वीर में मस्जिद की पिछली दीवार पर बने एक खांचे में शिवलिंग दिखाई दे रहा है।

तस्वीर के लेफ्ट साइड में बनी दीवार के खांचे में नीचे की तरफ कुछ रखा हुआ है। डॉ. तिवारी का मानना है कि ये शिवलिंग है, जो अब इस स्थान से हटा दिया गया है।
तस्वीर के लेफ्ट साइड में बनी दीवार के खांचे में नीचे की तरफ कुछ रखा हुआ है। डॉ. तिवारी का मानना है कि ये शिवलिंग है, जो अब इस स्थान से हटा दिया गया है।

फोन पर शिवलिंग की तस्वीर दिखाते हुए डॉ. कुलपति ने बताया, "पश्चिमी दीवार पर आप देख सकते हैं कि एक शिवलिंग है। यही वो जगह है जहां दीवार पर कमल के फूल और घंटा बना दिखाई दे रहा है। हमारे पास जो मिलेगा, वो प्रमाणित मिलेगा।"

काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत रह चुके डॉ. तिवारी ने हमें ज्ञानवापी परिसर से जुड़ी कुछ और तस्वीरें भी भेजी हैं। इसमें जिस जगह शृंगार गौरी का मंदिर बताया जा रहा है, वहां कुछ बच्चों को खेलते देखा जा सकता है। ये तस्वीर 15 से 20 साल पुरानी बताई जा रही हैं।

ये तस्वीर ज्ञानवापी मस्जिद के पश्चिमी हिस्से की है। इस तस्वीर में मस्जिद परिसर के चबूतरे कुछ बच्चे खड़े हुए हैं। तस्वीर का सोर्स- डॉ. कुलपति तिवारी।
ये तस्वीर ज्ञानवापी मस्जिद के पश्चिमी हिस्से की है। इस तस्वीर में मस्जिद परिसर के चबूतरे कुछ बच्चे खड़े हुए हैं। तस्वीर का सोर्स- डॉ. कुलपति तिवारी।
इस तस्वीर में ज्ञानवापी मस्जिद की पिछली दीवार नजर आ रही है। तस्वीर का सोर्स- डॉ. कुलपति तिवारी।
इस तस्वीर में ज्ञानवापी मस्जिद की पिछली दीवार नजर आ रही है। तस्वीर का सोर्स- डॉ. कुलपति तिवारी।
तस्वीर में नंदी के पीछे भगवान हनुमान की मूर्ति दिखाई दे रही है। नीचे लिखा है- Gyan Biapee: Well of knowledge. तस्वीर का सोर्स* डॉ. कुलपति तिवारी।
तस्वीर में नंदी के पीछे भगवान हनुमान की मूर्ति दिखाई दे रही है। नीचे लिखा है- Gyan Biapee: Well of knowledge. तस्वीर का सोर्स* डॉ. कुलपति तिवारी।

अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने तस्वीर को बताया गलत

अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के सयुंक्त सचिव एमएस यासीन।
अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के सयुंक्त सचिव एमएस यासीन।

हमने इस तस्वीर पर ज्ञानवापी मस्जिद की देखरेख करने वाली संस्था अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के सयुंक्त सचिव एमएस यासीन से भी बात की। उनका कहना है, "पूरे मस्जिद परिसर में ऐसी कोई भी शिवलिंग नहीं हो सकती है। आप चाहें तो खुद आकर देख सकते हैं। मस्जिद के पिछले हिस्से या फिर किसी भी हिस्से में शिवलिंग नहीं हो सकता है।"

पिछली दीवार पर बने फूल और हिंदू चिन्ह अकबर के ‘दीन-ए-इलाही’ का प्रतीक यासीन कहते हैं, "मस्जिद के पीछे की तरफ वाली दीवार को लेकर ऐसी बातें हो रही हैं कि उनमें मंदिर जैसी नक्काशी बनी हुई है। मैं आपको बता दूं कि जो मस्जिद के पीछे वाली दीवार पर जो अवशेष हैं वो अकबर ने साल 1585 के आस-पास नए मजहब ‘दीन-ए-इलाही’ के तहत बनवाए थे। ये तब हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक माना जाता था। इसके बाद औरंगजेब ने इस मस्जिद को रेनोवेट कराया था। मस्जिद को को 14वीं सदी में जौनपुर के सुल्तानों ने बनवाया था।”

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