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उन्नाव में वैक्सीन पर भ्रम:6 गांव के लोगों ने वैक्सीन लगवाने से मना किया, बोले- टीका लगा तो मर जाएंगे; कुछ ने कहा-ओरिजनल वैक्सीन तो बिक गई

उन्नाव5 दिन पहले
स्वास्थ्य विभाग की टीम जब गांव में जाती है तो उससे लड़ाई भी की जाती है। बहरहाल, जागरुकता की कमी के चलते गांव वाले अजब गजब बहाने बनाते हैं। 

उन्नाव के सफीपुर तहसील के आधा दर्जन गांव के लोगाें ने वैक्सीनेशन से मना कर दिया है। जबकि स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार गांव में घूम-घूम कर वैक्सीन के लिए लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रही है। वहीं ग्रामीण अभी भी अफवाहों के जाल में फंसे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वैक्सीन लगवाने से बुखार आता है और फिर आदमी मर जाता है। इसी वजह से हम वैक्सीन नहीं लगवा रहे हैं। कुछ ग्रामीणों ने तो चकित कर देने वाले बहाने बनाए।

टीकाकरण के लिए घूम रही है टीम

सफीपुर तहसील क्षेत्र के गांव सकहन राजपूतान, गहोली, ददलहा, खैरी चंदेला व रूपपुर चंदेला में शुक्रवार को एएनएम के नेतृत्व में 2 लोगों टीम टीकाकरण करने गई थी। यह लोग कोविड वैक्सीन के प्रति ग्रामीणों को जागरूक भी करते हैं। लेकिन गांव वालों का कोई रिस्पांस न मिलने के कारण टीम स्वास्थ्य केंद्र लौट आई। सीएचसी में टीकाकरण के लिए लगे बूथ सीएचसी अधीक्षक शरद वैश्य ने बताया कि ग्राम प्रधान के माध्यम से भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है फिर भी ग्रामीण टीका नहीं लगवा रहे हैं।

15 से 17 हजार की आबादी है 6 गांव की

सफीपुर तहसील के इन 6 गांव की आबादी लगभग 15 से 17 हजार तक की है। ऐसे में ग्राम प्रधान गहोली के जयचंद यादव से बात की तो उन्होंने बताया गांव वालों का कहना है कि हमको मरना नहीं है। इससे बुखार भी आ जाता है। इसी तरह सबका यही कहना है। इसके बावजूद हम लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं। प्रधान जयचंद कहते हैं कि पहले हम वैक्सीन लगवाएंगे जिसके बाद पब्लिक के अंदर जागरुकता पैदा होगी फिर इन लोगों का डर खत्म होगा।

ग्रामीण बोले- हमें इसकी जरूरत नहीं

सकहन गांव के स्थानीय निवासी दिलीप कहते हैं कि अभी हमें इसकी जरूरत नहीं है। इसलिए हमें नहीं लगवाया है। वैसे भी हम घर में रहते हैं। कहीं निकलते नहीं है। जबकि दिवारी का कहना है कि जब हम लोगों को कोई परेशानी नहीं तो लगवाने से क्या फायदा है। जबकि नीरज कुमार का कहना है कि जिन्होंने वैक्सीन लगवाई है। उनको बुखार आ रहा है। कोई ट्रीटमेंट नहीं होता है। सरकारी अस्पताल जाओ तो कोई डॉक्टर सुनता नहीं है। प्राइवेट अस्पताल में लाखों का बिल बनता है। हमें मरना नहीं है।

वैक्सीन न लगवाने के अजब गजब बहाने

गहोली गांव के महावीर कहते हैं हमारा मन है मास्क लगाएंगे, हमारा मन नहीं होता तो मास्क नहीं लगाएंगे। मर जाएंगे तो चले जाएंगे। कोई जबरदस्ती थोड़ी न होनी चाहिए। वहीं, गहोली के ही छोटेलाल कहते हैं कि सब कहते हैं हां हमको डर लगता है। पता चला है कि ओरिजनल वैक्सीन बिक गई है अब जो आ रही है सब लोकल है। हालांकि हमने एक डोज ली है लेकिन अब दूसरी कब लेंगे पता नहीं है। जब सही होगा तब ही लेंगे।

भाजपा विधायक बोले-विपक्ष ने फैलाया है भ्रम

सफीपुर भाजपा विधायक बंबालाल दिवाकर से जब इस मामले पर बात की गई तो उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथ लिया। विधायक ने कहा कि मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि जो विपक्ष के द्वारा भ्रम फैलाया गया है उसका असर कहीं आपको दिखाई दिया होगा। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता, पार्टी के सारे जनप्रतिनिधि जितने भी क्षेत्रवासी हैं उनको जागरुकता के अभियान के माध्यम से हम सभी लोग जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं।

प्रधानों और स्थानीय टीचर्स को लगेगा टीका तो मिलेगा रिस्पांस

सीएचसी अधीक्षक सफीपुर शरद वैश्य का कहना है कि अभी गांव वालों की ये भ्रम हो गया है कि टीका लगने की वजह से बुखार आता है और मौत हो जाती है। जबकि मैं साफ़ कर देना चाहता हूं कि जिन लोगों की मौत हुई है उन्हें टीका नहीं लगाया गया था। अभी एक मसला यह है कि अभी गांव में ज्यादातर युवा प्रधान है। अब 18 वर्ष के लोगों को भी टीका लग रहा है। जब यह प्रधान या स्थानीय स्कूलों में पढ़ाने वाले टीचर टीका लगवाना शुरू करेंगे तो उम्मीद है कि बेहतर रिस्पांस मिलेगा। फ़िलहाल अभी गांव में जागरुकता की बहुत कमी है।

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