उत्तर प्रदेश / कांग्रेस की बागी विधायक अदिति सिंह की सदस्यता पर विधानसभा अध्यक्ष ने अपना फैसला सुरक्षित रखा, 3 घंटे चली सुनवाई

अदिति रायबरेली के पूर्व विधायक अखिलेश सिंह की पुत्री हैं। वे वर्ष 2017 में चुनाव लड़ी थीं। अब निगाहें अदिति सिंह के अगले कदम पर टिकी हैं। उम्मीद यही है वह भाजपा का दामन थामेंगी। अदिति रायबरेली के पूर्व विधायक अखिलेश सिंह की पुत्री हैं। वे वर्ष 2017 में चुनाव लड़ी थीं। अब निगाहें अदिति सिंह के अगले कदम पर टिकी हैं। उम्मीद यही है वह भाजपा का दामन थामेंगी।
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अदिति रायबरेली के पूर्व विधायक अखिलेश सिंह की पुत्री हैं। वे वर्ष 2017 में चुनाव लड़ी थीं। अब निगाहें अदिति सिंह के अगले कदम पर टिकी हैं। उम्मीद यही है वह भाजपा का दामन थामेंगी।अदिति रायबरेली के पूर्व विधायक अखिलेश सिंह की पुत्री हैं। वे वर्ष 2017 में चुनाव लड़ी थीं। अब निगाहें अदिति सिंह के अगले कदम पर टिकी हैं। उम्मीद यही है वह भाजपा का दामन थामेंगी।

  • कांग्रेस के विधायक राकेश सिंह और सपा विधायक नितिन अग्रवाल के प्रकरण की समीक्षा एक हफ्ते के लिए टली
  • हाईकोर्ट ने 16 जुलाई तक बागी विधायकों की याचिकाओं को निस्तारित करने का दिया है निर्देश

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 11:45 AM IST

रायबरेली/लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने रायबरेली सदर से कांग्रेस की बागी विधायक अदिति सिंह की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की संबंधी याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। साथ ही कांग्रेस के एक और बागी विधायक राकेश सिंह और सपा के विधायक नितिन अग्रवाल के प्रकरण में अगले हफ्ते समीक्षा की जाएगी। 

दरअसल, मंगलवार को विधानसभा अध्यक्ष ने अदिति सिंह के मामले की सुनवाई पूरी की। कांग्रेस की तरफ से सदस्यता रद्द करने संबंधी दायर किए गए वाद की पैरवी कर रहे सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील केसी कौशिक ने बताया कि, मंगलवार को करीब तीन घंटे से ज्यादा समय तक चली सुनवाई के बाद स्पीकर ने अपना निर्णय सुरक्षित रखा है। उम्मीद है कि, जल्द ही निर्णय का औपचारिक ऐलान होगा। वहीं, रायबरेली सदर विधायक अदिति सिंह को उनके कानूनी विशेषज्ञों की टीम ने सहायता की। की सदस्यता रद्द करने पर कांग्रेस की याचिका पर 25 जून को विधानसभा अध्यक्ष ने पहली सुनवाई की थी। वहीं, दूसरी सुनवाई 30 जून को हुई। 


विधान सभा के प्रमुख सचिव, प्रदीप दुबे ने बताया कि, उच्च न्यायालय ने बागी विधायकों के खिलाफ 16 जुलाई तक तीनों याचिकाओं को निपटाने का निर्देश दिया था। बता दें कि, कांग्रेस से बगावत कर चुकी अदिति सिंह को राज्य सरकार ने ग्रेडेड सुरक्षा दी है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 का मामला हो या प्रवासी श्रमिकों के लिए कांग्रेस की तरफ से एक हजार बसों के चलाने की पेशकश, अदिति सिंह ने पार्टी लाइन से इतर अपनी आवाज मुखर की है। 

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