पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

कोरोना संक्रमण:कानपुर में चिताओं पर राख हो रहे हैं कोरोना मानक

कानपुरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
कानपुर के विश्राम घाट पर संक्र - Dainik Bhaskar
कानपुर के विश्राम घाट पर संक्र
  • अंतिम संस्कार करने वालों के पास न मॉस्क न PPE किट

कोरोना संक्रमण ना फैले इसको लेकर देश भर में चल रही कवायद कानपुर में दम तोड़ती नजर आ रही है। शहर के भैरवघाट श्मशान में हर रोज लगभग 90 से 100 के बीच जल रही चिताएं इस बात की गवाह है कि यहां कोरोना के सभी मानक बौने हैं। एम्बुलेंस से कोरोना मरीजों के शवों को उठाने से लेकर जलाने में सक्रिय 50 युवाओं का एक समूह हर रोज अपनी जान जोखिम में डाल कर शवों के अंतिम संस्कार में लगा हुआ है। इनके पास न ताे PPE किट हैं और ना ही सर्जिकल मॉस्क। हाथों में ग्लव्स और पैरों में सामान्य जूते भी नही हैं। जब डॉक्टर्स आम जन को सलाह दे रहे हैं कि कम से कम दो मॉस्क लगाएं, ऐसे में सेवा भाव से लगे यह युवा खादी के मॉस्क लगा कर कोरोना के संक्रमण से बचने की खाना पूर्ति भर कर रहे हैं। संक्रमण ना फैले इसके जिम्मेदार अफसर शहर के सभी श्मशान घाटों से नदारद हैं।

पहले 70-80 लाशें आती थीं, अब रोज 500 लाशें

शहर में मुख्य तौर पर भैरवघाट, भगवतदास घाट, सिद्धनाथ घाट, स्वर्गाश्रम और बिठूर घाट हैं। इन सभी जगहों में श्मशान घाट भी हैं। पिछले एक महीने से कोरोना संक्रमण फैलने के बाद से इन सभी घाटों में शवों की अंत्येष्टि के लिए वेटिंग चली आ रही है। शहर के सभी घाटों में एक दिन में आने वाले शवों की संख्या 500 तक के आँकड़े को छू चुकी है। इस आंकड़े में कब्रिस्तान में दफनाए जाने वाले शवों का आंकड़ा शामिल नहीं किया गया है। कोरोना संक्रमण से पहले सभी श्मशान घाटों को मिलाकर यह संख्या बमुश्किल 75 से 80 तक ही होती थी।

कोरोना मृतक के शव की अंत्येष्टि पर क्या हैं मानक

किसी भी कोरोना मरीज की मौत होने पर उसके अंतिम संस्कार के नार्म्स बहुत ही सख्त हैं। इसके तहत मृतक के शव को पूरी तरह से एक खास तरह की नॉन वोविन कवर 9 GSM PPE किट में रख कर किया जाता है। ऐसे अंतिम संस्कार में लोगों को भी PPE किट में ही शामिल होने के निर्देश हैं, इसलिये अंत्येष्टि के बहुत से संस्कारों को भी सिरे से नकार दिया गया है। वजह साफ है कि कोरोना का संक्रमण ना फैले। लेकिन कानपुर भैरवघाट के श्मशान में कोरोना के सभी मानक तार-तार होते नजर आ रहे हैं।

अजनबी शवों से अंतिम रिश्ता बना रहे युवा

जब किसी की कोरोना से मौत होती है तो उसके सगे रिश्तेदार और पारिवारिक लोग तक आने से परहेज करते है, ऐसे में अजनबी शवों से अंतिम रिश्ता बनाते इन युवाओं पर नाज होता है। जहां शहर में यह युवा इस वक़्त अपनी इस अनूठी पहल को लेकर सभी के चहेते बने हुए हैं, वहीं जिला प्रशासन की लापरवाही के चलते हर पल संक्रमण का जोखिम ले रहे हैं। श्मशान घाट में कोरोना मरीजों का अंतिम संस्कार कर रहे लोगों को कानपुर स्वास्थ्य विभाग ने खादी की किट और मॉस्क बाट कर इतिश्री कर ली है। हर रोज मिलने वाली PPE किट आज तक दी ही नही गयी है।

NGO दे रहा खाना

जिले के जिम्मेदार यहाँ भी नदारद नजर आए। जिम्मेदारी के नाम पर कानपुर का चाहे प्रशासन हो, या स्वास्थ्य विभाग दोनों की गैरजिम्मेदाराना हरकत ने हर कदम पर निराश करने का कार्य किया है। सुबह से लेकर देर रात 2 बजे तक मिशनरी अंदाज में लगे इन युवाओं को खाना देने का कार्य भी शहर का एक सामाजिक संगठन कर रहा है। मददग़ार नाम की एक संस्था सभी युवाओं को दिन में दो बार खाना खिलाने का कार्य कर रही है।

जान की बाजी लगाने वाले युवाओं का नहीं कराया गया बीमा

हर दिन कोरोना मरीजो के शवों के बीच 18 से 20 घंटे बिता रहे इन युवाओं का जीवन बीमा और स्वाथ्य बीमा तक नहीं कराया गया है। यह युवा समाज सेवा सर्वोपरि मान रहे हैं और तन मन से लगे हुए हैं। जिम्मेदार जिला प्रशासन उतनी ही बेशर्मी के साथ मुँह मोड़े हुए है। किसी ऑफिस या फैक्ट्री में अगर कोरोना मानकों पर कोई लापरवाही सामने आ जाए तो महामारी एक्ट की तमाम धाराएं लग चुकी होतीं अब तक, लेकिन कानपुर के इन जिम्मेदारों पर अभी तक लापरवाही की कोई भी धारा तय नहीं हो पाई है।

24 वर्षो से लावारिस लाशों से रिश्ता बनाये है समाज कल्याण सेवा समिति
संस्था के धनी राव बौद्ध 2008 से कानपुर में लावारिस लाशों से एक अनोखा रिश्ता बनाए हुए हैं। 24 साल पहले शुरू किया सफर आज कारवाँ बन चुका है। इनके संस्थान में आज लगभग 150 युवाओं की टीम कार्य कर रही है। कई नगर सेठ से लेकर आम जनता धनी राव के इस कार्य में समय-समय पर इनके मिशन को सफल बनाने में सहयोग करते रहते हैं।

खबरें और भी हैं...