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BHU में रिसर्च:संक्रमण बढ़ने से हर्ड इम्युनिटी विकसित नहीं हो सकती, वैक्सीन ही अहम हथियार; पहली लहर में संक्रमित 7% में ही एंटीबॉडी बची

वाराणसीएक महीने पहले
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बीएचयू के वैज्ञानिकों का यह शोध अमेरिकी जर्नल में भी प्रकाशित हुआ है। - Dainik Bhaskar
बीएचयू के वैज्ञानिकों का यह शोध अमेरिकी जर्नल में भी प्रकाशित हुआ है।

उत्तर प्रदेश कोरोना महामारी की दूसरी लहर एक सुनामी की तरह है। छह अप्रैल से छह मई के बीच 30 दिन 7,85,988 संक्रमित मिले हैं। पहली लहर में संक्रमित हुए लोग दोबारा कोरोना की जद में आए। देशभर के कई वैज्ञानिक एंटीबॉडी और हर्ड इम्युनिटी से संक्रमण को रोकने की बात कह रहे थे, लेकिन उनकी ये बात भी गलत साबित हुई। अब BHU (काशी हिंदू यूनिवर्सिटी) के शोध में सामने आया है कि एंटीबॉडी तीन महीने में खत्म हो गई।

BHU के प्राणि विज्ञान विभाग के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे और युवा वैज्ञानिक प्रज्जवल प्रताप सिंह ने 75 वैज्ञानिकों की मदद से एक शोध में यह बात साबित की है। शोध 100 लोगों पर किया गया। ये सभी कोरोना की पहली लहर में संक्रमित हुए थे। सीरो सर्वे में यह बात सामने आई कि संक्रमितों में तीन माह बाद महज सात लोगों में ही एंटीबॉडी बची थी। इसके बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे कि कोरोना का संक्रमण बढ़ने से हर्ड इम्युनिटी विकसित नहीं हो सकती है। इसके लिए वैक्सीन ही एक कारगर हथियार है।

अमेरिकी जर्नल में प्रकाशित हुआ शोध

प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि यह शोध अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय जर्नल साइंस में प्रकाशित हो चुका है। पिछले साल नवंबर तक जिन लोगों में 40 फीसदी तक एंटीबॉडी थी, उनमें मार्च तक महज 4 फीसदी ही शेष रह गई। वहीं कोरोना की पहली लहर में बिना लक्षणों वाले मरीजों की संख्या बहुत अधिक थी। इसलिए उनमें एंटीबॉडी नाममात्र की बनी। इस वजह से यह लोग कोरोना की दूसरी लहर की चपेट से नहीं बच पाए। पहली लहर में संक्रमण रहित लोग कोरोना वायरस का सबसे आसानी से निशाना बने और मौत भी उन्हीं की सबसे अधिक हुईं।

प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि देश में वैज्ञानिकों ने आकलन किया था कि जून, 2021 तक शरीर में एंटीबाॅडी रहेगी, तो दूसरी लहर अगस्त तक आ सकती है। तब तक बड़े स्तर पर वैक्सीनेशन का काम भी पूरा कर लिया जाता। हालांकि, यह आकलन गलत रहा और उससे पहले ही कोराेना की दूसरी लहर ने देश मे विस्फोटक स्थिति पैदा कर दी।

छह माह से अधिक नहीं रह सकती एंटीबॉडी

मेडिकल साइंस कहता है कि मानव शरीर में कोई भी एंटीबॉडी छह माह से अधिक समय तक नहीं रह सकती है। लेकिन, तीन माह में ही एंटीबॉडी खत्म हो जाएगी, ऐसा भी किसी ने नहीं सोचा था। हालांकि एंटीबॉडी खत्म होना कोई खतरे की बात नहीं है। क्योंकि एक बार संक्रमित हुए लोगों की इम्युनिटी में मेमाेरी बी सेल का निर्माण हो गया है। यह सेल नए संक्रमण की पहचान कर व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता को सक्रिय कर देता है। इसलिए जो पिछली बार संक्रमित हुए थे, वे इस लहर में आसानी से ठीक भी हो गए, लेकिन जो संक्रमित नहीं हुए थे उन्हीं में मृत्यु दर सबसे ज्यादा देखी जा रही है।

क्या है हर्ड इम्युनिटी
आसान भाषा में कहें तो अगर कोई संक्रामक बीमारी फैली है तो उसके खिलाफ आबादी के निश्चित हिस्से में बीमारी के प्रति इम्युनिटी पैदा हो जाए। इस तरह संक्रामक रोगों का फैलाव रुकता है। कारण इससे काफी लोग इम्यून हो चुके होते हैं। मतलब लोगों का शरीर बीमारी से लड़ने की क्षमता खुद अपने शरीर में विकसित कर लेता है। इससे समुदाय में रोग का फैलाव रुक जाता है।

बचाव ही कोरोना का उपाय

  • कोरोना से बचाव का कारगर उपाय मास्क है। घर पर एक साथ ज्यादा लोग हों तो मास्क पहनें।
  • हाथों को धोते रहें और सैनिटाइज करें।
  • भीड़-भाड़ से बचें। जरुरत हो तो तभी घर से बाहर निकलें।
  • वैक्सीन लगावाएं, काढ़ा पिएं। मौसमी फल व सब्जियों का सेवन करें।
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