डकैतों के खौफ तले दबा UP का यह विधानसभा क्षेत्र:यहां आज तक सपा नहीं जीती, वजह है- एक डकैत से दोस्ती

उत्तर प्रदेश5 महीने पहले

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी चार बार सरकार बना चुकी है। बुंदेलखंड की मानिकपुर विधानसभा उसकी टीस बनी हुई है। पार्टी ने यहां जीतने के लिए क्या नहीं किया। डकैत से दोस्ती की। डकैत के बेटे को टिकट दिया, लेकिन फिर भी खाली हाथ। आइए इस तिलिस्म को समझते हैं।

सपा से डकैत ददुआ की नजदीकियों ने डुबाई पार्टी की लुटिया
मानिकपुर के बगदरी गांव के पूर्व प्रधान लवलेश बताते हैं, “2004 के लोकसभा चुनाव में ददुआ ने सपा का प्रचार किया था। सपा से नजदीकी होने के कारण डकैत ददुआ मायावती की आंखों पर चढ़ गया। साल 2007 में उत्तर प्रदेश में माया की सरकार आई। उसी साल ददुआ एनकाउंटर में मारा गया।”

ददुआ तो गया, लेकिन सपा को ले डूबा। लोगों में मैसेज गया कि सपा डकैती को बढ़ावा दे रही थी। मायावती ने लोगों को ऐसी गुंडागर्दी से बचा लिया। लोगों ने शपथ ले ली, सपा को यहां आने नहीं देना है।

6 दशकों तक डकैत यहां खून-खराबा करते रहे
मनिकपुर की रायपुरा ग्राम पंचायत के पूर्व प्रधान गिरीश कुमार बताते हैं, “साल 1980 के बाद मानिकपुर में डकैत ददुआ का राज था। उसके ऊपर सरकार ने सात लाख रुपए का इनाम भी रखा था। ददुआ के इशारे पर यहां कई प्रधान और क्षेत्रीय नेता तक बनाए गए।”

उससे पहले यहां डकैतों का पूरा गैंग था। असल में चित्रकूट के पाठा क्षेत्र में 6 दशकों तक डकैतों का आतंक रहा। अपनी दहशत के दम पर इन डकैतों ने मनिकपुर के साथ UP और MP के कई गांवों में खून-खराबा किया। इसमें 4 नाम सबसे बड़े हैं।

1 - साल 1965 से 1980 - डकैत गया प्रसाद
डकैत गया प्रसाद के आतंक से पूरा चित्रकूट कांपता था, कहते हैं कि यहां शाम होते ही उसके डर से घरों में ताले लग जाते थे। राजनीति से गया प्रसाद ने हमेशा दूरी बनाए रखी।

2- साल 1980 से 2007 - डकैत ददुआ
दस्यु गया प्रसाद का उत्तराधिकारी बना डकैत ददुआ। उसने क्षेत्रीय राजनीति में हमेशा दखल दी, 2004 के लोकसभा चुनाव में सपा के लिए भी प्रचार किया, बसपा सरकार में उसका एनकाउंटर हुआ।

3- साल 2007 से 2008 - डकैत ठोकिया
ठोकिया ने जुलाई 2007 में STF के जवानों पर घात लगाकर अंधाधुंध फायरिंग की। इस घटना में 6 कमांडो शहीद हो गए। 04 अगस्त 2008 को डकैत ठोकिया के ही गांव सिलखोरी में STF ने उसे मुठभेड़ में मार गिराया।

4- साल 2009 से 2021 - डकैत गौरी यादव
गौरी यादव पर UP और MP के कई थानों में हत्या, अपहरण, फिरौती के 60 से अधिक मामले दर्ज थे। गौरी यादव को STF ने 30 अक्टूबर 2021 को बहिलपुरवा के जंगल में मुठभेड़ में मार गिराया।

डकैती एक तरफ और राजनीति एक तरफ। यहां के लोग दोनों के मारे हैं। ऊपर हमने डकैती के बारे में बताया। एक बार इस सीट की राजनीति का इतिहास देखिए-

मानिकपुर में जब ददुआ ने आतंक मचाया तब यहां कांग्रेस के विधायक थे
साल 1952 में कांग्रेस के दर्शन राम, 1957,1962 और 1969 में कांग्रेस की ही सिया दुलारी यहां की विधायक रहीं। फिर 1967 में जनसंघ के इन्द्र पाल, 1974 में जनसंघ के लक्ष्मी प्रसाद वर्मा ने विधायकी की। 1977 से जनसंघ के ही रमेश चंद्र कुरील रहे। फिर 1980 और 1985 में कांग्रेस के शिरोमणि भाई इस सीट से विधायक चुने गए। यही समय था जब डकैत ददुआ ने यहां आतंक मचा दिया।

कांग्रेस के बाद लोगों ने बीजेपी पर भरोसा किया, लेकिन कुछ हुआ नहीं
1989 और 1993 में भाजपा के मन्नू लाल कुरील मानिकपुर सीट से विधायक बने। भाजपा विधायक का मानिकपुर से चुने जाने पर डकैत ददुआ को आगबबूला कर दिया था। ददुआ ने साल 1992 में मडैयन गांव में तीन लोगों की हत्या करने के बाद पूरे गांव में आग लगा दी। बहुत खून-खराबा हुआ।

बसपा ने किया ददुआराज का अंत और बन गई फेवरेट
बढ़ते गुंडाराज को देख लोगों ने फिर एक बार सीट के लिए नई सरकार चुनी। साल 1996 में बसपा के दद्दू प्रसाद को विधायक बनाया गया। उनके राज में गुंडई कम हुई, तो जनता ने 2002 और 2007 में भी बसपा को मानिकपुर सीट सौंप दी।

जनता का विश्वास देख बसपा ने 2007 में डकैत ददुआ के खात्मे के लिए पूरा जोर लगा दिया और 22 जुलाई 2007 को मानिकपुर के झलमल जंगल में ददुआ को STF ने मार गिराया। यही वजह रही कि दद्दू प्रसाद के बाद 2012 में भी बसपा के ही कैंडिडेट चंद्रभान सिंह को इस सीट से विधायक चुना गया।

भाजपा ने मास्टर प्लान बनाकर छीनी बसपा की कुर्सी
मानिकपुर सीट पर बसपा का वर्चस्व देख भाजपा ने 2017 के विधानसभा चुनाव में मास्टर प्लान बनाया। पार्टी ने पूर्व बसपा विधायक आरके पटेल को उम्मीदवार बनाकर इस सीट से विधायकी का चुनाव लड़वा दिया। भाजपा का प्लान काम कर गया और पटेल को बड़ी जीत मिली। पटेल 2019 में लोकसभा चुनाव जीते तो उनकी खाली सीट पर उपचुनाव हुए।

उपचुनाव में पहली बार ऐसा लगा कि सदियों बाद सपा का जादू इस सीट पर चलेगा, क्योंकि इस बार लड़ाई भाजपा के आनंद शुक्ला और सपा के डॉ. निर्भय सिंह के बीच थी, लेकिन कड़े मुकाबले में आनंद शुक्ला को जीत मिली और एक बार फिर से सपा का मानिकपुर सीट को जीतने का ख्वाब अधूरा रह गया।

आज भी विकास के इंतजार में हैं इस विधानसभा के गांव
चित्रकूट जिले की मानिकपुर विधानसभा प्रदेश की सबसे कम विकसित सीटों में जानी जाती है। यहां 2 लाख 76 हजार 314 लाख वोटर हैं और ज्यादातर आबादी अनुसूचित जाति की है। यह क्षेत्र 50 वर्षों तक गया प्रसाद, शिव कुमार ददुआ और अंबिका पटेल ठोकिया जैसे डकैतों के खौफ तले दबा रहा, जिससे यहां के अधिकतर गांव विकास से दूर रह गए।

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