आगरा में प्लेटफॉर्म के बीचो-बीच मां चामुंडा का मंदिर:4 बार फिरंगियों ने कोशिश की, मूर्ति नहीं हटा पाए; फिर वक्राकार करके बिछाया ट्रैक

2 महीने पहलेलेखक: आशीष उरमलिया

आगरा के राजा की मंडी रेलवे स्टेशन में ट्रेन अनाउंसमैंट से ज्यादा घंटों की आवाज सुनाई देती है। ये आवाज प्लेटफार्म नंबर 2 पर विराजमान मां चामुंडा देवी मंदिर से आती है। मंदिर का एक बड़ा हिस्सा रेलवे स्टेशन के पीछे है। मगर, मां की मुख्य मूर्ति प्लेटफॉर्म पर ही मौजूद है।

ट्रेन की पटरियां बिछाते वक्त अंग्रेजों ने ये मंदिर हटाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन उनसे यह हो न सका। दैनिक भास्कर की टीम माता के दर्शन और उनसे जुड़ी रोचक कहानी जानने के लिए आगरा पहुंची। माता के भव्य दर्शन किए और वहां के महंत से भी बात की।

आइए आपको भी वहीं ले चलते हैं…

सुबह की आरती के बाद मां चामुंडा के भव्य दर्शन।
सुबह की आरती के बाद मां चामुंडा के भव्य दर्शन।

अंग्रेज अफसर के सपने में आई थी मां चामुंडा
महंत विरेंद्रानंद ने बताया, “हमारी जानकारी में मां चामुंडा मंदिर का इतिहास 300 साल से ज्यादा पुराना है। साल 1904 में ब्रिटिश सरकार ने आगरा में रेलवे लाइन बिछाई। अंग्रेजों के बनाए रेलवे रूट में मां चामुंडा की मूर्ति सीधी लाइन के बीचोबीच पड़ रही थी। उन्होंने 3 से 4 बार माता की मूर्ति हटाने और मंदिर तोड़ने की कोशिश की, लेकिन मूर्ति को छू भी नहीं पाए।

उन्होंने आगे बताया, “अंग्रेज जब भी मंदिर और पेड़ हटाने का प्रयास करते, तब उनके सामने सांप आ जाते थे। उन्हें चोटें भी लगती थीं। एक बार माता ने अंग्रेजी अधिकारी को सपना भी दिया था। उसके बाद अंग्रेजों ने मंदिर तोड़ने के सारे प्रयास बंद कर दिए। बाद में रेलवे लाइन को वक्राकार करके यानी मोड़कर बिछाया गया और स्टेशन बनाया गया।”

मां चामुंडा देवी मंदिर के महंत वीरेंद्रानंद शास्त्री।
मां चामुंडा देवी मंदिर के महंत वीरेंद्रानंद शास्त्री।

शनिवार को लगती है अरदास
महंत ने आगे बताया, “1904 में यहां राजा की मंडी रेलवे स्टेशन बनने के बाद माता की ख्याति देशभर में बढ़ती गई। माता के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ आने लगी। शनिवार को यहां मेला लगता है। माता के दरबार में अरदास भी लगती है। माता भक्तों की सभी मनोकामनाओं को पूरा करती हैं। विदेशों से भी माता के दर्शन करने भक्त आते हैं। नवरात्रि पर अनगिनत भक्तों की भीड़ आती है।”

मुस्लिम महिला के ऊपर से ट्रेन निकल गई, बाल बांका नहीं हुआ
महंत विरेंद्रानंद ने कहा, “माता का दरबार रेलवे स्टेशन पर है। इसके बावजूद आज तक कोई दुर्घटना नहीं हुई। 2017 में माता के दरबार के ठीक सामने एक मुस्लिम बच्ची पटरी पर गिर गई थी। पूरी माल गाड़ी उसके ऊपर से निकल गई, लेकिन उसका बाल भी बांका नहीं हुआ। इसका वीडियो भी काफी वायरल हुआ था। मैं पिछले 22 साल से मां की सेवा में हूं, आज तक कोई दुर्घटना नहीं देखी।”

राजा मंडी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म-2 पर यात्री भी दिनभर माता के दर्शन करते हैं।
राजा मंडी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म-2 पर यात्री भी दिनभर माता के दर्शन करते हैं।

वैज्ञानिक रिसर्च करने आते हैं, उन्हें पॉजिटिव एनर्जी मिलती है
महंत ने बताया, ''माता यहां साक्षात रूप में विराजमान हैं। प्लेटफार्म पर मौजूद यात्री और कर्मचारी बाहर से ही माता की आरती में शामिल होते हैं। ट्रेन से गुजरने वाले यात्री भी माता के दर्शन जरूर करते हैं।''

तंत्र साधना से लेकर मुंडन तक सब होता है, मां के 9 रूप विराजमान
इस मंदिर में माता चामुंडा के साथ 9 देवियां भी स्थापित हैं। भक्त अपनी-अपनी आस्था और भाव लेकर आते हैं। कई लोग यहां तंत्र साधना करने भी आते हैं। 10 महाविद्या यानी महान विद्या रूपी देवी की पूजा करते हैं। लोग यहां आकर अपने बच्चों का मुंडन भी कराते हैं।

अप्रैल, 2022 में भी हुआ था देवी मंदिर हटाने का प्रयास
आगरा रेलवे प्रशासन ने 2011 और फिर 2022 की शुरुआत में भी मंदिर को हटाने का प्रयास किया था। 2011 में रेलवे स्टेशन पर अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस जारी किया गया था। मामले की जांच के लिए 7 लोगों की टीम बनाई गई। जांच में सामने आया कि मंदिर रेलवे स्टेशन से पुराना है।

स्टेशन पर मौजूद मां चामुंडा मंदिर का प्रवेश द्वार स्टेशन के पीछे से है।
स्टेशन पर मौजूद मां चामुंडा मंदिर का प्रवेश द्वार स्टेशन के पीछे से है।

फिर अप्रैल, 2022 में रेलवे ने मंदिर को हटाने के लिए 10 दिन का समय देते हुए नोटिस जारी किया। इस बार रेलवे ने दलील दी कि स्टेशन पर लाइन टेढ़ी होने के चलते ट्रेन की गति धीमी होती है। रेलवे के नोटिस की जानकारी लगते ही मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी और प्रशासन का जम कर विरोध किया, तब से मामला दबा हुआ है।

अब,
यहां तक आपने मां चामुंडा के दर्शन कर उनकी महिमा की कहानी जानी। आगे ग्राफिक के जरिए माता के मंदिर तक पहुंचने का रास्ता और उनकी पूजा का विशेष मंत्र जान लेते हैं…