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गोरखपुर में ट्रिपल मर्डर का खुलासा:समझौते की राह में रोड़ा बनने पर बदमाशों ने की तीन हत्याएं, लॉकडाउन में घर लौटे एक-एक लाख के दो इनामी STF के हत्थे चढ़े

गोरखपुर2 महीने पहले
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गोरखपुर पुलिस ने दोनों हत्यारोपियों से पूछताछ के बाद उन्हें जेल भेज दिया है। - Dainik Bhaskar
गोरखपुर पुलिस ने दोनों हत्यारोपियों से पूछताछ के बाद उन्हें जेल भेज दिया है।

उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और स्वाट टीम ने गोरखपुर के गगहा क्षेत्र में मार्च माह में हुई तीन लोगों रितेश मौर्या, शंभू मौर्या और कर्मचारी संजय पांडेय की हत्या में वांछित चल रहे दो बदमाशों को पकड़ा है। इनके नाम सन्नी सिंह उर्फ मृगेंद्र सिंह और युवराज सिंह उर्फ राज हैं। दोनों पर एक-एक लाख का इनाम घोषित था। अभी एक आरोपी सिंहासन यादव की तलाश जारी है। आरोपितों ने बताया कि ट्रिपल मर्डर के एक मामले में समझौते में रोड़ा बनने पर इन तीन लोगों की हत्या हुई थी।

SSP दिनेश कुमार पी ने बताया कि सिंहासन यादव पूर्व में तिहरे मर्डर कांड में जेल भी जा चुका है। आरोपियों के पास से पुलिस ने 9 MM की एक पिस्टल, दो मैगजीन, 9MM के छह कारतूस, दो 32 बोर की पिस्टल, चार मैगजीन, 13 कारतूस, ATM कार्ड, पैन कार्ड, निर्वाचन कार्ड, यात्री कार्ड दिल्ली मेट्रो कारपोरेशन और तीन हजार रुपए नकद बरामद किया गया है। बताया जा रहा है कि लॉकडाउन में दोनों लौटकर घर आए। तभी पुलिस ने उनको दबोच लिया।

गगहा में मिली थी लोकेशन

गगहा इलाके में 10 मार्च को जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे रितेश मौर्या की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस को कोई सुराग मिल पाता। इसके पहले 31 मार्च को रितेश के परिचित दुकानदार शंभू मौर्या और उनके कर्मचारी संजय पांडेय की गोली मारकर बदमाशों ने हत्या कर दी। इस मामले में पुलिस साजिश में शामिल और शरण देने के आरोपितों को पकड़ लिया। लेकिन मुख्य आरोपित सन्नी सिंह और युवराज सिंह फरार हो गए। तभी से दोनों की तलाश में STF गोरखपुर के इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश सिंह, क्राइम ब्रांच और गगहा पुलिस लगी थी। इस दौरान पता लगा कि लॉकडाउन के कारण दिल्ली रह रहे दोनों आरोपित कुशीनगर-देवरिया स्थित रिश्तेदारी में आकर छिपे हुए हैं। शुक्रवार को दोनों की लोकेशन गगहा एरिया में मिलने पर पुलिस ने घेराबंदी कर ली।

2013 में हुआ था ट्रिपल मर्डर

आरोपित सन्नी और युवराज ने पुलिस को बताया कि साल 2013 में रस्सी खरीदने के विवाद में दुर्वासा गुप्ता, उनकी पत्नी और उनके बेटे की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सन्नी ने अपने भाई टीका सिंह, सिंहासन यादव, अजय नारायण सिंह के साथ मिलकर वारदात की। घटना में तीन लोग घायल हुए थे। इसका केस दुर्वासा के बेटे बांकेलाल ने दर्ज कराया था। कोर्ट का ट्रायल फाइनल होने वाला है। सन्नी ने बताया कि वह समझौते के लिए बांकेलाल को राजी करना चाहता था। लेकिन रितेश मौर्या और शंभू मौर्या विरोध करने लगे। तीनों हत्याओं की कड़ी पैरवी में मदद पहुंचाते रहे। इसी वजह दोनेां के मर्डर की योजना बनी। सिंहासन ने कहा कि दोनों की हत्या नहीं होगी तो सबको सजा हो जाएगी।

पूर्व विधायक पर जताया भरोसा, दिए असलहे

शातिर सिंहासन यादव ने पूर्व विधायक और बड़हलगंज के एक पूर्व प्रमुख से अच्छे संबंधों का हवाला दिया। उसने कहा कि शंभू और रितेश की हत्या के बाद दोनों पैरवी करेंगे। मदद के लिए हर जगह खड़े रहेंगे। सिंहासन ने मर्डर के लिए पिस्टल और कारतूस मुहैया कराया।

आठ से नौ बजे के बीच रुकते थे रितेश

मर्डर के लिए सनी सिंह ने अपने साथियों संग रितेश की रेकी की। रितेश आठ से नौ बजे के बीच गगहा चौराहे पर जरूर रुकते थे। 10 मार्च को सनी और युवराज बाइक से पहुंचे। युवराज बाइक चला रहा था। रितेश को गोली मारकर मलौली, सोहगौरा में राजू चौधरी के घर चले गए। वहां से दूसरे दिन बाइक से लखनऊ के मोहनलालगंज में मित्र राजू मिश्रा के भाई आदित्य के घर चले गए। एक दिन वहां रुककर असलहा और कारतूस आदित्य के पास छोड़कर बस से मेरठ पहुंच गए।

दरियापुर के सोनू के घर बनाया ठिकाना, असलहा चलाने की प्रैक्टिस

तिहाड़ जेल में बंद सारिक चौधरी से सनी की अच्छी जान पहचान थी। जेल से ही बात करके सारिक ने अपने दो लड़कों उस्मान और शाहरुख को भेजा। दोनों के साथ सनी और युवराज डेयरी फार्म पर गए। वहां से कार दरियापुर के सोनू के घर गए। सोनू भी तिहाड़ में बंद है। 10-12 दिनों तक रहकर शंभू मौर्या के मर्डर की तैयारी की। तब शाहरूख ने 9MM की पिस्टल और 10 कारतूस दिए। दोनों को गोली चलवाकर प्रैक्टिस भी कराई। फिर लखनऊ में रखी बाइक और असलहा लेकर गोरखपुर आ गए।

बचाने की कोशिश में कर्मचारी ने गंवाई जान

31 मार्च की शाम साढ़े सात बजे शंभू मौर्या अपनी दुकान बंद कर रहे थे। तभी दोनों बाइक से पहुंचे। तब युवराज ही बाइक चला रहा था। दुकान पर पहुंचते ही शंभू मौर्या को गोली मार दी। उसे बचाने के लिए दौड़े कर्मचारी संजय पांडेय को भी गोली मार दिया। बाइक से भागकर राजू चौधरी के पास पहुंच गए। मर्डर के बाद दोनों दोबारा भागकर उस्मान और शाहरुख के साथ सोनू के दरियापुर, दिल्ली स्थित आवास पर पहुंच गए। वहां कुछ दिनों तक रहने के बाद देवरिया, कुशीनगर सहित कई जगहों पर रहकर व्यापारियों से रंगदारी मांगने की योजना बनाई। सनी और युवराज ने बताया कि राजू सिंह ने उनकी रुपए और शेल्टर देने में पूरी मदद की थी।

क्या बोले SSP?

SSP दिनेश कुमार पी. घटना में शामिल मुख्य आरोपियों को अरेस्ट कर लिया गया है। इस मामले में जिनकी भी भूमिका सामने आई है। उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। आरोपित सिंहासन की तलाश की जा रही है। संरक्षणदाताओं और नए मददगारों का नाम भी केस में बढ़ाया जाएगा।

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