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क्या अब स्कॉलरशिप नहीं आएगी?:सरकार ने फंड की कमी से स्कॉलरशिप देने से मना किया, छात्रों ने विरोध में 1 लाख ट्वीट किए, मगर कोई जवाब नहीं मिला

उत्तर प्रदेश5 महीने पहलेलेखक: राजेश साहू

स्कॉलरशिप नहीं मिलने का मुद्दा अब बड़ा होता जा रहा है। 17 अप्रैल को प्रभावित छात्रों ने ट्वीटर पर 90 हजार से ज्यादा ट्वीट करके सरकार का ध्यान अपनी तरफ खींचने की कोशिश की। सरकार के किसी मंत्री या फिर समाज कल्याण विभाग के किसी अधिकारी का कोई बयान नहीं आया है। छात्र आगे भी प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे हैं। आइए पूरा मामला जानते हैं।

छात्र आंदोलन के लिए मजबूर क्यों हुए?
ट्विटर पर स्कॉलरशिप की मांग कर रहे छात्र अपना फॉर्म ट्वीट कर रहे हैं। फॉर्म के करंट स्टेटस में लिखा है,"Scholarship Not Sanctioned due to Unavailability of Fund" हिन्दी में इसका मतलब हुआ, "पैसे की कमी की वजह से आपकी स्कॉलरशिप नहीं दी जा सकती।" इसके अलावा दूसरे फॉर्मों में लिखा है, "Verified/Recommended By District Scholarship Committee इसका हिन्दी में मतलब हुआ, आपके फॉर्म को जिला समिति द्वारा आगे भेज दिया गया है।" लेकिन अभी तक स्कॉलरशिप नहीं मिली।

छात्रों के फॉर्म में यह मार्च महीने से ही लिखा हुआ आ रहा है, अभी तक स्कॉलरशिप नहीं मिली।
छात्रों के फॉर्म में यह मार्च महीने से ही लिखा हुआ आ रहा है, अभी तक स्कॉलरशिप नहीं मिली।

फंड की कमी बताकर स्कॉलरशिप नहीं दिए जाने की बात कहने पर छात्र सरकार से अतिरिक्त फंड जारी करने की अपील कर रहे हैं। ट्वीट पर #YogiJiScholarshipDo, #upscholarship, #upscholarshipchahye2022 #upscholarship2022 हैशटैग चल रहा है। इसमें #YogiJiScholarshipDo हैशटैग का प्रयोग करते हुए रविवार रात 9 बजे तक 90 हजार ट्वीट किए जा चुके थे। आगे पढ़ने से पहले इस पोल पर वोट जरूर करें।

सरकार की तरफ से कोई बयान नहीं आया
छात्र अपने ट्वीट में हैशटैग के साथ समाज कल्याण विभाग के मंत्री असीम अरुण, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, योगी आदित्यनाथ के ऑफिस और योगी आदित्यनाथ को मेंशन कर रहे थे। हमने इन सभी ट्विटर हैंडल्स को देखा लेकिन किसी पर भी स्कॉलरशिप से जुड़ा कोई ट्वीट नहीं था। असीम अरुण ने 16 अप्रैल को एक ट्वीट किया। जिसमें लिखा, मैं समाज कल्याण विभाग की शक्तियों और कमजोरियों को पहचानने व समझने का प्रयास कर रहा हूं। कमेंट में सुझाव भी मांगा। छात्रों ने स्कॉलरशिप की मांग को 1 हजार कमेंट कर दिए।

असीम अरुण के ट्वीट पर 1 हजार से अधिक कमेंट स्कॉलरशिप की मांग को लेकर थे।
असीम अरुण के ट्वीट पर 1 हजार से अधिक कमेंट स्कॉलरशिप की मांग को लेकर थे।
  • ब्रजेश पाठक की टाइम लाइन पर उनके ब्राह्मण समाज के स्वागत समारोह में शामिल होने, ARL हेल्थ केयर हॉस्पिटल के उद्धाटन का फीता काटने और 'सतरंगी रे' कार्यक्रम में शामिल होने के पोस्ट रहे।
  • यूपी सरकार के ट्विटर हैंडल पर आयुष्मान के जरिए महंगी जांचे मुफ्त, प्रयागराज से दौड़कर सीएम योगी से मिलने पहुंची 10 साल की काजल और सीएम योगी के कोरोना अलर्ट की बात को पोस्ट किया गया है।
  • सीएम योगी आदित्यनाथ के हैंडल पर जन-धन योजना के शुभारंभ और गंगा समग्र के राष्ट्रीय कार्यकर्ता संगम से जुड़े 8 ट्वीट किए गए थे। इन सभी ट्वीट के कमेंट बॉक्स में स्कॉलरशिप से जुड़े मैसेज थे।

छात्रों के ट्वीट में क्या है?
छात्रों के ट्वीट में उनकी अपनी समस्या है। वह अपने फॉर्म के साथ परिवार की आर्थिक समस्या को आगे बढ़ाते हुए लिख करे हैं कि अगर स्कॉलरशिप नहीं मिली तो आगे की पढ़ाई करना मुश्किल हो जाएगा।

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी फैमिली नाम के ट्विटर अकाउंट से 200 से अधिक ट्वीट और करीब 1 हजार रीट्वीट किए गए। ट्वीट की भाषा में कोई तल्खी नहीं थी। सीएम योगी और समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण से अपील की गई थी।

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के ही पुरा छात्र अंकित द्विवेदी ने लिखा, "महाराज जी, ऐसा कैसे हो सकता है कि हम बच्चों का फंड खत्म हो जाएगा, हम नहीं मानते, योगी जी कोई फिरकी ले रहा है, छात्रों की स्कॉलरशिप उपलब्ध करवाइए।"

क्या सरकार के पास फंड की कमी है
2021-22 सत्र के लिए यूपी सरकार ने 4,204 करोड़ रुपए का बजट जारी किया। इसमें पिछड़े वर्ग के लिए 1,375 करोड़, एससी-एसटी वर्ग के लिए 1,430 करोड़, अल्पसंख्यक वर्ग के लिए 829 करोड़ रुपए और सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए 570 करोड़ रुपए का बजट जारी किया गया। स्कॉलरशिप के लिए कितना खर्च किया गया इसका आंकड़ा अभी तक सरकार ने सामने नहीं रखा। लेकिन फंड की कमी के लिए हम पिछले साल का रिकॉर्ड देख सकते हैं।

2020-21 में 3050 करोड़ रुपए स्कॉलरशिप के रूप में बांटी गई थी।
2020-21 में 3050 करोड़ रुपए स्कॉलरशिप के रूप में बांटी गई थी।

पिछले साल 26 लाख छात्रों को दिए गए थे 3050 करोड़ रुपए
यूपी स्कॉलरशिप की वेबसाइट के मुताबिक 2020-21 सत्र में यूपी 1.15 करोड़ छात्रों ने स्कॉलरशिप के लिए फॉर्म लिया। 89 लाख ने जमा किया। 77 लाख फॉर्म को कॉलेज ने समाज कल्याण विभाग को भेजा। विभाग ने 39 लाख फॉर्म फाइनल किया लेकिन स्कॉलरशिप 26.47 लाख छात्रों को दी। इसके लिए विभाग ने 3050.68 करोड़ रुपए खर्च किए। इसमें 2217 करोड़ रुपए फीस वापसी के और 833 करोड़ रुपए स्कॉलरशिप के रूप में दिए गए।

स्कॉलरशिप नहीं मिली तो बढ़ जाएगा ड्रॉप आउट
छात्रों के समर्थन में आवाज उठाने वाले व्यक्ति ने लिखा, "10 बच्चे क्लास 1 में एडमिशन लेते हैं और ग्रेजुएशन में उनमें से 3 ही जा पाते हैं। बाकी बच्चे मन न लगने या फिर पैसे की कमी से पढ़ाई छोड़ देते हैं। अब जो तीन गए हैं वह भी स्कॉलरशिप नहीं मिलने से पढ़ाई छोड़ देंगे।" हमने इससे जुड़ा आंकड़ा निकाला।

  • 2018 में सरकार की तरफ से जारी की गई उच्च शिक्षा रिपोर्ट के मुताबिक 2016-17 में 3.57 करोड़ छात्रों ने उच्च शिक्षा में एडमिशन लिया। इसमें ग्रेजुएशन करने वाले छात्रों की संख्या 2.83 करोड़ थी। खास ये कि 1.07 करोड़ छात्रों ने बीए में एडमिशन लिया।
  • पेशेवर और महंगे समझे जाने वाले इंजीनियरिंग में 14.7, साइंस में 16.7 और कॉमर्स में 14.1% छात्रों ने एडमिशन लिया।
  • जातीय आधार पर देखें तो जनरल वर्ग के छात्रों की हिस्सेदारी 46.1%, ओबीसी वर्ग की 34.4, एससी छात्रों की 12.8 और एसटी छात्रों की संख्या 4.4 थी।
  • ग्रेजुएशन करने के बाद पीजी करने वाले छात्रों की संख्या 40 लाख रही। मतलब कुल छात्र संख्या के 11.2% छात्र ही पीजी में एडमिशन ले पाए। आगे पढ़ाई नहीं कर पाने वालों में पैसे की कमी बड़ा मुद्दा बना।
  • इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मानें तो स्कॉलरशिप नहीं आने से बडी़ संख्या में लड़के मजबूरन पढ़ाई छोड़कर गांव वापस लौट जाएंगे।

सरकार ने स्कॉलरशिप के लिए कई मानक तय किए। लेकिन जो उन सभी मानकों को पूरा करते हैं उन्हें भी स्कॉलरशिप नहीं मिली। दो बड़े नियम देखिए।

सरकार ने स्कॉलरशिप लेने वाले छात्रों के लिए विश्वविद्यालयों में 75% अटेंडेंस अनिवार्य किया। कुछ कॉलेजों में बायोमेट्रिक करने की भी कोशिश की गई। फिर आधार बेस अटेंडेंस किया गया। लेकिन यह सफल नहीं हुआ। नतीजा ये रहा कि अटेंडेंस रजिस्टर पर ही लगता है और उसे स्कॉलरशिप पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाता है।

दूसरा नियम रिजल्ट परसेंटेज का था। यह हर वर्ग के लिए अलग है। एससी-एसटी वर्ग के लिए पिछले साल तक यह 60% था लेकिन 2021-22 सत्र के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसे 50% कर दिया। ओबीसी और जनरल वर्ग के लिए पहले यह 65% तय था। पिछले सत्र में इसे 60 और फिर अब 55% कर दिया गया। खास बात यह कि ये मानक स्थाई नहीं हैं। सरकार अपनी सुविधा के अनुसार इसे बदलती रहती है।

क्या अब स्कॉलरशिप मिलने की संभावना है
सरकार के पिछले रिकॉर्ड को देखें तो अप्रैल महीने में स्कॉलरशिप के लिए कोई बजट नहीं जारी किया। 31 मार्च के पहले ही बजट जारी होते रहे हैं और इसी दौरान ही छात्रों को स्कॉलरशिप मिलती रही है। ऐसे में विशेष बजट जारी होने पर ही स्कॉलरशिप मिलने की संभावना है। छात्र इसी की मांग करते हुए रोज आंदोलन कर रहे हैं।