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अच्छी कोशिश / लॉकडाउन में भूखों का पेट भरने के लिए महिलाओं की अनोखी पहल, हर घर से छह चपाती जुटाकर बनाया रोटी बैंक

ये तस्वीर ग्रेटर नोएडा की है। यहां महिलाएं गरीबों के लिए खुद रोटी बनाकर उन्हें उपलब्ध करा रही हैं।
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  • ग्रेटर नोएडा में एल्डिको ग्रीन मिडोज सोसायटी की महिलाएं कर रहीं श्रमिकों की मदद
  • रोटी जुटाने से लेकर गरीबों तक पहुंचाने का समय निर्धारित, उनके इस प्रयास की हो रही तारीफ

दैनिक भास्कर

May 31, 2020, 11:13 AM IST

ग्रेटर नोएडा. कोरोना महामारी के बीच ग्रेटर नोएडा में एल्डिको ग्रीन मिडोज सोसायटी में रहने वाली महिलाओं ने गरीबों व जरुरतमंदों की मदद के लिए अनोखी पहल की है। इस सोसायटी में करीब 8 हजार परिवार रहते हैं। हर दिन करीब 100 परिवारों से छह रोटियां जरूरतमंदों के लिए रोटी बैंक में जमा की जाती है। रोटी के साथ अलग अलग तरह की सब्जियां भी होती हैं। अब तक हजारों गरीबों को रोटी बैंक से सहायता दी गई है। यहां नॉलेज पार्क के पास बिहार के रहने वाले मजदूर अपने घर नहीं जा पाए हैं। उन्हें भी रोटी बैंक से खाना उपलब्ध कराया जा रहा है। 

सोसायटी में रहने वाली सुमिता वैद्य ने बताया कि, सोसायटी में ज्यादातर महिलाएं कामकाजी हैं, जो अपने परिवार को भी संभालती हैं और अलग अलग कंपनियों में काम भी करती हैं। लॉकडाउन में सभी महिलाएं टीवी न्यूज चैनल पर कई किलोमीटर दूर पैदल चल रहे प्रवासी श्रमिकों व ग्रेटर नोएडा व नोएडा में रहने वाले श्रमिकों की दर्द भरी खबरें देख कर दुखी हो जाती थीं। जिसके बाद सभी महिलाओं से बात कर जरुरतमंदों की मदद के लिए आम सहमति बनाई गई। सभी ने मिलकर निर्णय लिया कि सभी महिलाएं प्रति परिवार 6 रोटियां प्रवासी श्रमिकों को देंगी। जिसमें उन्होंने प्राधिकरण व सामाजिक कार्यकर्ता की भी मदद ली। इस कार्य में हर वर्ग की महिलाएं हिस्सा ले रही हैं। लॉकडाउन 2.0 के बाद से अब तक हजारों जरुरतमंदों को रोटी पहुंचाने का काम इन महिलाओं के द्वारा बनाए गए रोटी बैंक ने किया है।

अंजली सिंह गृहणी हैं। वे बताती हैं कि, हमें काफी मजदूर ऐसे मिले, जिनके छोटे बच्चे व बुजुर्ग साथ थे। उनको खाने को चावल व कचौड़ी पूरी मिलती थी, लेकिन उन लोगों को घर की चपातियां, रोटियां नसीब नहीं हो रही थी। इसी को लेकर हम लोगों ने निश्चय किया कि ये अब इन मजदूरों तक ये रोटियां जरूर पहुंचाएंगे।

सामाजिक कार्यकर्ता हरेंद्र भाटी ने बताया कि, सभी महिलाएं अपने अपने घरों में 11 बजे के करीब रोटी तैयार करती हैं। जिसके बाद गाड़ी से एक व्यक्ति बॉक्स लेकर घरों तक जाता है। घण्टी बजाता है और महिला बॉक्स में रोटी रख देती है। इसके लिए बकायदा महिलाओं ने सोसाइटी को जोन में बांटकर खुद को ग्रुप में बांटा है जो इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही हैं। पूरी सोसाइटी से खाना इकट्ठा करने के बाद बॉक्स को 12 बजे तक मुख्य गेट पर पहुंचाया जाता है। जहां से इनकी एक और टीम आती जो भूखे लोगों तक खाना पहुंचाती है।

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