जूना अखाड़े के श्रीमहंत ब्रह्मलीन:कभी पुलिस अफसर रहे प्रज्ञानंद गिरी की कोरोना से मौत; हरिद्वार कुंभ में हुए थे शामिल

प्रयागराजएक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष स्वामी नरेंद्र गिरी के साथ (बीच में) प्रज्ञानन्द गिरी।- फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष स्वामी नरेंद्र गिरी के साथ (बीच में) प्रज्ञानन्द गिरी।- फाइल फोटो

जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत प्रज्ञानंद गिरि (74) की गुरुवार की सुबह मौत हो गई। उन्होंने प्रयागराज के स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। वह हरिद्वार कुम्भ में भी शामिल हुए थे। प्रज्ञानंद जूना अखाड़ा के वृंदावन आश्रम के प्रभारी थे। उन्हें शुक्रवार को उसी आश्रम में समाधि दी जाएगी। परिजन पार्थिव शरीर को लेकर वृंदावन जाएंगे। समाधि प्रक्रिया में महंत हरि गिरि सहित जूना अखाड़ा के प्रमुख पदाधिकारी शामिल होंगे।

प्रभुनाथ ओझा से श्रीमहंत प्रज्ञानन्द गिरी बनने का ऐसा रहा सफर
मूलतः यूपी के बलिया जनपद के सेंदुरिया गांव में जन्मे श्रीमहंत प्रज्ञानंद गिरी का संन्यास से पहले का नाम प्रभुनाथ ओझा था। वह उत्तर प्रदेश पुलिस दरोगा थे। बाद में पीपीएस अफसर बनकर वर्ष 2008 में रिटायर हुए थे। रिटायरमेंट के बाद वे जूना अखाड़े के मुख्य संरक्षक महंत हरि गिरि के संपर्क में आए। इससे उनका धार्मिक गतिविधियों की तरफ झुकाव हुआ। उन्हें हरि गिरि से सन्यास का दीक्षा लिया। जबकि 2019 में जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि ने हरिहर आश्रम में उन्हें विधिवत दीक्षित करते हुए महामंत्री पद पर आसीन किया। इसके बाद वे श्रीमहंत प्रज्ञानन्द गिरि बन गए।

प्रयागराज में लबे समय तक ड्यूटीरत रहे

प्रयागराज में कई कुंभों और अर्द्धकुंभों में महत्वपूर्ण पदों पर कुशलतापूर्वक ड्यूटी कर चुके प्रभुनाथ ओझा कुछ सालों से वे प्रयागराज के आलोपी बाग में रह रहे थे। वर्ष 1970 में पुलिस में भर्ती हुए थे। वर्ष 2008 में सीओ प्रयागराज के पद से सेवानिवृत्त हुए। ये दस साल सीओ प्रयागराज रहे। चार बार सीओ अखाड़ा भी रहे। इस दौरान इनकी नजदीकियां अखाड़ों के संतों के साथ बनती चली गईं। वर्ष 2010 में हरिद्वार कुंभ में भी सीओ अखाड़ा बनाया गया था। उनके बड़े बेटे देवकांत गांव में और छोटे बेटे डॉ. शिवेंदु मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज, प्रयागराज के एनिस्थीसिया व छोटी बहू डॉ. अर्चना यहीं के न्यूरोलॉजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। बेटी नीलम भी डॉक्टर हैं।

22 अप्रैल को वृंदावन आश्रम में बिगड़ी थी हालत
वृंदावन आश्रम में ही 22 अप्रैल की रात उन्हें सांस लेने में दिक्कत महसूस हुई। इसकी जानकारी उनके छोटे बेटे डॉ. शिवेंदु को हुई तो उन्होंने उन्हें एंबुलेंस से प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया। जहां उनकी मौत हो गई।