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हाईकोर्ट की फटकार:HC ने कहा- ECI और सरकार कुछ राज्यों में चुनाव और UP में पंचायत चुनाव की इजाज़त देने के विनाशकारी परिणामों की पहचान करने में असफल रहीं

लखनऊ7 महीने पहले
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - Dainik Bhaskar
इलाहाबाद हाईकोर्ट।
  • इलाहबाद HC ने कहा पिछले साल कोरोना की पहली वेव जो गांव तक नहीं पहुंची थी वह अब गांव तक पहुंच चुकी है

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के बाद कोरोना का कहर गांवों में भी पहुंच गया है। यूपी में गांवों तक फैल चुकी कोरोना महामारी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा है कि ECI और सरकार कुछ राज्यों में चुनाव और UP में पंचायत चुनाव की इजाज़त देने के विनाशकारी परिणामों की पहचान करने में असफल रहीं हैं। हालांकि इससे पहले भी हाईकोर्ट यूपी सरकार को कोरोना संक्रमण को रोकने में बरती जाने लापरवाही को लेकर सवाल उठा चुका है।

कोर्ट ने कहा है कि शहरी क्षेत्रों में कोरोना वायरस के प्रसार रोकने में राज्य सरकार को मुश्किल हो रही है। इसे देखते हुए गांव की आबादी जो कोरोना से पीड़ित है उसकी जांच और इलाज करने में बहुत मुश्किल होगी। वर्तमान में राज्य में तैयारी और संसाधनों का अभाव है। दरअसल, कोरोना को लेकर एक जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह आदेश पारित किया। हाईकोर्ट ने इसके लिए सरकार को कुछ बातों पर अमल करने के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट के निर्देश

हर जिले में एक CJM स्तर के, एक मेडिकल कॉलेज का प्रोफेसर या लेवल 3,4 जे डॉक्टर और एक ADM रैंक के अफसरों की कमेटी बनाई जाय जो कोरोना ग्रीवांस सेल के तौर पर काम करेगी,48 घण्टे में ये समितियां बनाई जाए।

केंद्र सरकार बताए कि विकलांगों या मज़दूर जो 18 से 44 साल के बीच मे और वैक्सिनेशन के लिए ऊना रजिस्ट्रेशन ONLINE नहीं कर सकते वो कहाँ जाएं, उनका वैक्सीनशन कैसे होगा, केंद्र इसका जवाब दे साथ ही राज्य सरकार ये बताए कि ऐसे मामलों पर वो अपनी गाइडलाइन क्यों नहीं बना सकता। सवालों के जवाब अगली तारीख 17 मई तक कोर्ट को दें।

जस्टिस VK श्रीवास्तव की मौत की जांच के लिए, हाई कोर्ट के एक वरिष्ठ वकील,SGPGI के PULMUNORY DEPT के प्रोफेसर की कमेटी बनेगी जिसके समन्वयक एक सचिव स्तर के अधिकारी होंगे।जो 2 हफ्ते में मामले की जांच कर रिपोर्ट देगी।

पहले भी लग चुकी है यूपी सरकार को फटकार

इससे पहले भी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश में कोरोना संक्रमण से निपटने के सरकारी तौर तरीकों पर नाराजगी जतायी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि सरकार माई-वे या नो-वे का रास्ता छोड़े और लोगों के सुझावों पर भी अमल करे। नागरिकों को ऑक्सीजन न दे पाना शर्मनाक है।

हाईकोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि कोरोना का भूत गली, सड़क पर दिन-रात मार्च कर रहा है। लोगों का जीवन भाग्य भरोसे है। डर से सड़कें, गलियां रेगिस्तान की तरह सुनसान पड़ी हैं। शहरी आबादी कोरोना की चपेट में है।

UP में संक्रमण के मामलों में आई कमी

बीते 11 दिनों के दौरान प्रदेश में कोविड संक्रमण के 94,726 सक्रिय केस कम हुए हैं। बीते 24 घंटे के दौरान प्रदेश में जहां कोरोना संक्रमण के 20463 मामले सामने आए। वही कोविड से स्वस्थ होने वाले व्यक्तियों की संख्या 29358 थी। कोरोना संक्रमण के नए मामलों में मेरठ और गौतम बुद्ध नगर ने लखनऊ को पीछे छोड़ दिया है।

उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि चौबीस घंटों में प्रदेश में 2,33,705 सैंपल्स की जांच की गई, जिसमें कोरोना संक्रमण के 20,463 नए मामले सामने आए और 29,358 लोग डिस्चार्ज हुए। अब तक प्रदेश में कुल 4,34,04,184 सैंपल्स की जांच की गई है। अब यूपी में कोरोना संक्रमण के सक्रिय मामलों की संख्या 2,16,057 है।