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  • In 1669, The Priest Saved The Self styled Jyotirlinga By Jumping Into The Gyanvapi Kund, Aurangzeb's Army Was Defeated By Nandi.

तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं:1669 में ज्ञानवापी कुंड में कूदकर पुजारी ने स्वयंभू ज्योतिर्लिंग को बचाया था, औरंगजेब की सेना नंदी से हार गई

10 दिन पहलेलेखक: देवांशु तिवारी

ज्ञानवापी मस्जिद आजकल सुर्खियों में है। यहां सर्वे की वजह से सड़क से दिखने वाले ज्ञानवापी के हिस्से को हरे परदे और होर्डिंग से ढक दिया गया। सर्वे करने आई टीम के आते ही मस्जिद के बाहर असहज करने वाला शोर था।

353 साल पहले इस इलाके में आज से भी ज्यादा शोर था। औरंगजेब की सेना ने काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़ने के लिए इस क्षेत्र को घेर लिया था। सैनिकों के हाथों में तलवारें थीं और मंदिर को छोड़कर भागते लोगों की चीखें। तब एक पुजारी ने हिम्मत दिखाई थी। स्वयंभू ज्योतिर्लिंग को बचाने के लिए उसने पूरा जोर लगा दिया था।

इससे आगे की कहानी हमने नीचे दी गई पहली तस्वीर में बयां की है। इसके बाद हमने 6 तस्वीरों में ज्ञानवापी से जुड़े फैक्टस बताए हैं। चलिए एक-एक करके सबसे गुजरते हैं…

पहला फरमान औरंगजेब ने 18 अप्रैल 1669 को जारी किया था

तस्वीर की कहानी: 18 अप्रैल 1669 में औरंगजेब ने विश्वनाथ मंदिर पर हमला करने का फरमान जारी किया। उसकी सेना ने मंदिर को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया, लेकिन इसमें विराजित स्वयंभू ज्योतिर्लिंग पर आंच तक नहीं आई। क्योंकि उस दिन भगवान की रक्षा मंदिर के महंत कर रहे थे। हमलावर सेना को आता देख महंत शिवलिंग को लेकर ज्ञानवापी कुंड में कूद गए।

353 साल पुराना ज्ञानवापी कुंड पिछले साल काशी विश्वनाथ मंदिर के विस्तार में कॉरिडोर का हिस्सा बन गया है। ये तस्वीर उसी ज्ञानवापी कुंड की है। इसे वर्ष 1900 के आस-पास कैमरे में कैद किया गया। इस कहानी का जिक्र लंदन के के एम ए शेरिंग की किताब 'सेक्रेड सिटी आफ द हिंदूज' में भी है।

औरंगजेब के सैकड़ों सैनिक एक नंदी से हार गए

तस्वीर की कहानी: औरंगजेब की सेना जब स्वयंभू ज्योतिर्लिंग को नुकसान नहीं पहुंचा पाई। तब उसने मंदिर के बाहर बैठे 5 फीट ऊंची नंदी की मूर्ति पर हमला कर दिया। मूर्ति पर खूब हथौड़े चले, खूब प्रहार किए गए पर नंदी अपनी जगह से हिले नहीं। तमाम प्रयासों के बाद सेना हार गई और नंदी को उसी जगह छोड़ दिया।

यह प्रतिमा ज्ञानवापी मस्जिद की तरफ है। इसे मंदिर के विस्तार में अब कॉरिडोर का हिस्सा माना गया है। ये तस्वीर आजादी से पहले की है।

जेम्स प्रिंसेप के स्केच ने दुनिया को दिखाई ज्ञानवापी की पहली तस्वीर

तस्वीर की कहानी: ज्ञानवापी मस्जिद का ये स्केच एंग्लो-इंडियन स्कॉलर जेम्स प्रिंसेप ने 1834 में बनाया था। स्केच में ध्वस्त हो चुके बनारस के विश्वेश्वर मंदिर के हिस्से को दिखाया गया। इसमें मस्जिद का बड़ा गुंबद और उसके बाहरी छोर पर टूटे हुए हिस्से में बैठे लोग दिख रहे हैं। टूट चुके इस हिस्से की असली दीवार अब ज्ञानवापी मस्जिद में खड़ी है।

ब्रिटिश लाइब्रेरी में आज भी रखा है काशी विश्वनाथ मंदिर का पुराना नक्शा

तस्वीर की कहानी: लंदन की ब्रिटिश लाइब्रेरी में रखा काशी विश्वनाथ मंदिर का ये नक्शा भी जेम्स प्रिंसेप ने बनाया था। इस नक्शे में काशी विश्वेश्वर मन्दिर के गर्भगृह को बीचो बीच दिखाया गया है। इस पर अंग्रेजी में महादेव लिखा गया है। इसके चारों तरफ दूसरे मन्दिर बने हैं।

नक्शे के नीचे लिखे गए डिस्क्रिप्शन को गौर से देखा जाए, तो अंग्रेजी में लिखा है - The doted line shows the portion of the temple occupied by the present masjid. यानी नक्शे में बनाई गई डॉटेड लाइन मौजूदा मस्जिद के कब्जे वाले मंदिर के हिस्से को दर्शाती है। यह नक्शा 1832 में तैयार किया गया था।

अंग्रेजों के जमाने में भी सिर ऊंचा कर खड़ा रहा 5 फीट का नंदी

तस्वीर की कहानी: काशी विश्वनाथ मंदिर की ये तस्वीर 1890 में ली गई थी। हमें इसके फोटोग्राफर की जानकारी नहीं मिल पाई है। तस्वीर में ज्ञानवापी कुंड के सामने स्थापित नंदी की मूर्ति और उसके ठीक बगल में बने मंदिर में बैठे पुजारी को देखा जा सकता है। इस दरमियान काशी में ब्रिटिश हुकूमत अपना नॉर्दन हेडक्वार्टर का निर्माण करवा रही थी।

1880 में खींची गई इस तस्वीर में फिर दिखी ज्ञानवापी मस्जिद

तस्वीर की कहानी: तस्वीर में काशी विश्वनाथ मंदिर में बने ज्ञानवापी कुंड में बड़ी संख्या में पुजारी रोज की पूजा में शामिल होने के लिए इकट्ठा हुए हैं। तस्वीर के दाहिने हिस्से में विशाल नंदी की मूर्ति को देखा सकता है। ज्ञानवापी कुंड से ठीक पीछे ऊपर की ओर देखने पर मस्जिद का थोड़ा सा हिस्सा भी दिखाई देता है। फोटो 1880 की है।

ज्ञानवापी की एक तस्वीर 2022 की भी है

तस्वीर की कहानी: ज्ञानवापी मस्जिद में 6 मई को पुरातात्विक विभाग ने सर्वे किया। इससे पहले ज्ञानवापी परिसर के बाहर सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई। प्रशासन ने स्थिति कंट्रोल करने लिए लोकल इंटेलिजेंस यूनिट के साथ आईबी की टीमें पूरे इलाके में तैनात कर दी। इसके अलावा पैरामिलिट्री फोर्स और पीएसी को भी स्टैंडबाई मोड पर रखा गया।

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