कानपुर लैब टेक्नीशियन अपहरण कांड:पुलिस से दो कदम आगे चल रहे अपहरणकर्ता; 25 दिन बाद भी संजीत का नहीं कोई सुराग, थानेदार सस्पेंड

कानपुर2 वर्ष पहले
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यह तस्वीर कानपुर में अपहृत संजीत के परिजन की है। बेटे की सकुशल बरामदगी के लिए परिवार पुलिस अफसरों के कार्यालयों के चक्कर काट रहा है। - Dainik Bhaskar
यह तस्वीर कानपुर में अपहृत संजीत के परिजन की है। बेटे की सकुशल बरामदगी के लिए परिवार पुलिस अफसरों के कार्यालयों के चक्कर काट रहा है।
  • 22 जून से लापता है लैब टेक्नीशियन संजीत यादव
  • परिवार ने घर बेचकर चुकाई फिरौती की रकम
  • पुलिस अब तक आरोपियों को नहीं पकड़ सकी

थाना बर्रा के रहने वाले लैब टेक्नीशियन संजीत का 25 दिन बीतने के बाद कुछ पता नहीं चला है। फिरौती की रकम वसूलने के बाद भी वह अभी तक घर नहीं लौटा है। ऐसे में संजीत की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कानपुर में इस अपहरणकांड के खिलाफ प्रदर्शन भी हुआ है। परिजनों ने पुलिस की कार्यशैली सवाल उठाए हैं। वहीं, पुलिस सभी आरोपों का खंडन करते हुए जांच का हवाला दे रही है। हालांकि, इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में बर्रा थाना प्रभारी रणजीत राय को सस्पेंड कर दिया गया है। 

पिता ने कहा- सोचा था कि मुस्तैद होगी पुलिस मगर थानाध्यक्ष कहीं गए ही नहीं

संजीत के पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। आंखों में आंसू लिए उन्होंने कहा कि, अपहरणकर्ता बार-बार फोन कर रहे थे, जिससे हमारा पूरा परिवार बहुत डरा हुआ था। जैसा-जैसा बदमाश कह रहे थे, वैसा ही पुलिस को बताया जा रहा था। पुलिस ने मेरे साथ आए भांजे हरीश व उसके दोस्त प्रकाश को एक किलोमीटर आगे भेज दिया। मैंने अपहरणकर्ताओं के कहे मुताबिक फ्लाईओवर से 30 लाख रुपए व कपड़े से भरा बैग नीचे बांदा वाली रेलवे लाइन की तरफ फेंक दिया। मुझे भरोसा था कि पुलिस मुस्तैद होगी और न सिर्फ अपहरणकर्ता पकड़ लेगी, बल्कि बेटे को भी सकुशल बरामद कर लेगी। इनके पकड़े जाने से रकम भी बच जाएगी।

थाना प्रभारी रणजीत राय व सादे कपड़ों में छह पुलिसकर्मी होने से यह भरोसा था। लेकिन, बाद में पता लगा कि एसओ तो बदमाशों के पीछे कहीं गए ही नहीं। वे निजी कार में बैठे रहे और अपहरणकर्ता आराम से निकलने में कामयाब हो गए।

बर्रा थानेदार रणजीत को सस्पेंड किया गया।
बर्रा थानेदार रणजीत को सस्पेंड किया गया।

बहन बोली- नहीं मिलने दिया अधिकारियों से

संजीत की बहन रुचि ने एक बार फिर पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि बिकरु गांव में हुए शूटआउट को लेकर कानपुर में डीजीपी, एडीजी कानून व्यवस्था थे और जब हम लोगों ने इन अधिकारियों से मिलने जाने की कोशिश की तो पुलिस ने रोक दिया और थाना प्रभारी बोले कि हमारी चार टीमें जांच कर रही हैं। भरोसा रखो, जल्द ही संजीत को तलाश लिया जाएगा और कहा कि मीडिया में बताया तो भाई की जान को खतरा हो सकता है। इसी वजह से पूरा परिवार घर पर ही रहा। जब मकान, जेवर बेचकर जुटाए गए पैसे भी चले गए तो सब्र का बांध टूट गया। हमारा तो सबकुछ चला गया और भाई भी नहीं मिला।

क्या बोले एसएसपी?

पीड़ित परिवार द्वारा लगाए जा रहे हैं आरोपों को लेकर एसएसपी दिनेश कुमार पी ने कहा कि सभी आरोपों की निष्पक्षता से जाच होगी। जोभी दोषी पाया जाएगा उसके के खिलाफ कठोर कार्रवाई भी की जाएगी। थाना प्रभारी को सस्पेंड कर दिया गया है। 

यह है मामला

बर्रा पांच निवासी पान दुकानदार चमनलाल यादव का इकलौता बेटा संजीत नौबस्ता स्थित एक निजी हॉस्पिटल में लैब टेक्नीशियन है। वह 22 जून से ही लापता है। 23 जून को बर्रा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने के बावजूद अब तक उसका पता नहीं चला। 29 जून को फिरौती के लिए फोन आने पर अपहरण की जानकारी हुई। पुलिस ने कॉल रिकॉर्ड निकलवाया तो संजीत की बात घटना के दिन राहुल नाम के युवक से होने की जानकारी मिली। राहुल का उसकी बहन से रिश्ता तय हुआ था लेकिन किसी कारण से टूट गया था। इस पर राहुल के खिलाफ बर्रा थाने में रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी।

संजीत अपहरण कांड को लेकर कानपुर में लोगों में आक्रोश है।
संजीत अपहरण कांड को लेकर कानपुर में लोगों में आक्रोश है।