कर्ज लेकर पढ़ाई करने वाले संकट में:यूपी के लाखों छात्रों को नहीं मिली स्कॉलरशिप, सरकार ने लिखा, “फंड की कमी से नहीं दे सकते पैसा”

6 महीने पहलेलेखक: राजेश साहू

ट्वीटर और फेसबुक पर छात्र अपनी स्कॉलरशिप का फॉर्म पोस्ट कर रहे हैं। उस फॉर्म के करंट स्टेटस के सामने अंग्रेजी में लिखा है, "Scholarship Not Sanctioned due to Unavailability of Fund" हिन्दी में इसका मतलब हुआ, "पैसे की कमी की वजह से आपकी स्कॉलरशिप नहीं दी जा सकती।"

फॉर्म के करंट स्टेटस में फंड की वजह से स्कॉलरशिप नहीं देने की बात लिखी गई है। ऐसे छात्रों की संख्या लाखों में है।
फॉर्म के करंट स्टेटस में फंड की वजह से स्कॉलरशिप नहीं देने की बात लिखी गई है। ऐसे छात्रों की संख्या लाखों में है।

ऐसा पोस्ट करने वाले छात्रों की संख्या हजारों में है। यह सभी कॉलेज के छात्र हैं। इसमें ओबीसी और जनरल दोनों वर्ग के हैं। खास यह कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के सारे डाक्यूमेंट को समाज कल्याण विभाग ने पास किया है, लेकिन आखिर में छात्रों को स्कॉलरशिप नहीं मिल सकी। आइए इसके पीछे की वजह जानते हैं। यूपी सरकार के स्कॉलरशिप देने के आधार को समझते हैं।

यूपी सरकार का स्कॉलरशिप देने का आधार क्या है, इसे इन 5 प्वाइंट्स में देखिए

  • यूपी सरकार का समाज कल्याण विभाग तीन तरह के छात्रों को स्कॉलरशिप देता है। प्री-मैट्रिक यानी 9-10 के स्टूडेंट, पोस्ट मैट्रिक यानी 11-12 और पोस्ट मैट्रिक स्टूडेंट।
  • कॉलेजों में पढ़ाई करने वाले छात्रों को स्कॉलरशिप के साथ फीस वापसी भी होती है।
  • प्री मैट्रिक वाले छात्रों के परिवार की इनकम सलाना 1 लाख से कम होनी चाहिए।
  • पोस्ट मैट्रिक वाले छात्रों के परिवार की इनकम 2 लाख से कम होनी चाहिए। एससी-एसटी को 2.5 लाख तक की छूट है।
  • कॉलेज में पढ़ रहे छात्रों को पिछली परीक्षा में एक निश्चित परसेंटेज हासिल करना होगा, जो अलग-अलग वर्ग के आधार पर तय है। विस्तारित जानकारी नीचे दी गई है।

अब हम उस सवाल से इस बात शुरू करते हैं जिसकी चर्चा सबसे अधिक है। ऐसे दो सवाल हैं

सवाल 1:क्या फंड की कमी है
2021-22 सत्र के लिए यूपी सरकार ने 4,204 करोड़ रुपए का बजट जारी किया। इसमें पिछड़े वर्ग के लिए 1,375 करोड़, एससी-एसटी वर्ग के लिए 1,430 करोड़, अल्पसंख्यक वर्ग के लिए 829 करोड़ रुपए और सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए 570 करोड़ रुपए का बजट जारी किया है। इसमें कितना खर्च किया है उसकी जानकारी नहीं है। एक अनुमान के लिए हम पिछले साल के आंकड़े देख सकते हैं।

पिछले साल 26 लाख छात्रों को दिए गए थे 3050 करोड़ रुपए
यूपी स्कॉलरशिप की वेबसाइट के मुताबिक 2020-21 सत्र में यूपी 1.15 करोड़ छात्रों ने स्कॉलरशिप के लिए फॉर्म लिया। 89 लाख ने जमा किया। 77 लाख फॉर्म को कॉलेज ने समाज कल्याण विभाग को भेजा। विभाग ने 39 लाख फॉर्म फाइनल किया लेकिन स्कॉलरशिप 26.47 लाख छात्रों को दी। इसके लिए विभाग ने 3050.68 करोड़ रुपए खर्च किए। इसमें 2217 करोड़ रुपए फीस वापसी के और 833 करोड़ रुपए स्कॉलरशिप के रूप में दिए गए।

यह 2020-21 सत्र के स्कॉलरशिप का डाटा है जो सरकारी वेबसाइट से मिला है।
यह 2020-21 सत्र के स्कॉलरशिप का डाटा है जो सरकारी वेबसाइट से मिला है।

सवाल 2: क्या इस बार अब स्कॉलरशिप नहीं मिलेगी
इस सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया जा सकता है। नियम और पिछले सालों के रिकॉर्ड को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि सरकार अब इस सत्र के लिए कोई बजट नहीं जारी करेगी। इसका एक उदाहरण 31 मार्च 2022 को दिख गया था।

हुआ ये कि जनरल वर्ग के कुल 5.64 लाख छात्रों के लिए सरकार ने 570 करोड़ रुपए का बजट जारी किया था। हालांकि, 3.19 लाख छात्रों को स्कॉलरशिप नहीं मिल सकी। विभाग ने छात्रों के लिए 174 करोड़ के अतिरिक्त बजट की मांग करते हुए सरकार को पत्र लिखा। कोई ध्यान नहीं दिया गया। 31 मार्च की शाम 5 बजे अनुमति दे दी गई।

यहां से अगली तारीख के आने में 7 घंटे बचे थे। ऑफिस के सभी कर्मचारी घर जा चुके थे। इतने कम वक्त में पीएफएमएस सॉफ्टवेयर के जरिए इतने छात्रों को स्कॉलरशिप नहीं भेजी जा सकती थी। इसलिए नहीं भेजी गई। यह पैसा दोबारा सरकार के पास चला गया। चार दिन बाद अफसरों ने माना कि अगर पहले पैसा पास हो जाता तब 1.36 लाख छात्रों को स्कॉलरशिप भेजी जा सकती थी। फिलहाल 15 दिन बीत गए लेकिन किसी तरह का कोई भुगतान नहीं किया गया।

अब इस साल छात्रों के आवेदन की संख्या और सीएम योगी के उस बयान की बात करते हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि दिसंबर तक सबको स्कॉलरशिप मिल जानी चाहिए।

स्कॉलरशिप के लिए मिले 1 करोड़ आवेदन लेकिन पास हुए 55 लाख
2021-21 के सत्र में स्कॉलरशिप के लिए 1,02,65,483 छात्रों ने आवेदन किया। इसमें 87,66,645 छात्रों ने पूरे डॉक्यूमेंट के साथ फॉर्म को जमा किया। संस्थान की तरफ से 78,34,637 छात्रों के फॉर्म को विभाग को समाज कल्याण विभाग भेजा गया। विभाग ने 55 लाख छात्रों को स्कॉलरशिप के लिए एलिजिबल माना। इसमें 9-10वीं, 11-12वीं के अलावा कॉलेजों के छात्र शामिल थे।

स्कॉलरशिप बांटते हुए सीएम योगी ने छात्रा से कहा था स्कॉलरशिप जेब में तो नहीं रख लेती
2 दिसंबर 2021 को सीएम योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में 12 लाख 17 हजार 631 छात्रों के खातों में स्कॉलरशिप भेज दी। इस दौरान उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रिया धोलियान से बात करते हुए पूछा था, "स्कॉलरशिप की राशि जेब में रखकर माता-पिता को परेशान तो नहीं करती?" प्रिया ने हंसते हुए न में जवाब दिया था।

सीएम योगी ने इस दौरान कहा था कि जितने भी छात्रों ने फॉर्म भरा है उन्हें 27 दिसंबर तक स्कॉलरशिप मिल जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। समाज कल्याण विभाग ने कहा 4 जनवरी को प्री मैट्रिक और 6 जनवरी को पोस्ट मैट्रिक छात्रों के खाते में स्कॉलरशिप भेज दी जाएगी। यह भी नहीं हो सका और 8 जनवरी को आचार संहिता लग गई।

2 दिसंबर को सीएम योगी आदित्यनाथ ने 12 लाख छात्रों के खातों में सीधे स्कॉलरशिप भेजी।
2 दिसंबर को सीएम योगी आदित्यनाथ ने 12 लाख छात्रों के खातों में सीधे स्कॉलरशिप भेजी।

सरकार ने बजट बढ़ाया पर छात्रों की संख्या उससे ज्यादा बढ़ गई, वर्ग के आधार पर देखिए

  • यूपी सरकार की स्कॉलरशिप वेबसाइट पर मिले आंकड़ो के अनुसार 39.6 लाख छात्र ओबीसी वर्ग से हैं। इनके लिए 1,375 करोड़ रुपए स्वीकृत किए। पिछले सत्र में सरकार ने ओबीसी वर्ग के लिए 1240 करोड़ रुपए खर्च करते हुए 12,03,475 छात्रों को स्कॉलरशिप दी।
  • जनरल वर्ग के छात्रों की संख्या 5.64 लाख है। इनके लिए 570 करोड़ रुपए का बजट जारी किया गया। पिछले सत्र में जनरल वर्ग के 5 लाख 204 छात्रों को 657 करोड़ रुपए स्कॉलरशिप दी गई थी।
  • इस सत्र में अल्पसंख्यक वर्ग के 6.7 लाख छात्रों के लिए 829 करोड़ रुपए का बजट रखा गया। पिछले साल 1.99 लाख छात्रों को 189 करोड़ रुपए स्कॉलरशिप के रूप में मिले।
  • वेबसाइट पर एससी छात्रों की संख्या 19.3 लाख और एसटी वर्ग के छात्रों की संख्या 19.4 हजार है। इनके स्कॉलरशिप के लिए सरकार ने 2021-22 के बजट में करीब 1100 करोड़ रुपए का बजट जारी किया। पिछले सत्र में एससी के 7.3 लाख छात्रों के लिए 951 करोड़ और एसटी के 8,132 छात्रों को 10 करोड़ रुपए स्कॉलरशिप दी गई थी।

अब बात उनकी जिन्हें स्कॉलरशिप नहीं मिलने से आगे की पढ़ाई प्रभावित होना तय हो गया। हमने ऐसे दो लोगों से बात की।

नंबर 1: इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ मीडिया स्टडीज से मीडिया की पढ़ाई कर रहे प्रदीप यादव ने कहा, हमारी सलाना फीस 43 हजार रुपए है। हमारा परिवार इस फीस को दे सकता है लेकिन हमारे ही क्लास के 10 छात्र ऐसे हैं जिनका परिवार इतनी फीस दे पाने में समर्थ नहीं है। उन सभी को उम्मीद थी की स्कॉलरशिप आएगी, लेकिन नहीं आने पर अब आगे की पढ़ाई मुश्किल लग रही है।

नंबर 2: दीपक केशरवानी अयोध्या के राम मनोहर लोहिया अवध यूनिवर्सिटी से बीटेक कर रहे हैं। उनके चाचा ने 80 हजार रुपए का इंतजाम करके एडमिशन करवाया था। दीपक को उम्मीद थी कि 64 हजार रुपए स्कॉलरशिप आएगी तो अगले साल की 72 हजार फीस इसी से जमा हो जाएगी पर उनकी स्कॉलरशिप नहीं आई। फॉर्म पर फंड की कमी लिख दिया गया।

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में स्कॉलरशिप नहीं मिलने के कारण छात्रों ने कैंपस में प्रदर्शन किया।
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में स्कॉलरशिप नहीं मिलने के कारण छात्रों ने कैंपस में प्रदर्शन किया।

एससी-एसटी छात्रों के लिए अलग नियम हैं इसलिए इन्हें मिलती है पूरी स्कॉलरशिप
एससी और एसटी वर्ग के छात्रों के लिए 2020-21 सत्र से स्कॉलरशिप प्रोग्राम में बदलाव कर दिया गया। उसकी पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप और फीस प्रतिपूर्ति का पैसा 40% राज्य सरकार और 60% केंद्र सरकार देने लगी। पहले 90% पैसा राज्य और 10% पैसा केंद्र सरकार देती थी। नियम बदल जाने के कारण उन्हें दो बार में स्कॉलरशिप मिलती है। पहले राज्य सरकार भेजती है फिर केंद्र सरकार अपने हिस्से का भेजती है।

सरकार ने स्कॉलरशिप देने के लिए दो नियम और लगा दिए
योगी सरकार ने स्कॉलरशिप लेने वाले छात्रों के लिए विश्व विद्यालयों में 75% अटेंडेंस अनिवार्य कर दिया। पहले इसे बायोमिट्रिक करने की कोशिश की गई फिर इसे आधार बेस अटेंडेंस किया गया। लेकिन यूपी के किसी भी कॉलेज में यह नियम चल नहीं पाया। नतीजा ये रहा कि अटेंडेस रजिस्टर पर ही लगती और उसे स्कॉलरशिप पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाता था।

दूसरा नियम रिजल्ट परसेंटेज का था। यह हर वर्ग के लिए अलग है। एससी-एसटी वर्ग के लिए पिछले साल तक यह 60% था लेकिन 2021-22 सत्र के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसे 50% कर दिया। ओबीसी और जनरल वर्ग के लिए पहले यह 65% तय था। पिछले सत्र में इसे 60 और फिर अब 55% कर दिया गया। खास बात यह कि ये मानक स्थाई नहीं हैं। सरकार अपनी सुविधा के अनुसार इसे बदलती रहती है। बदलने की एक बड़ी वजह छात्रों का आंदोलन भी है।

आखिर में सरकार और अधिकारियों की बात
यूपी सरकार के नए समाज कल्याण विभाग के मंत्री पूर्व आईपीएस असीम अरुण को कन्नौज में एबीवीपी के प्रांत मंत्री विक्रांत अग्निहोत्री ने ज्ञापन सौंपा। स्कॉलरशिप नहीं मिलने से छात्रों को हो रही परेशानी बताया। मंत्री जी ने समस्या पर ध्यान देने का आश्वासन दिया

एबीवीपी के छात्रनेताओं ने समाज कल्याण विभाग के मिनिस्टर असीम अरुण को ज्ञापन सौंपकर मदद की मांग की।
एबीवीपी के छात्रनेताओं ने समाज कल्याण विभाग के मिनिस्टर असीम अरुण को ज्ञापन सौंपकर मदद की मांग की।

दूसरी तरफ यूपी स्कॉलरशिप की वेबसाइट पर समाज कल्याण विभाग से जुड़े चार नंबर दिए गए हैं। पहला नंबर संयुक्त निदेशक पीके त्रिपाठी का है। वह अक्सर व्यस्त बताता है। पिछड़ा वर्ग के लिए निर्धारित उप निदेशक अजित प्रताप सिंह और अल्पसंख्यक वर्ग के लिए राघवेंद्र प्रताप सिंह का नंबर वेबसाइट पर है लेकिन दोनों पर ही फोन नहीं लगते। इसके अलावा दो टोल फ्री नंबर हैं जो अक्सर व्यस्त रहते हैं।