मां यशोदा की रसोई से निकले पेड़े का सीक्रेट:2 महीने तक खराब नहीं होता मथुरा का पेड़ा, नेहरू-अटल भी थे स्वाद के दीवाने

मथुरा6 महीने पहलेलेखक: आशीष उरमलिया और देवांशु तिवारी

19 अगस्त यानी आज श्रीकृष्ण का जन्मदिन है। जन्माष्टमी से पहले भगवान कृष्ण को चढ़ने वाले महाभोग की तैयारियां एक दिन पहले से शुरू हो गई। महा प्रसाद में सबसे मुख्य होता है मथुरा का पेड़ा। वैसे तो पेड़ा मथुरा में बनाई जाने वाली एक कॉमन मिठाई है, लेक‍िन इसके जन्म की कहानी भगवान श्री कृष्‍ण से जुड़ी हुई है।

मथुरा-वृंदावन में जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले लोग पेड़ा खाकर ही व्रत तोड़ते हैं। यहां हर साल करीब 12 करोड़ के पेड़े बिक जाते हैं। बांके बिहारी की गलियों से गुजरते हुए पेड़े की सौंधी खुशबू आपको ललचा सकती है। चलिए आपको पेड़े की दुनिया में ले चलते हैं...

शुरुआत द्वापर युग में बने पहले पेड़े से...

भगवान कृष्ण को माखन और मिश्री बहुत पसंद था। इसके अलावा उन्हें खीर, मीठा हलवा, लड्डू और पेड़े का भोग अतिप्रिय है।
भगवान कृष्ण को माखन और मिश्री बहुत पसंद था। इसके अलावा उन्हें खीर, मीठा हलवा, लड्डू और पेड़े का भोग अतिप्रिय है।

वृंदावन के कुंज बिहारी मंदिर के महंत स्वामी कृष्णानंद कहते हैं, "मथुरा के पेड़े द्वापर युग का एक किस्सा काफी प्रचलित है। ये किस्सा यहां के सभी हलवाइयों को रटा हुआ है। एक बार भगवान कृष्ण के लिए मां यशोदा दूध उबाल रही थीं। लेकिन बीच में उन्हें कोई जरूरी काम याद आ गया और वो रसोई छोड़कर चली गईं। जब वे वापस आईं तो दूध उबलते-उबलते गाढ़ा हो गया था।"

यशोदा ने गाढ़े हो चुके दूध में चीनी मिलाकर उसे गोल पेड़े जैसा बना दिए और कृष्ण को खिलाया। ये मिठाई नन्हे कान्हा को खूब पसंद आई। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज भी भगवान के जन्म पर चढ़ने वाले छप्पन भोग में पेड़े को जरूर शामिल किया जाता है।

चलिए दोबारा 2022 के पेड़े के जायके पर लौटते हैं…

वृंदावन के राधे श्याम मिठाई वाले ने जन्माष्टमी के सीजन में 2 लाख रुपए से ज्यादा के पेड़े बेचे हैं।
वृंदावन के राधे श्याम मिठाई वाले ने जन्माष्टमी के सीजन में 2 लाख रुपए से ज्यादा के पेड़े बेचे हैं।

वृंदावन में सबसे पुरानी पेड़े की दुकान राधे श्याम हलवाई की है। 1921 में उन्होंने पेड़ा बनाने का काम शुरू किया। आज तक उनके वंशजों की चौथी पीढ़ी इस व्यवसाय को आगे बढ़ा रही है। दुकान के मालिक ने गौरव अग्रवाल कहते हैं, "मथुरा के पेड़े की एक खासियत है कि इन्हें बनाने के लिए दूध को तब तक पकाया जाता है, जब तक कि वो लाल न पड़ जाए। इसके दो फायदे होते हैं। पहला: पेड़े का स्वाद बढ़ जाता है। दूसरा: पेड़ा 50 से 60 दिनों तक खराब नहीं होता।"

तीन तरह के होते हैं मथुरा के पेड़े

1. इलायची पेड़ा

इलायची पेड़ा का रेट 320 रुपए किलो से लेकर 400 रुपए किलो है।
इलायची पेड़ा का रेट 320 रुपए किलो से लेकर 400 रुपए किलो है।

बांके बिहारी के प्रसाद में इलायची पेड़ा सबसे ज्यादा चढ़ता है। गाय के दूध से ही ये पेड़ा तैयार किया जाता है। ये पेड़ा दूध को तेज आंच में पकाकर बनाया जाता है। इसलिए इसका रंग भूरा होता है। इस पेड़े में शक्कर का कम इस्तेमाल होता है, इसलिए डायबिटीज के मरीज भी खा सकते हैं।

2. पिस्ता पेड़ा

पिस्ता पेड़ा 300 से 450 रुपए किलो तक बेचा जाता है।
पिस्ता पेड़ा 300 से 450 रुपए किलो तक बेचा जाता है।

पिस्ता पेड़ा गाय और भैंस के मावे से तैयार किया जाता है। इस पेड़े में पिस्ता पीसकर डाला जाता है और तैयार होने के बाद इसे हरे पिस्ते के बुरादे से सजाया जाता है। इस पेड़े में इलायची पेड़े की तुलना में ज्यादा शक्कर डाली जाती है। ये पेड़ा राधा रानी का प्रिय पेड़ा है।

3. मलाई पेड़ा

मलाई पेड़े के रेट 450 रुपए से लेकर 500 रुपए किलो है।
मलाई पेड़े के रेट 450 रुपए से लेकर 500 रुपए किलो है।

मलाई पेड़ा भगवान कृष्ण को चढ़ाए जाने वाले छप्पन भोग का मुख्य हिस्सा है। यह पेड़ा जन्माष्टमी में खास तौर पर तैयार किया जाता है। इसे बनाने में केवल मावा और मलाई का प्रयोग होता है। इसका रंगा सफेद होता है और इसका दाम भी दूसरे पेड़ों से ज्यादा रहता है।

यहां तक आपने मथुरा के पेड़े का इतिहास और वेराइटी के बारे में जाना। आइए अब ग्राफिक के जरिए इसके बनने की प्रक्रिया को जानते हैं...

नेपाल से लेकर अमेरिका तक मथुरा के पेड़े की डिमांड
मथुरा का पेड़े की सिर्फ यूपी में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी डिमांड है। मथुरा के मिठाई व्यापारी गिरधारी लाल कहते हैं,"कोरोना काल में मथुरा के पेड़े का कारोबार घट गया था। लेकिन बीते 2 साल में फिर से डिमांड बढ़ रही है। यूपी सरकार की ODOP यानी 'एक जनपद-एक उत्पाद' योजना से भी पेड़े के कारोबार में फायदा हुआ है। इसकी डिमांड सिर्फ यूपी तक सीमित नहीं है। नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, दुबई और यहां तक कि अमेरिका से भी मथुरा के पेड़े की डिमांड आती रहती है। इसका सालाना कारोबार 10 से 15 करोड़ रुपए का है। "