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मोदी कैबिनेट में UP का सत्ता समीकरण:मोदी की टीम में उत्तर प्रदेश से 7 नए चेहरे; अब कुल 16 केंद्रीय मंत्री, टारगेट राज्य में सियासी-जातीय समीकरण साधना

नई दिल्ली16 दिन पहले
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार शाम अपने मंत्रिमंडल का मेगा विस्तार किया। मोदी के नए मंत्रिमंडल में यूपी से 7 नए चेहरों को शामिल किया गया। अब उत्तर प्रदेश से टीम मोदी में 16 लोग शामिल हो गए हैं। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की मैनेजमेंट को लेकर काफी फजीहत हुई है। साथ ही मोदी की इमेज को लेकर भी सवाल उठे हैं।

अब कैबिनेट की सर्जरी करने के पीछे मोदी और भाजपा का टारगेट इस इमेज को सुधारना है। साथ ही यूपी सरकार की गवर्नेंस को ठीक करना है। वजह अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव हैं, जिनमें भाजपा किसी तरह के नुकसान से बचना चाहती है। यूपी में सत्ता के लिए 7 चेहरों पर दांव...

1. अनुप्रिया पटेल: वाराणसी से लगी मिर्जापुर लोकसभा सीट से सांसद अनुप्रिया कुर्मी चेहरा हैं। उनका पूर्वी यूपी और बुंदेलखंड पर अच्छा प्रभाव है और यहां पर कुर्मी वोट भी अच्छी खासी संख्या में हैं। अपना दल (S) की अध्यक्ष अनुप्रिया भाजपा की सहयोगी हैं और उनकी कैबिनेट में मौजूदगी से बुंदेलखंड इलाके में NDA को फायदा होगा।

2. बीएल वर्मा: भाजपा से राज्यसभा सांसद हैं। कल्याण सिंह की सक्रिय राजनीति में गैरमौजूदगी के चलते ही भाजपा उन्हें लोधी चेहरे के तौर पर आगे बढ़ा रही है। मध्य उत्तर प्रदेश में ये वोट विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकते हैं।

3. एसपी सिंह बघेल: आगरा से सांसद हैं। वे कभी मुलायम सिंह यादव के सबसे करीबी माने जाते थे। लेकिन, 2017 में अमित शाह उन्हें भाजपा में लेकर आए थे। एससी कोटे से आने वाले एसपी सिंह पाल-बघेल वोट बैंक पर पकड़ रखते हैं।

4. कौशल किशोर: शाह के ही करीबी माने जाते हैं और कोरोना काल में यूपी सरकार के खिलाफ मुखर भी रहे। मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश में एससी वोट पर उनकी पकड़ है। उन्हें कैबिनेट में शामिल करना और एससी वोट को और बढ़ाना भाजपा का टारगेट है।

5. पंकज चौधरी: महाराजगंज से सांसद पंकज चौधरी कुर्मी बिरादरी से हैं। 6 बार सांसद रह चुके हैं और गोरखपुर से सटे महाराजगंज इलाके में उनकी पकड़ काफी मजबूत है। कुर्मी समुदाय से आने वाले संतोष गंगवार से इस्तीफा ले लिया गया है। ऐसे में मोदी सरकार को उनकी जगह एक चेहरा चाहिए था।

6. भानु प्रताप वर्मा: जालौन लोकसभा सीट से सांसद हैं और बुंदेलखंड में अच्छा प्रभाव रखते हैं। एससी वोट बैंक पर उनकी पकड़ है। कोरी समाज से आते हैं और जालौन से पांचवीं बार सांसद बने हैं।

7. अजय मिश्र टेनी: मध्य यूपी के लखीमपुर खीरी से लोकसभा सांसद हैं। दूसरी बार सांसद बने हैं। ब्राह्मण वोट बैंक को साधने के लिए उन्हें कैबिनेट में जगह दी गई है। ब्राह्मण चेहरे के तौर पर उन्हें आगे बढ़ाया जा रहा है।

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