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झांसी में लॉकडाउन फेज-4 / अपनों से दूर रहकर श्रमिकों की थर्मल स्क्रीनिंग में जुटा है नर्सिंग स्टाफ, बोले- घर जाने पर बच्चों के सम्पर्क में आने से पहले खुद को करते हैं सैनिटाइज

दूसरे राज्यों से झांसी की सीमा में प्रवेश करने वाले प्रवासी श्रमिकों की जांच करता मेडिकल स्टॉफ। दूसरे राज्यों से झांसी की सीमा में प्रवेश करने वाले प्रवासी श्रमिकों की जांच करता मेडिकल स्टॉफ।
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दूसरे राज्यों से झांसी की सीमा में प्रवेश करने वाले प्रवासी श्रमिकों की जांच करता मेडिकल स्टॉफ।दूसरे राज्यों से झांसी की सीमा में प्रवेश करने वाले प्रवासी श्रमिकों की जांच करता मेडिकल स्टॉफ।

  • यूपी-एमपी बार्डर पर नर्सिंग स्टाफ को लगाया गया है जो दूसरे राज्यों से आने वाले श्रमिकों की स्क्रीनिंग कर रही हैं
  • यहां आने वाले श्रमिकों का डॉक्टरों के दिशा निर्देश पर जांच करने के बाद आवश्यक ट्रीटमेंट किया जा रहा है

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 01:33 PM IST

झांसी. उत्तर प्रदेश में झांसी के यूपी-एमपी सीमा से लगातार प्रवासी मजदूरों का जत्था गुजर रहा है। जनपद में इन दिनों 45 डिग्री से ऊपर तापमान बना हुआ है। यहां से गुजरने वाले कई प्रवासी मजदूर हर रोज बीमार हो रहे हैं। ऐसे में यहां हर रोज 12 घंटे ड्यूटी करने वाले मेडिकल स्टाफ के कर्मचारी उनकी जांच करने में जुटे हुए हैं। वो हर दिन सैकड़ों मजदूरों का इलाज कर रहे हैं। यही स्वास्थ्य कर्मी जब ड्यूटी समाप्त होने के बाद अपने घर जाते हैं तो उन्हें कुछ देर अपनों से दूर रहना पड़ता है।

जनपद के रक्सा थाना क्षेत्र स्थित बॉर्डर पर ड्यूटी करने वाली स्टाफ नर्स अंजू यादव ने कहा कि उनकी ड्यूटी यहां एक सप्ताह से चल रही है। वो हर रोज यहां सैकड़ों मरीजों का चेकअप कर रहीं हैं। डॉक्टर के दिशा निर्देश पर बीमार प्रवासी मजदूरों का आवश्यक ट्रीटमेंट किया जा रहा है। उनकी एक बेटी है। जब अंजू ड्यूटी पर आती हैं तो बेटी घर पर अकेली रहती है। ड्यूटी समाप्त होने के बाद जब वे घर जाती हैं। तो कुछ देर अपनी बेटी से दूरी बना कर रखती है। अंजू अपने आप को पूर्ण रूप से सैनिटाइज करने के 30 मिनट बाद ही बेटी के संपर्क में आती हैं।

घर जाने पर सैनिटाइज होने के बाद ही बच्चों के सम्पर्क में आते हैं
ड्यूटी पर लगे दूसरे कर्मचारी फार्मासिस्ट पवन कहते हैं कि यहां बीमार पड़ने वाले लोगों के लिए हर रोज जरूरी दवाएं उपलब्ध कराई जा रहीं है। ड्यूटी ऑफ होने के बाद जब हम घर जाते हैं तो जरूरी सामान को सैनिटाइज करने के अलावा कपड़े धुलते हैं और नहाने के बाद ही अपने बच्चों के संपर्क में आते हैं।

टीम इंचार्ज डॉ शशि बाला चौधरी कहतीं है- मैं और मेरे पति दोनों ही डॉक्टर हैं। घर पर जाने के बाद मैं कोरोना संक्रमण को लेकर सुरक्षा के सारे नियम अपनाती हूं। लेकिन हमारे घर ऐसा माहौल नहीं रहता जैसे कि कोरोना संक्रमण कोई नई चीज हो।

वहीं, अपर शोध अधिकारी डॉक्टर भदौरिया का कहना है कि हमारी पूरी टीम एक सप्ताह से बॉर्डर पर गुजरने वाले प्रवासी मजदूरों की निगरानी में लगी है। हर प्रवासी मजदूर कि यहां पर जांच हो रही है।यदि किसी में कोरोना संक्रमण के लक्षण पाए जाते हैं तो उसे क्वारैंटाइन कर दिया जाता है। जिन प्रवासी मजदूरों में सामान्य बीमारियां होती हैं उनका इलाज किया जा रहा है।


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