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लॉकडाउन के बीच बेबसी:मालगाड़ी, बाइक, पैदल और नदी पार की, 980 किमी का सफर करके भी अपनी मां को आखिरी बार नहीं देख सका जवान

मिर्जापुर2 वर्ष पहले
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जवान संतोष यादव ने बताया कि मां की यादों के सहारे रास्ते में आईं दुश्वारियों का पता ही नहीं चला। लेकिन यह मलाल रहेगा कि उनसे मिल नहीं पाया। - Dainik Bhaskar
जवान संतोष यादव ने बताया कि मां की यादों के सहारे रास्ते में आईं दुश्वारियों का पता ही नहीं चला। लेकिन यह मलाल रहेगा कि उनसे मिल नहीं पाया।
  • छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की 15वीं बटालियन में तैनात जवान अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए 4 दिन और 3 रात का सफर तय करके मिर्जापुर पहुंचा
  • लॉकडाउन की वजह से पिता बेटे के पहुंचने की उम्मीद छोड़ चुके थे, इसलिए उसके पहुंचने से पहले ही मां का अंतिम संस्कार कर दिया था

मिर्जापुर. कोरोनावायरस के खिलाफ छिड़ी जंग में देश 3 मई तक के लिए लॉकडाउन है। इसकी लोगों को कीमत भी चुकानी पड़ रही हैं। छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के एक जवान संतोष यादव को भी ऐसा ही कुछ सहना पड़ा। यह जवान लॉकडाउन की वजह से अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सका।

जवान की तैनाती राज्य के नक्सल इलाके बीजापुर में थी। उसे मां की मौत की खबर मिली तो वह उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के लिए पैदल ही निकल पड़ा। रास्ते में उसने नदी पार करने के साथ ही मालगाड़ी और बाइक की मदद से 980 किलोमीटर का सफर तय किया। लेकिन जब तक वह गांव पहुंचा तब तक मां का अंतिम संस्कार हो चुका था। 

जवान 15 किलो लगेज लेकर घर से पैदल निकला

मूल रूप से मिर्जापुर के रहने वाला जवान संतोष को पांच अप्रैल को सुबह मां राजेश्वरी के बीमार होने की खबर आई। उन्हें इलाज के लिए वाराणसी ले जाया गया। लेकिन मौत हो गई। जवान को जैसे ही यह खबर मिली। वह पैदल ही मिर्जापुर के लिए निकल पड़ा। वह 4 दिन और तीन रात तक सफर करता रहा। इसकी शुरुआत उसके घर से हुई। 7 अप्रैल को सुबह धनौरा स्थित बटालियन से उसके सहकर्मी मित्र ने अपनी बाइक से बीजापुर छोड़ा। बीजापुर से जगदलपुर की 160 किलोमीटर की यात्रा धान लेकर जा रहे ट्रक से पूरी की। इसके बाद वह रायपुर पहुंचा और यहां से मालगाड़ी में सवार होकर उत्तर प्रदेश के चुनार पहुंचा। यहां एक बाइक सवार ने उसे गांव के करीब छोड़ा। इसके बाद वह गंगा नदी पार करके अपने गांव पहुंचा। इतनी जद्दोजहद के बाद भी वह आखिरी बार मां का चेहरा नहीं देख सका। 

जवान ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से सफर में कई मुश्किलें आईं। लेकिन मां की यादों के सामने सारी दुश्वारियों कटती गईं। जवान के इस जज्बे को देखकर गांववालों का दिल भी भर आया।