पालघर मॉब लिंचिंग:स्वामी कल्पवृक्ष गिरि भदोही के रहने वाले थे, परिजन बोले- दोषियों को कड़ी सजा दी जाए

भदोही2 वर्ष पहले
जूना अखाड़े के संत कल्पवृक्ष महाराज जूना अखाड़े के संत थे।- फाइल
  • ज्ञानपुर कोतवाली क्षेत्र के वेदपुर गांव में रहता है संत कल्पवृक्ष का परिवार
  • मौत की खबर से गांव में शोक का माहौल, घटना को लेकर आक्रोश

महाराष्ट्र के पालघर में पांच दिन पहले जूना अखाड़े के जिन दो संतों की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी, उनमें एक कल्पवृक्ष गिरि महाराज (65) उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के वेदपुर गांव के रहने वाले थे। उन्होंने महज 10 साल की आयु में घर छोड़कर संन्यास ले लिया था। सोशल मीडिया के जरिए जब कल्पवृक्ष की हत्या की खबर मिली तो सभी परिजन और गांववासी शोक में डूब गए। संत के भाई ने दोषियों को कड़ी सजा दिए जाने की मांग की।

पालघर में रहने वाले भाई ने किया अंतिम संस्कार

संत कल्पवृक्ष गिरी यहां ज्ञानपुर कोतवाली क्षेत्र के वेदपुर गांव निवासी चिंतामणि तिवारी के पुत्र थे। सन्त को परिवार के द्वारा कृष्णचंद्र तिवारी नाम दिया गया था। वे 10 वर्ष की आयु में अचानक गायब हो गए। बाद में सन्त-महात्माओं के साथ जूना अखाड़ा में जाकर सन्त हो गए। लॉकडाउन के चलते भदोही में रहने वाले उनके परिजन महाराष्ट्र नहीं जा पाए। पालघर में रहने वाले उनके भाई दिनेशचंद्र ने पोस्टमाॅर्टम के बाद शव को नाशिक के त्र्यंबकेश्वर नाथ में समाधि दिलाई।

नासिक में संत थे, परिजनों को परिचतों ने सूचना दी थी

सन्त के छोटे भाई राकेशचंद्र तिवारी ने बताया कि लगभग 30 वर्ष पहले नासिक के जोगेस्वरी मंदिर में एक भंडारे में उनके कुछ परिचित गए थे। उन्होंने ही महाराज के वहां होने की सूचना घर वालों को दी थी। इसके बाद घर के लोगों ने वहां जाकर उनसे मुलाकात की और वापस आने के लिए काफी मनाया। लेकिन उन्होंने आने से मना कर दिया था। परिजन ने मांग की है कि इस मामले में जो लोग दोषी हैं, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

क्या है मामला?
बीते 16 अप्रैल को महाराष्ट्र के पालघर के गड़चिनचले गांव में दो साधुओं समेत तीन की पीट-पीटकर हत्‍या कर दी गई थी। यह पूरी घटना वहां मौजूद कुछ पुलिसकर्मियों के सामने हुई। आरोपियों ने साधुओं के साथ पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया। इसके बाद साधुओं को अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। वैन चालक दोनों साधुओं को लेकर कांदिवली से सूरत जा रहा था। वहां एक अंतिम संस्कार में शामिल होना था। उन्होंने वैन किराए पर ली थी। लॉकडाउन के बीच वे 120 किमी का सफर तय कर चुके थे। गड़चिनचले के पास वन विभाग के एक संतरी ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद तीनों की निर्मम हत्या कर दी गई।