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किन्नरों का तर्पण:वाराणसी में किन्नर अखाड़े ने किया त्रिपिंडी श्राद्ध; कोरोना से मरे लोगों की मुक्ति के लिए भी की कामना

वाराणसी4 दिन पहले
वाराणसी में बुधवार को किन्नर अखाड़े ने महामंडले​​​​​​​श्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की अगुवाई में अकाल मृत्यु का शिकार हुए पूर्वजों के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध किया गया। इ
  • काशी में पिशाच मोचन कुंड किया गया सामूहिक पिंडान
  • महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण के सानिध्य में दर्जनों किन्नर धर्म गुरु भी हुए शामिल

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में पितृ पक्ष के मौके पर लोग पिशाच मोचन पर पितरों के तर्पण के लिए आ रहे हैं। इसी क्रम में बुधवार को किन्नर अखाड़े ने महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की अगुवाई में अकाल मृत्यु का शिकार हुए पूर्वजों के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध किया गया। इसके साथ ही उनके लिए भी तर्पण किया गया, जो कोरोना काल में महामारी से मर गए। इस आयोजन में अलग-अलग राज्यों से आए किन्नर अखाड़े के संतों-आचार्यों ने हिस्सा लिया।

अलग-अलग राज्यों से किन्नरों ने श्राद्ध कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
अलग-अलग राज्यों से किन्नरों ने श्राद्ध कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

किन्नर अखाड़े की प्रमुख व महामंडलेश्वर आचार्य पंडित लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने बताया कि, 2015-16 से जब से धर्म की गद्दी पर बैठी हूं, तब से धर्म का कार्य किन्नर समाज के लिए हो रहा है। हर दूसरे साल सामूहिक पिंडदान और त्रिपिंडी श्राद्ध किया जाता है। इस बार कोरोना में मरे लोगो की मुक्ति के लिए भी कर्मकांड किया गया।

अज्ञात पूर्वजों के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध होता है।
अज्ञात पूर्वजों के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध होता है।

काशी को मोक्ष की नगरी, यहां पहली बार तर्पण

लक्ष्मी ने कहा कि, काशी में प्राण त्यागने वाले हर इन्सान को भगवन शंकर खुद मोक्ष प्रदान करते हैं। मगर जो लोग काशी से बाहर या काशी में अकाल मृत्यु में अपने प्राण त्यागते हैं, उनको भी मोक्ष प्रदान होता है। यही वजह रही की मोक्ष की नगरी काशी में मुगलकाल के बाद अब पहली बार समाज से उपेक्षित किन्नर समाज ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिशाच मोचन कुंड पर पिंडदान और श्राद्ध किया।

21 ब्राह्मणों ने कराया अनुष्ठान।
21 ब्राह्मणों ने कराया अनुष्ठान।

21 ब्राह्मणों ने कराया तर्पण

पिशाच मोचन कुंड के महंत मुन्ना पाण्डेय के नेतृत्व में 21 ब्राह्मणों के द्वारा अब तक मृत हो चुके सभी किन्नरों का सामूहिक पिंड दान किया गया। महंत ने बताया की ये कार्यक्रम हजारों वर्षों से समाज में उपेक्षित पड़े हुए किन्नर समाज अपने पूर्वजों का श्राद्ध के लिए के लिए जो की कभी परम्परागत हुआ ही नहीं वो आज काशी के पिशाच मोचन पर पितृपक्ष के मातृ नवमी पर यहां उपस्थित है।

श्राद्ध के लिए जुटे किन्नर।
श्राद्ध के लिए जुटे किन्नर।
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