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राजीव और सोनिया गांधी की लव-स्टोरी 2:इंदिरा से पहली बार मिलीं सोनिया तो पैर कांप रहे थे; उनकी ड्रेस फट गई तो पीएम ने खुद सिली

8 महीने पहलेलेखक: राजेश साहू

जनवरी 1965 में कैंब्रिज कॉलेज में सोनिया गांधी और राजीव गांधी मिले। दोनों में प्यार हो गया। अब सवाल था कि इस प्यार को घर पर कैसे बताया जाए? सोनिया को भरोसा था कि मां तो मान जाएंगी पर पिता नहीं मानेंगे। इधर राजीव को भरोसा था कि लाल बहादुर शास्त्री सरकार में नई-नई मंत्री बनी मां इंदिरा गांधी सोनिया गांधी को अपना लेंगी। कहानी इतनी आसान नहीं थी।

राजनीति के किरदार और किस्से सीरीज में आज राजीव-सोनिया की लव स्टोरी को शादी तक पहुंचने में आई दिक्कतों को जानेंगे। लव स्टोरी की पहली कहानी आप यहां पढ़ सकते हैं..

पहली मुलाकात में सोनिया को अपना परिचय नहीं दे सके थे राजीव

राजीव ने मां को पत्र लिखकर बताया मुझे वो लड़की मिल गई जिससे शादी करूंगा
21 साल के राजीव ने जुलाई 1965 में सोनिया गांधी को लेकर पहली बार मां इंदिरा गांधी को पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने लिखा, "आप मुझसे यहां मिलने वाली लड़कियों के बारे में हमेशा पूछा करती हैं कि मैं यहां किसी से मिला या नहीं। मैं आपको बताना चाहता हूं कि ऐसी ही एक खास लड़की से मेरी मुलाकात हुई है, अभी उससे पूछा तो नहीं है पर यही वह लड़की है जिससे मैं शादी करना चाहूंगा।"

राजीव ने सोनिया से मुलाकात के डेढ़ महीने बाद पहली बार अपनी मां इंदिरा गांधी को पत्र लिखा।
राजीव ने सोनिया से मुलाकात के डेढ़ महीने बाद पहली बार अपनी मां इंदिरा गांधी को पत्र लिखा।

इंदिरा ने राजीव से कहा, जरूरी नहीं जिससे मिलो वह सबसे बेहतर ही हो
राजीव का पत्र पढ़ने के बाद इंदिरा ने जवाबी पत्र में लिखा, "यह जरूरी नहीं कि आप जीवन में जिस पहली लड़की से भेंट करें वही आपके लिए सबसे बेहतर हो।" इंदिरा गांधी इस पत्र के जरिए अपने 21 साल के बेटे का जुनून कम करना चाहती थीं। उन्हें यह भी पता था कि राजीव की पसंद ऐसी नहीं हो सकती जिसे पहली नजर में खारिज किया जा सके।

इंदिरा गांधी का पत्र पढ़कर राजीव चिंतित हो गए, लेकिन सोनिया से प्यार कम नहीं हुआ। मां को दोबारा पत्र भेजा और लिखा, "आप कैसे कह सकती हैं कि आपको इससे बेहतर मिल जाएगी? सोनिया पहली ऐसी लड़की हैं जिसके साथ मैं घूमने निकला। मुझे पूरा यकीन है कि मैं उससे प्यार करने लगा हूं।" इंदिरा समझ गई कि बेटे को समझाना आसान नहीं। इसलिए उन्होंने अगले पत्र में कह दिया, मैं जल्द ही लंदन दौरे पर आ रही हूं। उस लड़की से मिलना चाहती हूं।

इंदिरा गांधी समझ गई थी कि राजीव को सोनिया से प्यार हो गया है। इस फोटो में इंदिरा के बाएं साइड संजय और दाएं साइड राजीव हैं।
इंदिरा गांधी समझ गई थी कि राजीव को सोनिया से प्यार हो गया है। इस फोटो में इंदिरा के बाएं साइड संजय और दाएं साइड राजीव हैं।

राजीव ने सोनिया को इंदिरा गांधी से मुलाकात की बात बताई तो सोनिया डर गई। वह साहस ही नहीं जुटा पा रही थी कि अपने घर पर कैसे बताऊं।

शीशे के सामने खड़ी होकर प्रैक्टिस करने लगी थी सोनिया
जुलाई 1965 में राजीव और सोनिया पहली बार अलग हुए। सोनिया अपने घर इटली के लुसियाना पहुंची। उन्हें तूरीन बिजनेस फेस्टिवल में दुभाषिए की नौकरी मिल गई। सोनिया को भरोसा हो गया कि वह अब अंग्रेजी अच्छा लिख और बोल लेती हैं। पिता स्टीफेनो खुश थे कि बेटी को बाहर पढ़ाना सफल हो रहा। सोनिया के दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था। वह राजीव के बारे में घर कैसे बताए इसके लिए शीशे के आगे प्रैक्टिस करती।

एकदिन हिम्मत दिखाते हुए सोनिया मम्मी-पापा के सामने खड़ी हुई। राजीव से मुलाकात के बारे में सब बता दिया। आखिर में कहा, "मैं राजीव से प्यार करने लगी हूं।" मां ओला मायनो ने पूछा, "लड़के की उम्र क्या है?" सोनिया ने कहा, "21 साल।" ओला मायनों ने कहा, लड़का तो कम उम्र का है, ऊपर से दूसरे देश का है। इतना कहते हुए उन्होंने स्टीफेनो की तरफ देखा। उन्होंने कोई उत्साह नहीं दिखाया। ऐसा रिएक्ट किया जैसे सोनिया को कोई दौरा पड़ा हो और कुछ देर में ठीक हो जाएगी।

सोनिया के पिता नहीं चाहते थे कि वह राजीव से दोबारा मिले
सोनिया गांधी की जीवनी द रेड साड़ी लिखने वाली जेवियर मोरो लिखती हैं, "स्टीफेनो नहीं चाहते थे कि सोनिया दोबारा कैंब्रिज जाएं। वह कहते सोनिया ने जरूरी अंग्रेजी सीख ली। दूसरी तरफ सोनिया कहती, एक साल और पढ़ लूंगी तो बेहतर होगा। मां ने सोनिया का साथ दिया। सोनिया फिर से कैंब्रिज पहुंच गईं।"

सोनिया के पिता स्टीफेनो नहीं चाहते थे कि सोनिया की शादी राजीव से हो। वह बेटी के भारत जाने को लेकर चिंतित थे।
सोनिया के पिता स्टीफेनो नहीं चाहते थे कि सोनिया की शादी राजीव से हो। वह बेटी के भारत जाने को लेकर चिंतित थे।

इंडियन एंबेसी की सीढ़िया चढ़ते हुए सोनिया के पैर कांप रहे थे
नवबंर 1965, राजीव गांधी सोनिया के साथ कैंब्रिज कॉलेज से इंडियन एंबेसी के लिए निकले।वहां एक रिसेप्शन पार्टी थी जिसमें इंदिरा गांधी मौजूद थी। सोनिया पूरे रास्ते राजीव से अजीब सवाल करती रहीं, कैसे मिलूंगी? क्या कहूंगी? मैं कुछ गलत बोल दी तो? उन्होंने डांट लगा दी, तो? राजीव लगातार समझाते रहे। आखिर में कहा, फालतू की बात मत करो, सब सही होगा।

गाड़ी से उतरकर सोनिया सीढ़िया चढ़ने लगी तो पांव कांप रहे थे। उन्होंने राजीव का हाथ थामा और कहा, माफ करना हम अंदर नहीं जा पाएंगे। राजीव ने सोनिया को संभाला और अंदर ले गए। रेशमी साड़ी पहने इंदिरा गांधी सोनिया को देखते ही समझ गई कि वह डरी हुई है, इसलिए उन्होंने सहज होने का अवसर दिया। सोनिया बेहतर फील करे इसलिए इंदिरा ने फ्रेंच में बात की। थोड़ी ही देर में सोनिया सहज हो गई।

सोनिया का ड्रेस फटा तो इंदिरा ने सिल दिया
राजीव और सोनिया को किसी पार्टी में जाना था। सोनिया ड्रेस बदलकर बाहर निकलीं तभी ड्रेस पैर में फंस गया और सिलाई उखड़ गई। इंदिरा गांधी ने खुद ही ड्रेस को पकड़ा। धागे और सुई से उसकी सिलाई कर दी। यह वाकया सोनिया गांधी को बहुत प्रभावित कर गया। उनके अंदर जो थोड़ा बहुत डर था वह भी खत्म हो गया।

इंदिरा गांधी से मिलते वक्त सोनिया के दिमाग में यही बात चल रही थी कि अगर वह कठोर शब्दों का प्रयोग करती हैं तो उसका जवाब क्या देंगी।
इंदिरा गांधी से मिलते वक्त सोनिया के दिमाग में यही बात चल रही थी कि अगर वह कठोर शब्दों का प्रयोग करती हैं तो उसका जवाब क्या देंगी।

प्यार के चक्कर में राजीव सभी विषयों में फेल हो गए
राजीव गांधी प्यार में इतने मशगूल हो गए कि ट्रिनिटी कॉलेज की पढ़ाई का ध्यान ही नहीं रहा। सभी विषयों में फेल हो गए। अब वह कभी भी साइंटिस्ट नहीं बन सकते थे। राजीव ने कैंब्रिज कॉलेज छोड़ा और इंपीरियल कॉलेज में आ गए। यहां से वह इंजीनियरिंग और मैकेनिक्स की पढ़ाई करने लगे। सोनिया से बातचीत या प्यार यहां भी कम नहीं रहा।

जुलाई 1966 में सोनिया गांधी कॉलेज पूरा करके वापस इटली लौट गई। पिता से राजीव की बात की तो उन्होंने साफ कहा, "हम तुम्हें उस लड़के से शादी करने की अनुमति नहीं दे सकते। मैं यह नहीं कहता कि लड़के में कमी है, वह अच्छा लड़का है। तुम एक साल इंतजार करो फिर देखते हैं क्या होता है।" राजीव को यह खबर पता चली तो उन्होंने सोनिया के घर ऑरबैस्सानो जाने का फैसला कर लिया। इधर लाल बहादुर शास्त्री की मौत के बाद इंदिरा गांधी पीएम बन चुकी थी।

राजीव ने सोनिया के पिता से कहा, मैं आपकी बेटी से शादी करना चाहता हूं
राजीव गांधी सोनिया के घर पहुंच गए। सभी डायनिंग टेबल पर बैठे थे तभी राजीव ने स्टीफेनो से कहा, "मैं आपको बताने आया हूं कि मैं आपकी बेटी से शादी करना चाहता हूं।" सोनिया दंग रह गई। खाना खा रही मां के हाथ ठहर गए। पिता ने कहा, "मुझे तुम्हारे प्रस्ताव व ईमानदारी पर कोई शक नहीं है। मैं अपनी बेटी को लेकर चिंतित हूं। यह जानती नहीं कि इसे क्या चाहिए। मुझे लगता है कि यह भारत के जीवन की आदी नहीं हो पाएगी।"

सोनिया की मां चाहती थीं कि उनकी बेटी की शादी राजीव गांधी से हो जाए।
सोनिया की मां चाहती थीं कि उनकी बेटी की शादी राजीव गांधी से हो जाए।

राजीव ने स्टीफेन मायनों से कहा, आप सोनिया को कुछ दिन के लिए हमारे साथ भारत जाने दें। वह वहां चलकर खुद ही फैसला कर लेगी कि उसके लिए क्या सही होगा। सोनिया के पिता ने कुछ देर चुप रहने के बाद कहा, सोनिया अभी 20 साल की है, जब 21 साल की हो जाएगी तब भेजा जाएगा। राजीव को यह बात सही लगी। 1967 में सोनिया गांधी 21 साल की हो गई। साल के आखिर में वह भारत आई और वक्त बिताया। उन्हें भारत पसंद आ गया।

आज की कहानी यहीं तक। कल हम सोनिया गांधी और राजीव गांधी की शादी की बात करेंगे।

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