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बच्चे को बचाने वाले जवान के गांव से रिपोर्ट:सोपोर हमला: गोलियों की बौछार के बीच 80 मीटर कोहनी के बल चला था पवन; माता-पिता बोले- गर्व से ऊंचा हो गया सिर

वाराणसी5 महीने पहले
बुधवार को जम्मू-कश्मीर के सोपोर में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस दौरान जवान पवन ने अपनी जान पर खेलकर एक बच्चे को बचाया था।
  • सोपोर में हुई आतंकी मुठभेड़ में मासूम को बचाने वाले पवन कुमार चौबे वाराणसी के गोल ढमकवां गांव के रहने वाले हैं
  • पवन 2010 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे, झारखंड में टीम के साथ अपनी जांबाजी से दो नक्सलियों को मार गिराया था
  • सीआरपीएफ 95 बटालियन के कमांडेंट एनपी सिंह ने गांव पहुंचकर माता-पिता को सम्मानित किया, गांव वाले बेटे की बहादुरी पर गर्व कर रहे

बुधवार को जम्मू-कश्मीर के सोपोर में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया है। यहां आतंकियों ने एक नागरिक की गोली मारकर हत्या कर दी, जबकि उसके तीन साल के पोते की जान बच गई। वह दादा के शव के सीने पर बैठकर रो रहा था। उस बच्चे को सीआरपीएफ जवान पवन कुमार चौबे ने अपनी जान की परवाह किए बगैर बचाया था।

पवन वाराणसी में जिला मुख्यालय से 22 किमी की दूरी पर स्थित गोल ढमकवां गांव के रहने वाले हैं। गुरुवार को सीआरपीएफ 95 बटालियन के कमांडेंट एनपी सिंह ने पवन के परिवार के बीच पहुंचकर दिलेर जवान पवन के माता-पिता को सम्मानित किया तो पूरे परिवार और गांव के लोगों को गर्व महसूस हुआ।

वाराणसी से करीब 22 किमी की दूरी पर गोल ढमकवां गांव है। चौबेपुर बाजार से कादीपुर रेलवे स्टेशन की क्रासिंग को पार कर पक्की सड़क पर दो किमी चलने पर यह गांव आता है। पक्की सड़क से 500 मीटर खड़ंजा लगा है। 700 की आबादी वाले इस गांव में बीच में पवन का पक्का मकान है। पवन के चचेरे बाबा कल्लू चौबे पूर्व प्रधान भी रह चुके हैं। पिता किसान हैं।

जवान ने फोन कर बयान की मुठभेड़ की कहानी

बुधवार सुबह सोपोर हमले की फोटो मीडिया में सुर्खियां बनने लगी थीं। सोपोर से 1700 किमी दूर बैठे अपनों को भी बेटे पवन की फोटो देखकर उसकी चिंता होने लगी। लेकिन, कुछ देर बाद जब लोगों को पता चला कि उसने संकट में फंसे मासूम को बचाया है और खुद भी सकुशल है तो चिंता के भाव सभी के चेहरे से छंट गए।

मां सुशीला देवी ने बताया कि बुधवार रात में बेटे पवन का फोन आया था। उसने बताया कि 179 बटालियन के जवान सोपोर मार्केट में कल ड्यूटी कर रहे थे। पास की मस्जिद में आतंकियों ने फायरिंग कर दी। एक बुजुर्ग को गोली लग गई और वो नीचे गिर पड़े थे।

उनका पोता दादा के शव पर बैठकर रोने लगा था। मां ने कहा- मेरा लाल बच्चे के रोने की आवाज सुनकर खुद को रोक नहीं पाया और उसने कोहनी के बल लेटकर 80 मीटर दूर जाकर बच्चे को बचाया और सीने से चिपकाकर वापस आया। मैंने अपना बेटा देश को दे दिया है। आज उसने सम्मान बढ़ा दिया।

सीआरपीएफ जवान पवन चौबे।
सीआरपीएफ जवान पवन चौबे।

पिता बोले- बच्चे को बचाने के लिए आतंकियों से लड़ गया, बेटे पर गर्व

पिता सुभाष चौबे ने बताया कि वो (पवन) रोज सुबह फोन करता था। लेकिन, कल सुबह फोन नहीं आया तो चिंता हुई। 1 बजे उसको मैंने फोन किया तो बोला परेशानी में हूं। बाद में कॉल करते हैं। आधे घंटे बाद बताया कि घटना घटी है। फिर रात दस बजे कॉल किया कि अब तो सब कुछ पता चल गया होगा? पिता ने कहा कि बेटा आतंकियों से लड़ गया बच्चे को बचाने के लिए, मुझे गर्व है।

पिता ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी पोस्टिंग के दौरान बेटे ने नक्सलियों को टक्कर दी थी। अब वह 3 सालों से सोपोर में तैनात है। कुछ भी पूछने पर बोलता है कि पापा देश की रक्षा करना मेरा फर्ज और ड्यूटी है। बीए की पढ़ाई करते समय ही फोर्स में भर्ती हो गया था।

जवान पवन की माता-पिता के साथ ली गई सेल्फी।
जवान पवन की माता-पिता के साथ ली गई सेल्फी।

पत्नी ने कहा- मां तो मां होती है, दुश्मन को नहीं छोड़ना चाहिए

पत्नी शुभांगी ने बताया कि 2012 में हमारी शादी हुई है। एक बेटी और एक बेटा है। बुधवार को फोन सुबह नहीं आया तो मन घबरा रहा था। रात को पता चला मुठभेड़ चल रही थी और उन्होंने एक बच्चे को अपनी जान खतरे में डाल कर बचाया। बेटा किसी का हो मां तो मां ही होती है। दुश्मन को नहीं छोड़ना चाहिए।

यह तस्वीर आतंकियों से मुठभेड़ के बाद की है। जवान पवन की गोद में मासूम।
यह तस्वीर आतंकियों से मुठभेड़ के बाद की है। जवान पवन की गोद में मासूम।

कोबरा बटालियन में रही तैनाती, दो नक्सलियों को मार गिराया था

पवन 2010 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे और एक साल की ट्रेनिंग की। फिर झारखंड में 203 कोबरा बटालियन में तैनात हुए। 2012 में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में टीम के साथ पवन ने झारखंड में दो नक्सलियों को मार गिराया था। यह बटालियन खासतौर पर नक्सलवाद को खत्म करने के लिए बनाई गई है।

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