कपिल सिब्बल का राजनीतिक सफर:26 साल कांग्रेस में रहे, अदालत में राहुल, लालू, ममता, अंबानी और आजम को बचाया

एक महीने पहलेलेखक: आशीष उरमलिया

सितंबर, 2021 में कपिल सिब्बल ने एक बयान दिया। कांग्रेस में रहते हुए पार्टी के नेतृत्व को लपेटे में लिया और कहा, “गांधी परिवार कांग्रेस की लीडरशिप छोड़े और जल्द ही नया अध्यक्ष चुना जाए।” इस बयान के बाद पार्टी दो गुटों में बंट गई। कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने उनके घर का घेराव कर दिया। प्रदर्शन में उनकी गाड़ी भी तोड़ दी गई। इसके बाद कपिल लगातार कांग्रेस पार्टी पर गांधी परिवार के एकछत्र राज का विरोध करते नजर आए।

अब कांग्रेस के बेहद वफादार रहे कपिल 26 साल बाद कांग्रेस छोड़ सपा के साथ आ गए हैं। सपा के समर्थन से राज्यसभा सदस्य के लिए नामांकन भी भर दिया है। आइए कपिल सिब्बल के अब तक के राजनीतिक सफर को जानते हैं-

कपिल सिब्बल एक अच्छे कवि भी हैं। उनकी कई कविताएं भी प्रकाशित हो चुकी हैं।
कपिल सिब्बल एक अच्छे कवि भी हैं। उनकी कई कविताएं भी प्रकाशित हो चुकी हैं।

IAS की नौकरी छोड़ वकालत करने लगे
74 साल के कपिल सिब्बल का जन्म 8 अगस्त 1948 को पंजाब के जालंधर में हुआ था। 16 साल की उम्र यानी 1964 में कपिल दिल्ली आ गए। दिल्ली में ही 5 साल कानून और 2 साल तक इतिहास की पढ़ाई की। साल 1972 में बार एसोसिएशन ज्वाइन कर लिया।

साल 1973 में कपिल ने IAS यानी इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेज का एग्जाम पास कर लिया था। नौकरी का ऑफर भी आया लेकिन कपिल ने नौकरी ठुकरा दी और खुद की कानूनी प्रैक्टिस करनी शुरू कर दी। फिर 2 साल बाद 1975 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी गए और 1977 में LLM यानी मास्टर ऑफ लॉज की पढ़ाई पूरी की।

1994 में संसद जाकर चंडीगढ़ के चीफ जस्टिस को बचाया
हार्वर्ड से LLM करने के बाद कपिल भारत वापस आए। प्रैक्टिस शुरू की और 6 साल बाद ही यानी 1983 में सीनियर लॉयर कहलाने लगे। साल 1989 में उन्हें एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया बना दिया गया। 1993 में चंडीगढ़ हाई कोर्ट के जस्टिस पर महाभियोग लाया गया। साल 1994 में कपिल ने संसद जाकर चंडीगढ़ हाईकोर्ट के जज का बचाव किया था।

साल 1995 से 1998 तक और 2001 से 2002 तक तीन बार सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बने। कपिल को वकालत विरासत में मिली है। उनके पिता हीरालाल सिब्बल भी देश के जाने-माने वकील थे। वे इंटरनेशनल बार एसोसिएशन के लिविंग लेजेंड ऑफ लॉ की पदवी से भी सम्मानित किए गए थे।

पहला चुनाव सुषमा से हारे फिर स्मृति ईरानी को हराया
साल 1996 में कपिल राजनीति में आए। पीवी नरसिम्हा राव ने उन्हें दक्षिणी दिल्ली से कांग्रेस का टिकट दिया लेकिन सुषमा स्वराज से 1 लाख से ज्यादा वोटों से हार गए।

अपनी पहली पत्नी नीना सिब्बल के साथ राज्य सभा चुनाव में मिली जीत का जश्न मनाते हुए कपिल सिब्बल।
अपनी पहली पत्नी नीना सिब्बल के साथ राज्य सभा चुनाव में मिली जीत का जश्न मनाते हुए कपिल सिब्बल।

साल 1998 तक कपिल सिब्बल को संवैधानिक कानून का स्पेशलिस्ट माना जाने लगा था। उनकी काबिलियत के चलते कांग्रेस ने उन्हें बिहार से राज्यसभा सदस्य बना दिया। अब कपिल कांग्रेसी हो चुके थे। साल 2000 से 2002 तक में उन्होंने वहां कांग्रेस की संसदीय सदस्यता के सचिव के रूप में काम किया।

कांग्रेस की टिकट पर ही साल 2004 में चांदनी चौक से लोकसभा चुनाव लड़े और भाजपा की स्मृति ईरानी को हराकर संसद पहुंचे। इसके बाद वो 2009 का चुनाव भी जीते।

2004 से 2014 तक संचार, कानून और विज्ञान मंत्रालय को संभाला

तकनीकी विकास मंत्री रहते हुए कपिल सिब्बल एक रिसर्च टीम के साथ साउथ पोल और अंटार्टिका तक जा चुके हैं।
तकनीकी विकास मंत्री रहते हुए कपिल सिब्बल एक रिसर्च टीम के साथ साउथ पोल और अंटार्टिका तक जा चुके हैं।

साल 2004 में प्रधानमंत्री की कुर्सी मनमोहन सिंह ने संभाली। कपिल सिब्बल को साइंस एंड टेक्नोलॉजी और अर्थ साइंस मिनिस्टर बनाया गया। साल 2009 से 2012 तक उन्होंने ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट मिनिस्ट्री संभाली। साल 2011 से लेकर 2014 तक संचार मंत्री भी रहे। साल 2013 से 2014 तक देश के कानून मंत्री भी रहे। सरकार चलाने के दौरान लगे घोटालों के आरोपों में कांग्रेस का मजबूत पक्ष रखते रहे।

एक सुनवाई के लिए 15 लाख की फीस लेते हैं
साल 2015 में मिंट वेबसाइट पर जानकारी दी गई थी कि कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में एक बार पेश होने की 8 से 15 लाख रुपए की फीस लेते हैं। अन्य खबरों के मुताबिक, 20-25 लाख रुपए तक चार्ज करते हैं। वहीं हाई कोर्ट में एक हियरिंग के 8 से 10 लाख रुपए चार्ज करते हैं।

कपिल सिब्बल 49 साल से वकालत और 26 साल से राजनीति कर रहे हैं।
कपिल सिब्बल 49 साल से वकालत और 26 साल से राजनीति कर रहे हैं।

अंबानी से लेकर आजम तक कई केस लड़े और जमानत दिलवाई

  • कपिल सिब्बल सपा नेता आजम खान का केस लड़ रहे हैं। हाल ही सिब्बल ने ही उन्हें जमानत दिलवाई।
  • एनसीपी नेता नवाब मलिक का केस लड़ उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत दिलवाई।
  • चारा घोटाले में आरजेडी के लालू यादव को हाईकोर्ट से जमानत दिलवाई थी।
  • मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हेमंत सोरेन ने भी अपने खिलाफ मामलों में कपिल सिब्बल से कानूनी सलाह मांगी है।
  • पश्चिम बंगाल की ममता सरकार के लिए कई केस लड़े। ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी का केस भी लड़े।
  • कांग्रेस नेता पी चिदंबरम का केस भी कपिल सिब्बल ने ही लड़ा।
  • कोलगेट केस में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के वकील भी हैं।
  • सिब्बल राहुल गांधी का केस लड़ रहे हैं।
  • सुब्रत राय का सहारा वाला केस भी सिब्बल ही लड़ रहे हैं।
  • अनिल अंबानी, अरविंद केजरीवाल सरकार, नम्बी नारायण का केस भी कपिल सिब्बल ने लड़ा।
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