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कानपुर में मारे गए 8 पुलिसकर्मियों की कहानी:किसी ने पिता को आदर्श मानकर हासिल की थी वर्दी तो किसी के परिवार का इकलौता सहारा छिना

यूपी टीमएक महीने पहले
यह तस्वीर रायबरेली की है। यहां के रहने वाले एसआई महेश यादव कानपुर के बिकरु गांव में हुए मुठभेड़ में मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही पूरे परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी संध्या रोते बिलखते बेसुध हो गईं।
  • पुलिस गुरुवार रात को कानपुर के बिकरु गांव में दबिश देने गई थी, तभी हिस्ट्रीशीटर और उसके साथियों ने हमला कर दिया
  • इसमें सीओ, थाना प्रभारी समेत 8 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई, जबकि 5 पुलिसकर्मी घायल हैं
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उत्तर प्रदेश में कानपुर देहात के बिकरु गांव में हिस्ट्रीशीटर को पकड़ने गई पुलिस टीम पर बदमाशों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इसमें सीओ समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए। किसी ने अपने पिता की खाकी वर्दी को देखकर इस महकमे में अपने कदम रखे थे तो किसी ने सिपाही के बाद परीक्षा देकर अपने कंधों पर स्टार सजाए थे। वहीं, किसी परिवार का इकलौता सहारा छिन गया। शहादत की खबर से मृतकों के परिवार में मातम हैं। कानपुर मुठभेड़ में जिन पुलिसकर्मियों की मौत हुई, उनकी कहानी...

9 माह बाद रिटायर होने वाले थे सीओ देवेंद्र मिश्र
बांदा के महेबा गांव के रहने वाले सीओ बिल्हौर देवेंद्र कुमार मिश्र ऑपरेशन के दौरान टीम का नेतृत्व कर रहे थे। लेकिन बदमाशों की गोली का शिकार हो गए। वे मार्च 2021 में ही रिटायर होने वाले थे। परिवार में पत्नी आस्था और दो बेटियां वैष्णवी और वैशारदी हैं। वैष्णवी मेडिकल की तैयारी कर रही है, जबकि वैशारदी अभी इंटर की छात्रा है। देवेंद्र का एक भाई डाकघर में तो दूसरे भाई आरडी मिश्र महेबा गांव के पूर्व प्रधान हैं। साल 1980 में उन्हें दरोगा के पद पर तैनाती मिली थी। साल 2007 में प्रोन्नत होकर इंस्पेक्टर बने और 2016 में गाजियाबाद के मोदीनगर में बतौर क्षेत्राधिकारी तैनाती मिली थी। उनका परिवार कानपुर में स्वरूपनगर के पॉमकोट अपार्टमेंट में रह रहा है।

सीओ देवेंद्र कुमार मिश्र। -फाइल फोटो

आधी रात बेटे को मिली मुठभेड़ की खबर: महेश यादव का बेटा
मुठभेड़ में शिवराजपुर थाना प्रभारी महेश यादव की भी मौत हो गई। वे रायबरेली के सरेनी में हिलौली गांव के रहने वाले थे। परिवार में पत्नी सुमन और दो बेटे हैं। सभी थाने के सरकारी आवास में रहते हैं। बड़ा बेटा विवेक मेडिकल की तैयारी कर रहा है। विवेक ने बताया कि पिता रोज की तरह रात 9 बजे खाना खाने के लिए घर आए थे। एक घंटे बाद चले गए। हर दिन वे रात दो बजे तक वापस आ जाते थे। लेकिन जब देर हुई तो मैंने रात तीन बजे उन्हें फोन किया तो किसी ने रिसीव किया। बताया कि, मुठभेड़ चल रही और फोन काट दिया। इसके बाद सुबह शहादत की खबर मिली। शहीद दरोगा महेश यादव के पिता देव नारायण जलकल विभाग में पंप आपरेटर थे। महेश कुमार यादव (45) वर्ष 1996 में सहारनपुर से पुलिस में भर्ती हुए थे। वर्ष 2014 में दरोगा की परीक्षा में पास हुए तो पहली तैनाती में एसएसपी कानपुर के पीआरओ की जिम्मेदारी मिली थी। बीते 2 वर्ष से महेश कुमार शिवराजपुर थाने में तैनात थे। 

महेश यादव- फाइल

तेज तर्रार पुलिसवालों में गिनती थी अनूप की

चौकी प्रभारी मंधना अनूप कुमार कानपुर जिले में तेज तर्रार पुलिसवालों में गिने जाते थे। वे प्रतापगढ़ जिले के मानधाता के बेलखरी गांव के रहने वाले थे। पिता का नाम रमेश बहादुर सिंह है। साल 1986 में जन्मे अनूप ने साल 2015 में पुलिस विभाग जॉइन किया था। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद फरवरी 2019 को उनकी तैनाती कानपुर के बिठूर थाने की टिकरा चौकी में हुई थी। इसके बाद जनवरी 2020 में उनका तबादला मंधना चौकी प्रभारी के तौर पर हुआ था। परिवार में पत्नी नीतू, 9 साल की बेटी गौरी, तीन साल का बेटा सूर्यांश है, जो प्रयागराज में रहते हैं। मौत की खबर पाकर पूरा परिवार कानपुर रवाना हो गया है। 

एसआई अनूप कुमार। -फाइल फोटो

4 भाईयों में बड़े थे एसआई नेबूलाल
एसआई नेबुलाल प्रयागराज के हंडिया के रहने वाले थे। मौत की खबर पाकर पूरा परिवार कानपुर पहुंच गया है। वे एक माह पहले छुट्टी लेकर अपने घर गए थे। चार भाईयों में वे सबसे बड़े थे। एक भाई ओम प्रकाश वाराणसी जिले में तैनात हैं। एक भाई होमगार्ड और चौथा भाई गांव में रहकर खेतीबाड़ी संभालते हैं। 

ननिहाल में रहकर की थी पढ़ाई, बचपन में हो गया था मां का निधन

मूलत: झांसी में मऊरानीपुर के मोहल्ला चौक दमेला निवासी सिपाही सुल्तान सिंह भी बदमाशों से लोहा लेते हुए मारे गए। सुबह परिवार वालों को मौत की खबर मिली। सुल्तान की मां का बचपन में ही निधन हो गया था। इसलिए उनकी शुरुआती शिक्षा ननिहाल में हुई। यहीं से पुलिस महकमे में नौकरी हासिल की थी। सुल्तान की सात साल की बेटी है। जिसे वह डॉक्टर बनाना चाहते थे। लेकिन अब पूरा परिवार उसके भविष्य को लेकर चिंतित है। 

सुल्तान। -फाइल फोटो

खाकी को देखते हुए बीता था बचपन

मुठेभड़ में गाजियाबाद के मोदीनगर के रहने वाले सिपाही राहुल की भी जान चली गई। परिजनों ने बताया कि पिछले साल ही राहुल की दिव्या से शादी हुई थी। उनकी एक बच्ची है। राहुल के पिता ओमकुमार यूपी पुलिस में सब इंस्पेक्टर थे। वह अब रिटायर होने के बाद परिवार सहित मोदीनगर में रहते हैं। उनके तीन पुत्रों में से मंझला पुत्र राहुल था। सुबह सूचना मिलने के बाद पिता सहित परिवार कानपुर के लिए रवाना हो गया है। 

राहुल कुमार। -फाइल

घर वाले शादी का संजो रहे थे सपना
आगरा जिले में फतेहाबाद के ग्राम पोखर पांडे निवासी सिपाही बबलू कुमार साल 2018 में पुलिस में भर्ती हुए थे। वे अभी अविवाहित थे। घर वाले अब उसकी शादी के सपने संजो रहे थे। कुछ परिवारों से शादी की बात भी चल रही थी। लेकिन बबलू कुमार की मौत ने परिवार के सभी सपने चकनाचूर कर दिए हैं। पुलिस ट्रेनिंग के बाद कानपुर में सिपाही पद पर तैनाती मिली थी और जनवरी 2019 को बिठूर थाने में तैनाती हुई थी।

बबलू कुमार। -फाइल फोटो

10 दिन पहले छुट्टी से लौटा था सिपाही जितेंद्र
कानपुर मुठभेड़ में मारे गए मथुरा के रहने वाले सिपाही जितेंद्र 23 जून को छुट्टी से लौटे थे। भाई सौरभ ने बताया कि, वे सुबह सो रहे थे, तभी फोन आया कि जितेंद्र को गोली लगी है। इसके बाद फोन कट गया था। लेकिन बात में शहीद होने की जानकारी हुई। जितेंद्र के दोस्त राम गोपाल ने बताया कि जितेंद्र पढ़ाई में तेज था और वह अधिकारी बनना चाहता था। परिवार में रोजी रोटी का अकेला सहारा था। उस पर दो भाई और एक बहन की जिम्मेदारी थी।

जितेंद्र कुमार।-फाइल फोटो
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