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यूपी में बिजली का संकट टला:बिजली विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त; निजीकरण का फैसला तीन महीने के लिए टला, कर्मचारी काम पर लौटे

लखनऊ20 दिन पहले
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सरकार ने बिजली विभाग के निजीकरण का फैसला टाल दिया है। सरकार के इस फैसले के बाद कर्मचारियों ने जीत का जश्न मनाया। उन्होंने कहा कि हमने संघर्ष किया और हमारी जीत हुई।
  • बिजली कर्मियों के दूसरे दिन कार्यबहिष्कार से प्रदेश के एक चौथाई हिस्से की ठप्प हो गई थी बिजली
  • राजधानी में डिप्टी सीएम से लेकर ऊर्जा मंत्री के घर की बिजली कटी रही,वीआईपी भी रहे परेशान

उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मियों के दो दिनों के कार्य बहिष्कार के बाद सरकार को पीछे हटना पड़ा। सरकार ने फिलहाल तीन महीने के लिए बिजली विभाग को निजी हाथ में सौंपने का फैसला टाल दिया है। निजीकरण को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार और बिजली विभाग के अधिकारियों के बीच बैठक में बिजली व्यवस्था के निजीकरण को 15 जनवरी तक टाला गया। इस फैसले के बाद बिजलीकर्मियों की अनिश्चित कालीन हड़ताल को कर्मचारी संगठनों ने वापस ले लिया है।

इससे पहले सीएम योगी आदित्यनाथ से मंत्रियों के साथ आला अधिकारियों को लेकर उच्च स्तरीय बैठक भी की थी। फैसला वापस लेने के दौरान सरकार की ओर से वितरण क्षेत्र को भ्रष्टाचार से मुक्त करने, बिलिंग व कलेक्शन एफिशिएंसी लक्ष्य प्राप्त करने, उपभोक्ताओं को संतुष्ट करने के साथ ही उपकेंद्रों को आत्मनिर्भर बनाने में संघर्ष समिति सहयोग करेगी। इस दौरान यह भी प्रस्ताव दिया गया कि समिति द्वारा 15 जनवरी तक सुधार के लिए किए गए कार्यों की समीक्षा की जाएगी। साथ ही कई और प्रस्तावों पर मु​हर लगाई गई।

वहीं फैसला टलने के बाद बिजली नेताओं ने जीत का जश्न मनाया। उन्होंने कहा कि हमने संघर्ष किया और हमारी जीत हुई। मंगलवार की सुबह बैठक पूर्व शक्ति भवन के साथ ही प्रदेश के सभी जिलों में एक बार फिर से कार्य बहिष्कार के साथ प्रदर्शन शुरू कर दिया गया था।

पूर्वांचल में भी दिखा बिजली का भीषण संकट

शहरी क्षेत्रों में तो लोगों को बिजली के साथ ही पानी के लिए भी तरसना पड़ गया। अब बस है लोगों को इंतजार था कि कार्य बहिष्कार खत्म हो और आपूर्ति बहाल हो सके। प्रदेश के लखनऊ, बाराबंकी, गोंडा, बस्ती, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, डुमरियागंज, बहराइच, गाजीपुर, मऊ, बलिया, देवरिया, वाराणसी, चंदौली, सोनभद्र, अमेठी, आजमगढ़, अकबरपुर, फैजाबाद, प्रयागराज, मेरठ, हरदोई, सीतापुर, रायबरेली सहित कई और जिलों की बिजली सप्लाई बंद हो गई थी। 11 केवी लाइन, 33 केवी लाइन, एलटी लाइन फाल्ट, ट्रांसफॉर्मर, जंफर जलने सहित कई अन्य और कारणों से बिजली सप्लाई ठप हो गई थी।

दिन भर घनघनाते रहे बिजली कर्मियों के फोन, चरमराई आपूर्ति
कर्मचारियों ने सोमवार से शुरू हुए हड़ताल के दूसरे दिन मंगलवार को प्रदेश व्यापी कार्य बहिष्कार का ऐलान किया था। इसके चलते राजधानी में भी विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था चरमरा गई। बिजलीकर्मियों के कार्य बहिष्कार के कारण डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या, ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा सहित तीन दर्जन से अधिक मंत्रियों और करीब 100 से अधिक विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के सरकारी आवास सहित राजधानी की बिजली सप्लाई भी बाधित हो गई। वीवीआईपी इलाकों में बिजली गुल होने से पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से लेकर शासन स्तर तक हड़कंप मच गया, लेकिन बिजली अभियंताओं ने विद्युत आपूर्ति बहाल करने से मना कर दिया था।

आनन-फानन मध्यांचल निगम के एमडी सूर्यपाल गंगवार ने निदेशक (तकनीकी) सुधीर कुमार को कूपर रोड उपकेंद्र भेजा गया। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद वैकल्पिक स्त्रोत से बिजली सप्लाई बहाल हुई। वहीं, लेसा के राजभवन डिवीजन के अंतर्गत कूपर रोड उपकेंद्र में सुबह करीब 11 बजे बिजली सप्लाई ठप्प कर दी गई थी। इससे विक्रमादित्य मार्ग, माल एवेन्यू, गुलिस्तां कॉलोनी, महिला विधायक आवास, पीडब्ल्यूडी कॉलोनी सहित कई वीआईपी इलाकों की बिजली सप्लाई ठप हो गई थी।

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