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  • The bar association has also raised serious questions over the mechanism adopted for hearing the cases during the lockdown.

प्रयागराज / लॉकडाउन के दौरान मुकदमों की सुनवाई को लेकर बार एसोसिएशन ने उठाए सवाल, मुख्य न्यायाधीश को लिखा पत्र

बार एसोसिएशन ने लॉकडाउन के दौरान मुकदमों की सुनवाई के लिए अपनाई गई व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। बार एसोसिएशन ने लॉकडाउन के दौरान मुकदमों की सुनवाई के लिए अपनाई गई व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
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बार एसोसिएशन ने लॉकडाउन के दौरान मुकदमों की सुनवाई के लिए अपनाई गई व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।बार एसोसिएशन ने लॉकडाउन के दौरान मुकदमों की सुनवाई के लिए अपनाई गई व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।

  • एसोसिएशन ने कहा- मौजूदा हालात को देखते हुए कम से कम कुछ मामलों में वकीलों की भौतिक उपस्थिति की अनुमति दी जाए बार एसोसिएशन ने लॉकडाउन के दौरान मुकदमों की सुनवाई के लिए अपनाई गई व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं

दैनिक भास्कर

May 26, 2020, 03:36 PM IST

प्रयागराज. इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक जून से खुली अदालत में सुनवाई शुरू करने के लिए बार एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है। पत्र में लॉकडाउन के दौरान जरूरी मुकदमों की सुनवाई और ई-फाइलिंग तथा वीडियो कांफ्रेंसिंग जैसे कई मुद्दों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। बार का मानना है कि, मौजूदा व्यवस्था कारगर नहीं है और खुली अदालत में मुकदमों की सुनवाई तथा बहस का कोई विकल्प नहीं हो सकता है।

एसोसिएशन ने मांग की है कि मौजूदा हालात को देखते हुए कम से कम कुछ मामलों में वकीलों की भौतिक उपस्थिति की अनुमति दी जाए। जबकि अन्य मामलों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुना जा सकता है। बार ने सुरक्षा के सभी उपाय अपनाते हुए खुली अदालत में सुनवाई प्रारंभ करने की मांग की है।

यह पत्र मौजूदा अध्यक्ष राकेश पांडेय, महासचिव जेबी सिंह तथा नवनिर्वाचित अध्यक्ष अमरेंद्र नाथ सिंह और नवनिर्वाचित महासचिव प्रभाशंकर मिश्र की ओर से लिखा गया है। बार एसो‌सिएशन का कहना है कि, वर्तमान परिस्थतियों में संवैधानिक अदालतों का पूरी तरह से काम करना आवश्यक है। इसलिए मौजूदा व्यवस्था पर फिर से विचार करते हुए शारीरिक और सामाजिक दूरी तथा अन्य सुरक्षा उपायों को अपनाते हुए फिर से काम शुरू किया जाए।

वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई की व्यवस्था ठीक नहीं- बार एसोसिएशन 
बार एसोसिएशन ने लॉकडाउन के दौरान मुकदमों की सुनवाई के लिए अपनाई गई व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। कहा गया है कि, वीडियो कांफ्रेंसिंग की व्यवस्था सफल नहीं है। क्योंकि वकीलों को मैसेज आने के बाद भी वीडियो लिंक नहीं भेजा जा रहा है। यदि लिंक मिल भी जाता है तो कनेक्टिविटी की समस्या है। पिछले दिनों जमानत प्रार्थनापत्रों की सुनवाई के लिए की गई व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। बार का कहना है कि, कई जमानत प्रार्थनापत्रों को एकतरफा सुनवाई में खारिज किया गया। कई जमानत प्रार्थनापत्रों में लंबी डेट दी जा रही है और लॉक डाउन से पूर्व जिनमें फैसला सुरक्षित था उनमें अग्रि‌म सुनवाई के लिए डेट लगा दी गई।

बार का कहना है कि, अर्जेंसी एप्लीकेशन की व्यवस्था में एक रूपता नहीं है। अर्जेंसी अर्जी तय नहीं की जा रही है और अगर तय की भी जा रही हैं तो इसे तय करने का कोई निश्चित मानक दिखाई नहीं देता है, क्योंकि एक ही मामले में कुछ वकीलों की अर्जेंसी एप्लीकेशन स्वीकार की जा रही है जबकि उसी तरह के मामले में अन्य वकीलों की अस्वीकार कर दी जा रही है।

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