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यूपी में महामारी का कहर:पहले भाई फिर मां को निगल गया कोरोना, मौत के खौफ से परिवार के बाकी सदस्‍यों ने छोड़ा घर

गोरखपुरएक महीने पहले
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एक ही परिवार में हुई दो मौतों के डर से परिवार ने गांव छोड़ दिया। - Dainik Bhaskar
एक ही परिवार में हुई दो मौतों के डर से परिवार ने गांव छोड़ दिया।

कोराना जिंदगी ही नहीं घर-परिवार, गांव-गिरांव से भी दूर कर रहा है। एक परिवार में कोरोना से पहले बेटे, फिर मां की मौत हो गई। बेटे की मौत तक तो परिवार के साथ लोगों की हमदर्दी दिखी लेकिन मां की मौत के बाद गांव का कोई व्यक्ति कंधा तक देने नहीं पहुंचा। दो मौतों के बाद डर इस कदर फैल गया कि किसी तरह से मां का अंतिम संस्कार करके दूसरे बेटे ने मकान में ताला बंद कर परिवार सहित गांव छोड़ दिया। तब से गांव में उस घर की तरफ कोई जा तक नहीं रहा है।

गोरखपुर के सहजनवां क्षेत्र के थरूआपार निवासी रविप्रकाश ओझा के 29 वर्षीय भाई ओमप्रकाश का 26 अप्रैल को कोरोना से मौत हो गई। जवान बेटे की मौत से मां सदमे में चली गईं। वहीं भाई ने अन्तिम संस्कार करने के बाद क्रियाक्रम की तैयारी शुरू कर दी। तेरहवीं से पहले यानी आठवें दिन 4 मई को मां अरुणा देवी का भी निधन हो गया।

रवि प्रकाश ने बताया कि मां को तेज बुखार हुआ और सांस लेने मे दिक्कत हुई। तत्काल उन्हें सीएचसी ठर्रापार ले गए जहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मां की मौत के बाद शव लेकर रवि घर पहुंचा।

भाई की मौत के बाद मां की मौत ने तोड़ दिया
भाई की मौत के सदमे से अभी परिवार उबरा भी नहीं था कि मां की मौत ने उन्हें और तोड़ दिया। उधर, ग्रामीणों में कोरोना का खौफ इस कदर हावी हो गया कि रवि की मां का शव दरवाजे पर पड़ा रहा लेकिन गांव का एक भी व्यक्ति वहां नहीं गया। रवि ने किसी तरह से रिश्तेदारों को बुलाकर मां का अंतिम संस्कार किया। रवि के ममेरे भाइयों ने सहयोग किया।

मां और भाई की मौत ने रवि को इतना भयभीत कर दिया कि दोनों का क्रियाक्रम की रस्म किए बिना ही अगले दिन भाई की पत्नी और बच्चों को उनके मायके भेजकर खुद भी घर में ताला बंद कर अपने परिवार के साथ खलीलाबाद भदाह स्थित अपनी ससुराल चला गया। उधर, गांव के लोगों ने रवि के घर से काफी दूरी बना ली है। घर की तरफ कोई झांक तक नहीं रहा है।

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