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  • The Mythical Sites Of All 21 Districts Of Kanpur Division Will Be Included In The Ganga Jal Bhoomi Pujan; VHP Team Will Soon Leave Ayodhya With This

अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण:कानपुर मंडल के 21 जिलों की पौराणिक स्थलों की माटी और गंगाजल भूमि पूजन में शामिल होगा; विहिप का दल जल्द अयोध्या लेकर जाएगा

अयोध्या2 महीने पहले
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यूपी के अयोध्या में पांच अगस्त को पीएम मोदी राम मंदिर निर्माण का शिलान्यास करेंगे। इसके लिए अब कानपुर के 21 जिलों से गंगा जल और पवित्र मिट्टी लाया जाएगा। इसे भूमि पूजन में शामिल किया जाएगा।
  • कानपुर मंडल से विशेष रूप से ब्रह्मावर्त की माटी और गंगाजल भेजा जाएगा
  • अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 अगस्त को मंदिर निर्माण का शिलान्यास करेंगे

राम की नगरी अयोध्या में 500 साल पुराना सपना पूरा होने जा रहा है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। यही खुशी कानपुर वासियों में भी देखी जा रही है। अब राम मंदिर निर्माण के भूमि पूजन में विश्व हिंदू परिषद का एक दल कानपुर और कानपुर प्रांत के सभी 21 जिलों की पौराणिक स्थल की माटी और गंगाजल लेकर अयोध्या जाने की तैयारी कर रहा है।

माटी, जल और गंगाजल लेकर पहुंचेंगे अयोध्या
अयोध्या में 5 अगस्त को राम मंदिर के भूमिपूजन को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। इधर, विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष राजीव महाना कानपुर के सभी 21 जिलों के पौराणिक स्थल की माटी, जल और गंगाजल लेकर अयोध्या पहुंचेंगे। इस मिट्टी का प्रयोग भूमि पूजन में भी किया जाएगा। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास और संतजनों के मार्गदर्शन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीरामलला की जन्मभूमि पर भूमिपूजन करेंगे। विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय सहमंत्री दीनदयाल गौड़ ने बताया कि कानपुर प्रांत के 21 जिलों के प्रमुख पौराणिक स्थल की माटी, जल और गंगाजल अयोध्या लाया जाएगा।

विशेष रूप से अयोध्या भेजा जाएगा ब्रह्मावर्त की माटी और गंगाजल
प्रभु राम का कानपुर के बिठुर से अटूट नाता रहा है। इसके चलते अयोध्या में राम मंदिर के भूमिपूजन में ब्रह्मावर्त (बिठुर) की माटी और गंगा जल विशेष रुप से अयोध्या भेजा जाएगा। ब्रह्मावर्त घाट धरती का केंद्र बिंदु तो है ही, महर्षि वाल्मीकि, माता सीता और उनके बेटों लव-कुश की स्मृतियां भी जुड़ी हैं। बिठुर का रामायण काल से प्रभु राम से अटूट नाता रहा है। वाल्मीकि आश्रम भी यहीं स्थित है, जहां सीता को वनदेवी के रूप में जाना गया। सीता रसोई में भोजन बनाती थीं। यहीं पर लव-कुश आश्रम है।

यहां ब्रह्मेश्वर मंदिर के पास स्थित ब्रह्म खूंटा भी है। इसको लेकर कहा जाता है कि अश्वमेध यज्ञ के लिए छोड़ा घोड़ा लव-कुश ने इसी में बांधा था। नारद जी ने महर्षि वाल्मीकि को जो सौ श्लोक सुनाए थे वह वर्तमान में भी यहां स्तंभ पर लिखे हैं। मान्यता है कि इन्हीं सौ श्लोकों के जरिए रामायण लिखी गई। यही वजह है कि ब्रह्मावर्त की पावन माटी और यहां से गंगा जल लेकर अयोध्या जाने की तैयारी की जा रही है।

इन धार्मिक स्थलों से भी भेजी जाएगी मिट्टी, जल और गंगाजल
अयोध्या में प्रभु राम के भव्य मंदिर के शिलान्यास के लिए कानपुर के बिठुर, मस्कर घाट, नाना राव पार्क, पनकी हनुमान मंदिर,खेरेश्वर महादेव मंदिर,आनन्देश्वर मंदिर,जागेश्वर महादेव मंदिर, सिद्धनाथ महादेव मंदिर, वनखंडेश्वर महादेव मंदिर, नागेश्वर महादेव मंदिर, नित्येश्वर महादेव मंदिर, श्रीरामलला मंदिर, श्री.मां.चंद्रिका देवी मंदिर, श्री मां बारादेवी मंदिर, श्री मां तपेश्वरी देवी मंदिर, फर्रुखाबाद के घटिया घाट, बर गदिया घाट, ढाईघाट,सौरिक, कन्नौज का देवी मंदिर, गौरीशंकर मंदिर तिर्वा, चित्रकूट के रामघाट, अनुसुइया आश्रम, गुप्त गोदावारी का जल लाया जाएगा।

इसके अलावा स्फटिक शिला, कामतानाथ, भरत कूप, हनुमान धारा, शरभंग आश्रम, धार कुंडी, मारकुंडी, बांदा के वामदेवेश्वर मंदिर, कालिंजर, महोबा के छोटी चंडिका, बड़ी चंडिका, श्रीनगर किला, रामजी हनुमानजी मंदिर,जालौन के जालौन माता बागरा, पंचनद, मधुवन महाराज, झांसी का किला, ओरछा मंदिर, फतेहपुर के अश्वत्थामा मंदिर, राजा भगवंत खीकी महल, भृग मुनि का आश्रम, बिंदकी में बावन इमली, ललितपुर का दशावतार मंदिर और अन्य सभी प्रमुख स्थानों की मिट्टी और जल शामिल है।

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