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बलिया गोलीकांड:मुख्य आरोपी धीरेंद्र की तीन दिन की पुलिस रिमांड खत्म, हत्या में इस्तेमाल रिवॉल्वर भी बरामद; पूछताछ में कहा- आत्मरक्षा में गोली चलाई थी

बलिया9 महीने पहले
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बलिया गोलीकांड का आरोपी धीरेंद्र सिंह पुलिस कस्टडी में। शुक्रवार को उसकी पुलिस रिमांड पूरी हो गई जिसके बाद उसे न्यायालय को सौंप दिया गया। - Dainik Bhaskar
बलिया गोलीकांड का आरोपी धीरेंद्र सिंह पुलिस कस्टडी में। शुक्रवार को उसकी पुलिस रिमांड पूरी हो गई जिसके बाद उसे न्यायालय को सौंप दिया गया।
  • आरोपी के घर के बगल से बरामद की गई रिवॉल्वर
  • कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच न्यायालय को सौंप दिया

बलिया जिले के दुर्जनपुर में हुए गोलीकांड के मुख्य आरोपित धीरेंद्र प्रताप सिंह की पुलिस रिमांड खत्म हो गई। इससे पहले शुक्रवार सुबह घटना में प्रयुक्त रिवाॅल्वर को पुलिस ने घर के बगल से बरामद कर लिया। इसके बाद आरोपी को न्यायालय को सौंप दिया गया। अदालत ने धीरेंद्र की तीन दिन की पुलिस रिमांड मंजूर की थी।

रेवती एसएचओ प्रवीण कुमार सिंह आरोपी को रिमांड पर लेने के बाद गुरूवार को उसको लेकर गांव गई थी। काफी प्रयास के बाद भी पुलिस हथियार नहीं बरामद की सकी थी। शुक्रवार को सुबह पुन: पूछताछ के दौरान आरोपित की स्वीकारोक्ति पर पुलिस उसे गांव दुर्जनपुर लेकर गई। पड़ोसी प्रयाग सिंह और उसके घर के दक्षिण में स्थित टिन शेड के पास भूसा रखने की जगह के बगल अशोक और नीम के पेड़ के नीचे जमीन में गाड़ कर रखा गया रिवाल्वर बरामद हुआ।

आरोपी के घर के बगल में जमीन के नीचे दबाई गई थी रिवॉल्वर

धीरेंद्र प्रताप सिंह ने स्वीकार किया कि घटना के दौरान पिता व भाई के घायल होने के बाद आत्मरक्षा के लिए फायरिंग की थी। यदि कार्रवाई नहीं करता तो मेरी भी जान को खतरा था। हथियार बरामदगी के बाद पुलिस ने हत्‍यारोपित को रेवती लायी और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच न्यायालय को सौंप दिया।

यह है पूरा मामला

गुरुवार को दुर्जनपुर व हनुमानगंज में सरकारी कोटे की दो दुकानों के लिए पंचायत भवन पर बैठक बुलाई गई थी। एसडीएम बैरिया सुरेश पाल, सीओ बैरिया चंद्रकेश सिंह, बीडीओ बैरिया गजेंद्र प्रताप सिंह के साथ ही रेवती थाने की पुलिस फोर्स मौजूद थी। दुकानों के लिये 4 स्वयं सहायता समूहों ने आवेदन किया था।

दुर्जनपुर की दुकान के लिए दो समूहों के बीच मतदान कराने का निर्णय लिया गया। अधिकारियों ने कहा कि वोटिंग वही करेगा, जिसके पास आधार या कोई दूसरा पहचान पत्र होगा। एक पक्ष के पास कोई आईडी प्रूफ नहीं था। इसको लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया। तभी जयप्रकाश उर्फ गामा पाल को धीरेंद्र ने ताबड़तोड़ चार गोलियां मार दीं।