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क्या गंगा में मिली लाशों से कोरोना फैलेगा?:टॉप एक्सपर्ट्स बोले- पानी से शरीर में वायरस जाने का सबूत नहीं, दूसरी बीमारियां हो सकती हैं

लखनऊ4 महीने पहलेलेखक: हिमांशु मिश्रा
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उत्तर प्रदेश और बिहार में बीते कुछ दिनों से गंगा और यमुना में बड़ी संख्या में लाशें नजर आई हैं। ये कोरोना मरीजों की भी हो सकती हैं। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि क्या पानी से भी कोरोना फैल सकता है? इस पर 'दैनिक भास्कर' ने राजीव गांधी सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. बीएल शेरवाल और कन्नौज राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के डायरेक्टर प्रो. मनोज शुक्ला से विशेष बातचीत की। हमने आपके मन में उठने वाले हर सवाल का जवाब लिया। पेश है सवाल-जवाब...

डॉ. बीएल शेरवाल से सवाल-जवाब

1. क्या पानी से कोरोना फैल सकता है?
अभी तक कोई ऐसा सबूत नहीं मिला है जिससे यह कहा जा सके कि पानी के जरिए ये वायरस फैल सकता है। इसलिए डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। पानी के जरिए कोरोना नहीं फैलेगा। हां, गंदा पानी पीने से लोगों को पेट से संबंधित कुछ दिक्कतें जरूर हो सकती हैं।

2. वायरस शरीर में कैसे पहुंचता है?
तमाम स्टडी और रिसर्च से पता चला है कि कोरोना वायरस नाक और मुंह से ही शरीर में पहुंचता है। 99% मामलों में ये नाक से शरीर तक पहुंचता है। 1% केस ऐसे होते हैं जहां मुंह के जरिए ये वायरस अंदर जाता है। अगर नाक से वायरस दाखिल होता है तो वह सीधे फेफड़े तक पहुंचेगा, लेकिन मुंह से शरीर में जाता है तो ज्यादा चांस होते हैं कि ये इंटेस्टाइन (आंत) में पहुंच जाए।

ऐसा होने पर लोगों में डायरिया जैसे कोविड के लक्षण जरूर दिख सकते हैं। अगर मुंह में छाला है या कटा हुआ है तो इसके फेफड़े तक पहुंचने के चांस बढ़ जाते हैं। फेफड़े में पहुंचने के बाद यह इंसान के अंदर मौजूद राइबोसोम की मदद से अपनी संख्या बढ़ा लेता है।

3. कोरोना वायरस के हमले पर शरीर का रिस्पॉन्स क्या होता है?
वायरस के हमले को शरीर पहचान लेता है। एक इम्यून सेल जिसे एंटीजन प्रेजेंटिंग सेल (APC) कहते हैं, वह सबसे पहले वायरस को घेरता है। यह वायरल प्रोटीन बनाता है, जिसे एंटीजन कहते हैं। यह एंटीजन शरीर के इम्यून सिस्टम को सक्रिय करता है और उसे बताता है कि किसी वायरस ने हमला किया है और इससे निपटने की जरूरत है।

इम्यून सिस्टम में सबसे पहले किलर T सेल्स सक्रिय होते हैं। यह एंटीजन को पहचान कर B सेल्स को एक्टिव करते हैं। यह T और B सेल्स हमारे शरीर के अंदर वायरस जैसे हमलावरों से लड़ने के लिए फ्रंटलाइन वॉरियर्स होते हैं। जैसे ही इन्हें पता चलता है कि वायरस ने हमला किया है, यह अपनी संख्या बढ़ाते हैं। हमले और इम्यून सिस्टम के सक्रिय होकर वायरस पर हावी होने तक का पीरियड बीमारी का होता है। इस दौरान बुखार, खांसी, गले में जकड़न, सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।

अगर मरीज को डायबिटीज, दिल की बीमारी या कोई अन्य क्रॉनिक बीमारी है तो इम्यून रिस्पॉन्स के एक्टिव होने से पहले ही वायरस अपनी संख्या बढ़ा चुका होता है। अगर सही इलाज न मिले तो मरीज की मौत भी हो सकती है।

4. संक्रमित को सांस लेने में दिक्कत क्यों होने लगी है?
यह कोरोना का एक नया लक्षण है। महामारी एक साल से अधिक पुरानी हो गई है। फिर भी नए-नए लक्षण सामने आ ही रहे हैं। सर्दी, बुखार, खांसी से शुरू होकर यह इन्फेक्शन गंभीर निमोनिया और सांस लेने की समस्या तक पहुंचता है। रिसर्चर्स ने कुछ समय में डायरिया, गंध-स्वाद का न होना, खून में थक्के जमने जैसे कई नए लक्षण देखे हैं। इसमें सबसे बड़ा लक्षण हैप्पी हाइपोक्सिया है। भारत में दूसरी लहर में युवाओं को इसका ही सामना करना पड़ा है।

हाइपोक्सिया का मतलब है खून में ऑक्सीजन के स्तर का बहुत कम हो जाना। स्वस्थ व्यक्ति के खून में ऑक्सीजन सेचुरेशन 95% या इससे ज्यादा होता है। पर कोरोना मरीजों में ऑक्सीजन सेचुरेशन घटकर 50% तक पहुंच रहा है। हाइपोक्सिया की वजह से किडनी, दिमाग, दिल और अन्य प्रमुख अंग काम करना बंद कर सकते हैं। कोरोना मरीजों में शुरुआती स्तर पर कोई लक्षण नहीं दिखता। वह ठीक और ‘हैप्पी’ ही नजर आता है।

प्रो. मनोज शुक्ला से सवाल-जवाब

1. वायरस शरीर में कब तक बना रहता है?
वायरस नॉन लिविंग होता है। इसे जिंदा रहने के लिए एक बॉडी चाहिए होती है। बॉडी में पहुंचने के बाद राइबोसोम की मदद से वायरस के कई डुप्लीकेट वर्जन तैयार हो जाते हैं। यह इंसान के मरने के बाद भी सालों तक बने रह सकते हैं। वायरस जीरो टेंपरेचर में भी जिंदा रहते हैं। हां, बॉडी से निकल जाता है तो ज्यादा से ज्यादा 24 घंटे में यह खत्म हो जाएगा।

2. क्या वायरस गंगा में खत्म हो सकता है?
हां, जरूर संभव है। ऐसा इसलिए, क्योंकि तमाम स्टडी से यही पता चलता है कि गंगा में एंटी बैक्टीरियल प्रॉपर्टी होती है। यह वायरस और बैक्टीरिया को खत्म करने की क्षमता रखती है। गंगा नदी हिमालय से बहकर आती है। ऐसे में उसमें कई तरह की जड़ी-बूटियों का तत्व भी होता है। ये कई स्टडी में कन्फर्म हुआ है।

सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार का क्या कहना है?
गंगा-यमुना में मिल रही लाशों से पानी के जरिए कोरोना फैलने के सवाल पर भारत सरकार के प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर विजय राघवन कहते हैं कि कोरोना वायरस पानी में नहीं फैलते हैं। इसलिए संक्रमण की वजह से नहर, नदियों को खतरा नहीं है। न ही वहां का पानी पीने से किसी को कोई दिक्कत हो सकती है।

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