हिंदी मीडियम में अंग्रेजी का दबदबा / देश के सबसे बड़े हिंदी भाषी पट्टी यूपी में 10वीं की बोर्ड परीक्षा में 5.27 लाख छात्र फेल

यूपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षा के लिए 56 लाख बच्चे पंजीकृत थे। हिंदी विषय में लगभग 7.98 लाख से छात्र फेल हो गए। जबकि, 2.39 लाख छात्रों ने हिंदी के पेपर को छोड़ दिया था।  यूपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षा के लिए 56 लाख बच्चे पंजीकृत थे। हिंदी विषय में लगभग 7.98 लाख से छात्र फेल हो गए। जबकि, 2.39 लाख छात्रों ने हिंदी के पेपर को छोड़ दिया था। 
X
यूपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षा के लिए 56 लाख बच्चे पंजीकृत थे। हिंदी विषय में लगभग 7.98 लाख से छात्र फेल हो गए। जबकि, 2.39 लाख छात्रों ने हिंदी के पेपर को छोड़ दिया था। यूपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षा के लिए 56 लाख बच्चे पंजीकृत थे। हिंदी विषय में लगभग 7.98 लाख से छात्र फेल हो गए। जबकि, 2.39 लाख छात्रों ने हिंदी के पेपर को छोड़ दिया था। 

  • हाईस्कूल में 5.27 लाख छात्र हिंदी में और 5.19 लाख छात्र अंग्रेजी विषय में फेल हुए
  • हाईस्कूल में 36 और इंटरमीडिएट में 107 विषयों में परीक्षा हुई थी, 27 जून आया था रिजल्ट
  • यूपी बोर्ड परीक्षा में हाईस्कूल में 83.31%, इंटरमीडिएट में 74.63% छात्र पास हुए

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 04:09 PM IST

लखनऊ. यूपी बोर्ड की हाईस्कूल की परीक्षा में अंग्रेजी से ज्यादा छात्र हिंदी विषय में फैल हुए हैं। 27 जून को जारी रिजल्ट में हाईस्कूल के 5.27 लाख छात्र हिंदी विषय में फेल हो गए जबकि, अंग्रेजी विषय में फेल होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या 5.19 लाख है। यह आंकड़े इसलिए भी गौर करने वाले हैं, क्योंकि हिंदी भाषी बेल्ट में उत्तर प्रदेश एक बड़ा राज्य है। यहां आम बोलचाल की भाषा में हिंदी का इस्तेमाल सर्वाधित होता है।

ऐसा ही रिजल्ट 2019 में भी रहा था। 2019 हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में हिन्दी में 5.74 लाख से अधिक छात्र फेल हुए थे। वहीं, अंग्रेजी में 5.02 लाख छात्र फेल हुए थे। साल 2020 के रिजल्ट में 12वीं में 2.70 लाख छात्र हिंदी के पेपर में फेल हुए हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जाता सकता है छात्र कितनी बड़ी संख्या में हिंदी के पेपर को नजरअंदाज कर रहे हैं। 

फिर भी घट गए हिंदी में फेल होने वाले छात्र

साल 2019 में 10वीं और 12वीं कक्षा में 10 लाख छात्र हिंदी के पेपर में फेल हो गए थे। वहीं, साल 2018 में कुल 56 लाख छात्रों में से 11 लाख से ज्यादा हिंदी के पेपर में असफल रहे थे। इस साल फेल होने वालों की संख्या 9 लाख से कम है। हालांकि, जो छात्र इस साल हिंदी के पेपर में फेल हुए हैं उन्हें सप्लीमेंट्री परीक्षा देने का मौका किया जाएगा।

इंटर में संस्कृत का रिजल्ट बेहतर हुआ तो हाईस्कूल में नहीं 

इंटरमीडिएट में संस्कृत का परिणाम 2019 की तुलना में काफी बेहतर हुआ है। पिछले वर्ष इस विषय में सिर्फ 53.92 प्रतिशत परीक्षार्थियों को सफलता मिली थी, जबकि इस साल 73.63 प्रतिशत पास हुए हैं। लेकिन, हाईस्कूल में संस्कृत का परिणाम खराब रहा। इस विषय में सिर्फ 62.50 प्रतिशत परीक्षार्थी पास हुए हैं।

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना